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RBI Monetary Policy August 2020

RBI Monetary Policy: EMI कम होने की उम्‍मीदें टूटीं, Repo Rate में भी नहीं हुआ बदलाव

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New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास द्विमासिक मौद्रिक नीति के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि  मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक चार अगस्त से 6 अगस्त, 2020 के बीच हुई। MPC ने रेपो रेट को चार फीसद पर यथावत रखा है। दास ने कहा कि क्रेडिट ग्रोथ 6 फीसद पर है, जो पिछले 6 दशक में सबसे निचले स्तर पर है। आपको बता दें कि हाल की मौद्रिक नीति समीक्षाओं में रिजर्व बैंक ने वित्‍तीय स्थिरता पर ज्‍यादा फोकस किया है। साथ ही ग्रोथ को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया है। फरवरी 2020 से अबतक RBI ने रेपो रेट में 1.15 फीसद की कटौती की है।

RBI Monetary Policy August 2020

  • रिजर्व बैंक द्वारा द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले शेयर बाजार में तेजी का रुख है। 11.56 बजे एनएसई का निफ्टी 63 अंकों की बढ़त के साथ 11,164.65 के स्‍तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, बैंक निफ्टी 0.03 फीसद की गिरावट के साथ 21502.80 के स्‍तर पर कारोबार करता नजर आया।
  • Repo Rate में नहीं हुआ बदलाव। मौद्रिक नीति कमेटी ने इसे 4 फीसद पर रखा बरकरार।
  • दास ने कहा कि जुलाई में कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में कोविड-19 के मामलों में तेजी आने से अर्थव्यवस्था में रिकवरी की उम्मीदों को झटका लगा है।
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोविड-19 की वजह से इस साल की पहली छमाही में महंगाई दर में वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, दूसरी छमाही में इसमें कमी आने की उम्मीद है।
  • 12.12 बजे बैंक निफ्टी 0.24 की गिरावट के साथ 21458.15 के स्‍तर पर कारोबार करता नजर आया।
  • केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने इकोनॉमी को लेकर अपने रुख को ‘एकोमोडेटिव’ रखा है।
  • आरबीआई गवर्नर दास का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार होना शुरू हो गया था, लेकिन संक्रमण में वृद्धि ने लॉकडाउन के लिए मजबूर कर दिया
  • क्रेडिट ग्रोथ 6 दशक के निचले स्तर पर : हाल में केंद्रीय बैंक ने कई चरण में सिस्टम में जबरदस्त नकदी डालने का काम किया है। वहीं, सरकार ने भी कई तरह के प्रयास किए हैं। हालांकि, किसी भी तरह की कोशिश से बॉरोइंग गतिविधियों को मजबूती नहीं मिली है। क्रेडिट ग्रोथ 6 फीसद पर है, जो पिछले 6 दशक में सबसे निचले स्तर पर है।
  • केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि मुद्रास्फीति पर दबाव होने की वजह से रेपो रेट में कटौती पर किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई। खुदरा महंगाई दर जून में 6.09 फीसद के स्तर तक पहुंच गई। यह रिजर्व बैंक के 2-6 फीसद के लक्ष्य से अधिक है।
  • आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सबसे कम निवेश ग्रेड बांड के भी प्रसार में काफी कमी आई है।
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर नकारात्मक अंक में रहने का अनुमान है। हालांकि, कोविड-19 को लेकर किसी भी तरह की सकारात्मक खबर से परिदृश्य बदल जाएगा।
  • अतिरिक्त विशेष लिक्विडिटीः दास ने सिस्टम में अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये डालने की घोषणा की। ये अतिरिक्त लिक्विडिटी नाबार्ड और नेशनल हाउसिंग बैंक को उपलब्ध करायी जाएगी। इससे एनबीएफसी और हाउसिंग सेक्टर को मौजूदा संकट से निकलने में मदद मिलेगी।

LIVE RBI Monetary Policy, यहां देखें:

अर्थव्‍यवस्‍था पर कोरोना वायरस के प्रभावों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने मार्च में तीन महीने के लिए लोन मोरेटोरियम (कर्ज की किस्‍तों के भुगतान के लिए मोहलत) की सुविधा दी कर्ज लेने वालों को दी थी। यह सुविधा शुरू में मार्च से 31 मई तक तीन महीने के लिए दी गई थी। बाद में रिजर्व बैंक ने इसे 3 महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए लागू कर दिया था। उम्‍मीद की जा रही है कि हालात को देखते हुए इसकी मोहलत आज बढ़ाई जा सकती है।

क्‍या होता है रेपो रेट (Repurchase Rate or Repo Rate)?

Repo Rate को कुछ इस तरह समझिए कि बैंक हमें कर्ज देते हैं और उस कर्ज पर हमें ब्याज देना पड़ता है। ठीक इसी प्रकार बैंकों को भी अपने लोन देने के इस काम के लिए भारी-भरकम राशि की जरूरत होती है और इसके लिए वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से उधार लेते हैं। बैंकों द्वारा लिए जाने वाले इस लोन पर RBI जिस दर से ब्याज वसूलता है, उसे रेपो रेट कहते हैं।

रेपो रेट का आम आदमी पर असर

जब बैंकों को RBI कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्‍ध कराएगा, मतलब जब रेपो रेट कम होगा तो बैंक भी अपने ग्राहकों को सस्ता लोन दे सकते हैं। इसी प्रकार, यदि RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है और बैंक अपने ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा कर देते हैं।