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आजादी मार्च पर बुरे फंसे इमरान, PAK सेना ने भी छोड़ा साथ, कहा- हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

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New Delhi: पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ चल रहे आजादी मार्च को लेकर पाकिस्तानी सेना ने बड़ा बयान दिया है। पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को दावा किया कि वह इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार और विपक्ष के बीच इस मार्च के लिए मध्यस्थता नहीं करेगी। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि आजादी मार्च एक राजनीतिक गतिविधि है और सेना का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

गफूर ने कहा कि पाकिस्तान सेना राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से निपटने के लिए व्यस्त थी जो जेयूआई-एफ की आजादी मार्च जैसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल थी।मेजर जनरल गफूर ने यह पूछे जाने पर कि क्या सेना प्रमुख पीटीआई के नेतृत्व में चल रहे में मध्यस्थता करेंगे या नहीं, उन्होंने कहा, ‘ हम राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा संबंधी मामलों में व्यस्त हैं और इन आरोपों का जवाब देना चाहते हैं।

सेना साफ कर रही अपना रुख

इससे पहले सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने शनिवार को एक अन्य टीवी इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान सेना ने हमेशा कानून और संविधान के मुताबिक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों का समर्थन किया है। सुरक्षा का हवाला देते हुए गफूर ने कहा, ‘सेना पिछले 20 सालों से राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारियों में लगी हुई है, खासकर पिछले 20 सालों से जैसा कि मैंने पहले भी कहा है। हमारी जिम्मेदारियां हमें किसी भी तरह की (राजनीतिक) गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं देती हैं।’

6 दिनों से जारी है विरोध मार्च

पाकिस्तान में पिछले 6 दिनों से जारी आजादी मार्च का उद्देश्य इमरान खान के इस्तीफे की मांग को लेकर है, जिन्हें पाकिस्तान में सरकार बनाए अभी बस एक साल से अधिक का समय हुआ है। फजलुर रहमान उर्फ ​​मौलाना डीजल के अनुसार आजादी मार्च  संविधान, लोकतंत्र और पाकिस्तान के लिए निकाला जा रहा है।

2014 में नवाज का हुआ था विरोध

पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ हो रहा आजादी मार्च देश के सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन है। आजादी मार्च ने 2014 में नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली तत्कालीन पाकिस्तान सरकार में धरना देने वालों की संख्या को पार कर दिया है।