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विवादित भूमि पर मंदिर बनाने, मुस्लिमों को मस्जिद के लिए वैकल्‍प‍िक जगह देने के आदेश

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Ayodhya Case Verdict 2019 Live Update: 

11.38 AM-  ज़फरयाब जिलानी, सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील: हम फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन हम संतुष्ट नहीं हैं, हम आगे की कार्रवाई तय करेंगे।

11.26 AM- सुप्रीम कोर्ट के परिसर में लगे जय श्रीराम के नारे। अदालत परिसर में वकीलों ने जब जय श्रीराम के नारे लगाए तो दूसरे वरिष्‍ठ वकीलों ने उन्‍हें ऐसा करने से रोका…

11.20 AM- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह तीन से चार महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना के लिए योजना बनाए और विवादित स्थल को मंदिर निर्माण के लिए सौंप दे। अदालत ने यह भी कहा कि अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्‍प‍िक जमीन सुन्नी वक्‍फ बोर्ड को प्रदान करे।

11.12 AM- मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए वैकल्‍प‍िक जगह देने के आदेश SC directs allotment of alternative land to Muslims to build new mosque. PTI अदालत ने यह भी कहा कि विवादित ढांचा को गिराना कानून का उल्लंघन था। Damage to Babri mosque was violation of law: SC. PTI

11.08 AM- अदालत ने कहा कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में अपने मामले को स्थापित करने में विफल रहा है। UP Sunni Central Waqf Board has failed to establish its case in Ayodhya dispute: SC. PTI

11.05 AM- अदालत ने कहा कि मुसलमानों ने मस्जिद नहीं छोड़ी थी। हालांकि, हिंदू भी राम चबूतरा पर पूजा करते थे। उन्होंने गर्भगृह पर भी स्वामित्व का दावा किया।

 11.00 AM- साक्ष्‍यों से पता चलता है कि मुस्लिम शुक्रवार को विवादित स्‍थल पर नमाज पढ़ते थे। इससे संकेत मिलता है कि उनका अधिकार खत्‍म नहीं होता है।

Evidence suggest Muslims offered Friday prayers at mosque which indicates they have not lost possession: SC. PTI

10.58 AM- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई पर हिंदुओं द्वारा पूजा की जाती थी। अभिलेखों में दर्ज साक्ष्य से पता चलता है कि हिंदुओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्‍से पर कब्‍जा था।

10.53 AM- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की आस्था और उनका विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। हिंदुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। यह व्यक्तिगत विश्वास का विषय है

10.50 AM- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं थी। The underlying structure was not an Islamic structure- PTI

10.45 AM- सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संदेह से परे है। इसके अध्ययन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अदालत ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज किया। निर्मोही अखाड़ा का दावा केवल प्रबंधन का है। निर्मोही अखाड़ा सेवादार नहीं है।

10.42 AM-SC का कहना है कि विवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन थी।

10.39 AM-गोगोई ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी।

10.33 AM- सीजेआई गोगोई ने फैसले में कहा कि हम 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं।

10.29 AM- पांच जजों की सुप्रीम कोर्ट की बेंच जल्द ही Ayodhya भूमि मामले में फैसला सुनाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन, सीएस वैद्यनाथन, राजीव धवन, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मामले में विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य वकील अदालत में पहुंचे।

10.27 AM- हाईलेवल सुरक्षा बैठक के लिए गृह सचिव अजय भल्ला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर पहुंचे।

10.25 AM- सुप्रीम कोर्ट के सभी पांचों न्‍यायाधीश अदालत पहुंच चुके हैं।

10.20 AM- कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, हम शुरू से शांति के पक्ष में हैं। मैं भी शांति का पुजारी हूं। हम सभी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करना चाहिए।

– मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई Chief Justice of India Ranjan Gogoi सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। वहीं राम लला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन डॉ. राजीव धवन, सुन्‍नी वक्‍फबोर्ड के वकील राजीव धवन सुप्रीम कोर्ट में सीजेआइ रंजन गोगोई के कोर्ट रूम के बाहर पहुंचे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अम‍ित शाह ने अपने आवास पर एक उच्‍च स्‍तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख अरविंद कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अदालत के बाहर भारी तादात में वकीलों की भीड़ जमा है।

उत्‍तर प्रदेश के एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि अयोध्‍या में स्थिति नियंत्रण में है। हालात सामान्‍य है और सारे बाजार पूर्ववत खुले हैं।

उत्‍तर प्रदेश के एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि अयोध्‍या में शांति बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों, आरपीएफ, पीएसी और 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। 250 सब इंस्‍पेक्‍टरों के साथ साथ बड़े अधिकारी भी तैनात किए गए हैं। यही नहीं इस ऐतिहासिक शहर में 35 सीसीटीवी और 10 ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जा रही है।

ओडिशा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, मैं सभी देशवासियों से अपील करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्‍वीकार करें और उसका सम्‍मान करें। भाईचारे की भावना हमारे धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की पहचान है।

यूपी पुलिस के एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि अयोध्‍या में हालात सामान्‍य हैं। श्रद्धालु श्री राम लला मंदिर के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं के आने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। अयोध्‍या में बाजार खुले हैं।

फैसले को देखते हुए कर्नाटक के हुबली-धारवाड़ में भी धारा-144 लगा दी गई है। यही नहीं क्षेत्र में शराब की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

फैसले को देखते हुए दिल्‍ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर के आस पास वाले इलाकों में धारा-144 लगा दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत दोपहर एक बजे मीडिया को संबोधित करेंगे।

उत्‍तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह DGP OP Singh ने कहा कि विश्‍वास बहाली के सारे कदम उठाए हैं। हमनें पूरे यूपी में धर्मगुरुओं और नागरिकों के साथ 10 हजार बैठकें की हैं। हम अपील कर रहे हैं कि लोग सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाए ना तो इन पर ध्‍यान दें।

अयोध्‍या केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर पूरे उत्‍तर प्रदेश में धारा-144 लगा दी गई है।

अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास ने कहा, मैं देशवासियों से अपील करता हूं कि सभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करें और शांति बनाए रखें। प्रधानमंत्री ने सही कहा है कि इस फैसले में किसी की हार या जीत नहीं होगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, हमें न्‍यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्‍वीकार करें और शांति बनाए रखें।

राजस्‍थान सरकार ने राज्‍य के सभी स्‍कूल कॉलेजों को बंद करने के निर्देश दिए। कई इलाकों में धारा-144 लगाई गई। राजस्‍थान के जैसलमेर में अयोध्‍या फैसले के मद्देनजर 30 नवंबर तक धारा-144 लगाई गई।

Highlights-

क्या है मामला

मुकदमें के मुताबिक, बाबर के आदेश पर 1528 में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर विवादित ढांचे का निर्माण हुआ था। यह ढांचा हमेशा हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद का विषय रहा है। हिंदू विवादित स्थल को भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं और वहां अपने अधिकार का दावा करते हैं। जबकि मुस्लिम विवादित जमीन पर अपना मालिकाना हक मांग रहे हैं। छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा ध्‍वस्‍त हो गया था जिसका केस लखनऊ की अदालत में लंबित है।

पीएम मोदी ने शांति बनाए रखने की अपील की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्‍होंने एक के बाद एक अपने कई ट्वीट्स  में कहा कि अयोध्या पर फैसले को किसी समुदाय की हार या जीत के तौर पर नहीं देखना चाहिए। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।

हाईकोर्ट ने दिया था यह आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को दिए फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा रामलला विराजमान को, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा मुसलमानों को देने का आदेश था। हाईकोर्ट ने रामलला विराजमान को वही हिस्सा देने का आदेश दिया था जहां वे अभी विराजमान हैं। इसके खिलाफ सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में 14 अपीलें दाखिल की थी।

शिया वक्फ बोर्ड ने किया था यह एलान

शिया वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के मुकदमें का समर्थन किया था। बोर्ड ने विवादित भूमि को शिया वक्फ बताते हुए कहा था कि 1528 में बाबर के आदेश पर उसके कमांडर मीर बाकी ने उक्त ढांचे का निर्माण कराया था। हाईकोर्ट ने भूमि एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को दिया है न कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को। सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई हक नहीं बनता और चूंकि यह शिया वक्फ था इसलिए वह हाईकोर्ट से मिला अपना एक तिहाई हिस्सा हिंदुओं को देता है।

हिंदू-मुस्लिम दोनों ने मांगा है मालिकाना हक

दोनों पक्षों की ओर से जमीन पर दावा करते हुए कोर्ट से उन्हें मालिक घोषित करने की मांग की गई है। हिंदू पक्ष विशेष तौर पर रामलला की और से कहा गया था कि बाबर ने राम जन्मस्थान मंदिर तोड़कर वहां विवादित ढांचे का निर्माण कराया था। साथ ही यह दलील दी थी कि जन्मस्थान स्वयं देवता हैं। हिंदू पक्ष ने एएसआइ रिपोर्ट का हवाल दिया था जिसमें विवादित स्थल के नीचे उत्तर कालीन मंदिर से मेल खाता विशाल ढांचा होने की बात कही गई थी।