National Rural Health Mission

शिवराज सरकार के निर्णय पर जमी लापरवाही की मोटी धूल की परत

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत सीधी जिले को वर्ष 2014 में उपलब्ध कराई गई मोबाइल हेल्थ केयर यूनिट कम डायग्नोस्टिक वैन के पहिए पिछले करीब तीन वर्ष से थमे हुए हैं.

इलाज मे आने वाले आवश्यक जांच की सुविधाओं से युक्त यह वैन जिला मुख्यालय के नर्सेस कॉलेज के सामने खड़े-खड़े कबाड़ मे तब्दील होती जा रही है। वैन में लगे आवश्यक जांच उपकरण एवं मशीनरी भी धीरे-धीरे खराब होते जा रहे हैं.

लेकिन, चार वर्ष बाद भी जिला प्रशासन न तो लाखों के इस वाहन के चलाने हेतु बजट की व्यवस्था बनवा पाया और न ही स्टाफ की, लिहाजा स्वास्थ्य विभाग अब इस वाहन के पूरी तरह से कबाड़ में तब्दील हो जाने का इंतजार कर रहा है, ताकि इसकी कबाड़ के भाव नीलामी करवा सके.

विभागीय सूत्रों की माने तो जिले की तत्कालीन कलेक्टर स्वाती मीणा के कार्यकाल में वर्ष 2014 में करीब अस्सी लाख रूपए में जिला पंचायत के मद से इस वाहन की खरीदी की गई थी. जिला प्रशासन द्वारा जिले के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बनाने के लिए मोबाइल हेल्थ केयर यूनिट सह डायग्नोस्टिक वैन की खरीदी की गई थी.

वाहन की खरीदी तो कलेक्टर के निर्देश पर हो गई, लेकिन इस वाहन को चलाने के लिए बजट किस मद से खर्च होगा इसका निर्णय नहीं हो पाया, लिहाजा बमुस्किल किसी तरह एक वर्ष तो इस वाहन को चलाया गया, लेकिन इसके बाद वाहन के पहिए ऐसे थमे की आज तक थमे हुए हैं.

आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त थी वैन-

इस वेन में स्वास्थ्य सुविधा की सारी सुविधाएं तथा उपकरण मौजूद हैं. इसमें पैथोलॉजी रूम, सेमी ऑटो एनालाइजर, सेंट्रीफ्यूज, माइक्रोस्कोप, ऑपरेशन थिएटर सह रैंप, डिजिटाइज्ड ऑक्सीजन पैनल, कोल्ड एवं वार्म बाक्स, महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण, उनके आपरेशन तथा स्त्री रोग निदान के लिए सारी सुविधाएं तथा उपकरण मौजूद हैं. वैन में डिजिटल एक्सरे मशीन, शिविर हेतु टेंट की सुविधा, डॉक्टर्स रूम, रेटिनोस्कोपी, थ्री-चैनल, ईसीजी मशीन, फस्र्ट एड बाक्स जैसी सुविधाएं मौजूद हैं.

ये सेवाएं उपलब्ध कराना था वैन को-

इस वाहन में चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल स्टाफ मौजूद रहना था, जिन्हे ग्रामीणों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर उन्हें नि:शुल्क दवा वितरित करना था. इसके साथ ही संस्थागत प्रसव की सुविधा जिले के जिन स्थानों में उपलब्ध नहीं है, ऐसे स्थानों में डायग्नोस्टिक वेन में ही गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराया जाना था.

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह वाहन मुख्य रूप से जिले के कुसमी, मझौली जैसे आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में जाकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य का परीक्षण करना था. इस वाहन में हृदय रोग का उपचार भी किया जाना था.

यह था उद्देश्य-

इस वाहन को चलाए जाने का उद्देश्य यह था कि ग्रामीणों को उपचार कराने के लिए अपने ग्राम से कई मील दूर स्थित स्वास्थ्य केंद्र में आने की मजबूरी नहीं रहेगी, बल्कि उनके घर में ही उपचार हो जाएगा. आदिवासी महिलाओं एवं पुरूषों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार के लिए यह कदम क्रांतिकारी माना गया था. लेकिन, बजट के अभाव में इस वाहन के पहिए थम गए हैं.

महज एक वर्ष ही चल पाई वैन- 

विभागीय सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग को मोबाइल वैन हैंडओवर होने के बाद बमुस्किल एक वर्ष ही यह वाहन चल पाया, जब तक कलेक्टर स्वाती मीणा थी तब तक वाहन को कहीं न कहीं से बजट की व्यवस्था बनाई जाती रही। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद इस वाहन को संचालित करने के लिए बजट मुहैया नहीं हो पाया जिससे वाहन के पहिए थमे हुए हैं.

जिला स्तर से खरीदी बन रही समस्या-

सर्वसुविधायुक्त इस वैन की खरीदी जिला स्तर से होना ही प्रमुख समस्या बना हुआ है, शासन स्तर से इसके संचालन के लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा. जिला स्तर पर इतना बजट है नहीं कि वाहन के मेंटीनेंश व स्टाफ में खर्च किया जा सके. बजट हेतु उच्चाधिकारियों को कई बार पत्राचार किया गया. लेकिन, वहां से इस वाहन के संचालन के लिए अलग से बजट देने से इंकार कर दिया गया है, लिहाजा वाहन का संचालन नहीं हो पा रहा है.