Preeti Singh Chauhan

हर पुरुष अत्याचारी नहीं, हर महिला बेचारी नहीं: प्रीति सिंह चौहान

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी- एक महिला होते हुए तमाम महिलाओं को अवगत कराना चाहती हूं कि हम सबको अब इज़्ज़त की उम्मीद दूसरों से बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए. बल्कि, उसे स्वयं के बलबूते अर्जित करना चाहिए.

घर में, परिवार में, समाज में, कार्यक्षेत्र में हर जगह अब शुरुआत इज़्ज़त देने की है स्वयं को. लेकिन, मैं तमाम महिलाओं से यह गुजारिश करना चाहूंगी कि आप सब समाज में सम्मान के हकदार तभी होंगे, जब आप सब भी अपना पूरा सहयोग देंगे. स्वयं के लिए “हर पुरुष अत्याचारी नहीं और हर महिला बिचारी नहीं” ऐसे नए मामले देखने को मिलते है.

जिसमें औरते यह कहकर पुरुषों पर आरोप लगाती है कि हमारे साथ गलत हुआ.  हमें बहलाया गया, फुसलाया गया, पुरुषों द्वारा. अरे मैडम जी ऑटो वाला आपसे 5रुपये ज्यादा नहीं ले पाता. क्यूंकि, आप जागरूक है, सब्जी वाले से आप भर-भर के मोल भाव कर लेती है. फिर यहां पर आप क्यों अपने प्रति सजग नहीं थी.

मेरा यह बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि सारी महिलाएं ऐसे झूठे आरोप लगाती है या सारे पुरुष दूध के धुले हुए है. मैं सिर्फ समझाना यह चाहती हूं कि फसाया सिर्फ औरतों को नहीं, बल्कि पुरुषों को भी जाता है. कभी बदले की भावना से तो कभी जैसा हम चाहते है, अगर वैसा न हुआ तो. मेरा आप सबसे निवेदन है सजग बनिए, सरल बनिए, खुश रहिए, खुश रहने दीजिए.

बात अगर दहेज की करें, ये भी समाज की एक मानसिक बीमारी है. दहेज लड़के लेते है, बिल्कुल सही बात है. लेकिन, उन्हें देता कोन है मैंने कई लड़कियों को देखा है वो हमेशा लेने वालो को कोसते रहते है. देने को मना करने के लिए आप आगे क्यों नहीं आती है. क्यों अपने मां बाप का ढाल नहीं बनती है.

समाज में बुराइयां है. लेकिन, अगर हम उनको समाप्त करने की कोशिश नहीं करेंगे, तो इसका मतलब यही है कि हम उसे खुद बढ़ावा दे रहे है. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जो गलत है वो गलत है और उसके लिए आवाज उठानी चाहिए मेरे हिसाब से यही जागरूकता है.