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बाबरी मस्जिद मुद्दे पर कोई समझौता नहीं: शिया पर्सनल लॉ बोर्ड

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शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने AIMPLB को एक पत्र लिखकर नौ मस्जिदों का उल्लेख किया था जिन्हे उनके अनुसार मंदिरों को तोड़कर बनवाया गया था। जिन्हें उन्होने हिंदुओं को “वापस” दिये जानें की बात कही थी…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

लखनऊः शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मामले में किसी भी तरह के समझौते की संभावना को खारिज करते हुये कहा है कि मस्जिद के स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण ही किया जाना चाहिए।

बता दें कि शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष, वसीम रिज़वी ने पहले AIMPLB (ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होने 9 मस्जिदों का उल्लेख करते हुये कहा था कि चूँकि यह नौ मस्जिदें मंदिरों को तोड़कर बनवाई गयी थी इसलिए इन्हे हिंदुओं को “वापस” दिया जाना चाहिए।

अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने जनमंच न्यूज़ से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि “बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर कोई भी समझौता बोर्ड को अस्वीकार्य है। केवल सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हमें स्वीकार्य होगा। मस्जिद अल्लाह का घर है और बोर्ड हमेशा मस्जिद के पक्ष में रहा है।”

उन्होने आगे वसीम रिजवी का नाम लिये बिना ही कहा कि “कुछ लोग सस्ता प्रचार पाने के लिए इस मुद्दे के बारे में अनावश्यक रूप से बात कर रहे हैं। वो जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वे समुदायों के बीच विभाजन बनाते हैं और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ देते हैं।”

कुछ दिन पहले, शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने AIMPLB को एक पत्र लिखा था, जिसमें देश भर में नौ मस्जिदों का उल्लेख किया गया था, जिन्हें हिंदुओं को “वापस” दिये जानें की वकालत करते हुये कहा गया था कि इन नौ मस्जिदों को मंदिरों को तोड़कर बनवाया गया था। पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए AIMPLB के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा था कि मीडिया रिजवी जैसे लोगों पर अनावश्यक ध्यान दे रही है, जो दो समुदायों के बीच भाईचारे की भावना को कम कर रहे हैं।

“दोनों समुदायों के लोग अपने-अपने पूजा स्थानों को लेकर खुश और संतुष्ट हैं, लेकिन रिजवी जैसे लोग देश में सांप्रदायिक विभाजन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को नजरअंदाज करना चाहिए,” उन्होंने कहा था।

आर्ट ऑफ लिविंग संस्थापक श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता प्रयासों के बारे में बताते हुए यासूब अब्बास ने कहा, “जहां तक ​​इस मुद्दे पर श्री श्री की मध्यस्थता का सवाल है, तो उस प्रयास का कोई अर्थ नहीं था, क्योकि रविशंकर जी गलत लोगों से मिल रहे थे, और वो गलत लोग श्री श्री का प्रयोग अपने निजी स्वार्थो की पूर्ति के लिये कर रहे थे। श्री श्री नें इस मामले में शामिल पार्टियों से कभी मुलाकात ही नही की।

अब्बास ने कहा कि वह मुझसे भी मिलना चाहता थे, लेकिन मैंने अस्वीकार कर दिया और बाबरी विवाद को सुलझाने के लिये उनके फार्मूला की जानकारी मांगी जो उनके पास नही था। उधर से जवाब आया कि यह सिर्फ मौखिक वार्ता है और कुछ भी नहीं। श्री श्री रविशंकर बाबरी के मुद्दे पर कोर्ट के बाहर समझौते के लिए AIMPLB के बेदखल सदस्य सलमान नदवी के साथ बातचीत कर रहे थे।

हालांकि मुस्लिम नेता नें लखनऊ में आध्यात्मिक गुरु के साथ हाल ही की एक बैठक के बाद शांति वार्ता करके बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद का हल निकाले जानें के बजाए कहा कि वे हर किसी की तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे।

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