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योजना मंडल सीधी के अधिकारियों ने उड़ाया लोक सूचना अधिनियम का मजाक

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। सरकारी कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिहाज से शुरू किए गए सूचना के अधिकार कानून का सीधी जिले में खुला उल्लंघन अधिकारी करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस कानून में बनाया गया नियमों का माहौल तब और ज्यादा उड़ानें लगते हैं, जब उनके विभाग की जानकारी कोई जानकार व्यक्ति लेने का प्रयास करता है, तो उन्हें अपने किए गए करतूत का पर्दाफाश होने का डर सताने लगता है। पहले तो वे आवेदन लेने से ही ना-नुकुर करने लगते हैं, यदि आवेदन डाक के माध्यम से भेजा जाए, तो उसे भी लेने से इंकार करने में वे तनिक भी संकोच नहीं करते।

ऐसा ही मामला कलेक्टर दफ्तर के पास लगने वाले योजना मंडल कार्यालय का सामने आया है। जहां के अधिकारी डाक लेने से ही इंकार कर दिया। हाथों-हाथ दिए जाने वाले आवेदन को लेना तो दूर, यदि उन्हें डाक के माध्यम से भी पत्र मिला और उसमें लोक सूचना अधिकारी लिखा हुआ दिख गया, तो वे सीधे डाक पहुंचाने वाले पोस्टमैन से लेने से इनकार करने का उल्लेख कराकर वापस करा देते हैं।

बता दें, कि जिले के टकटैया गांव के निवासी मानिक लाल साकेत, पिता तुलसीदास साकेत ने योजना मंडल के अधिकारी को हाथों-हाथ पत्र देकर सीधी संसदीय क्षेत्र 11 के सांसद द्वारा सांसद मद से खर्च किए गए। निधि के जानकारी के साथ साथ वर्ष 2014 वर्ष 15 16 17 18 एवं 18 19 मे लोकसभा के सांसद मदद से स्वीकृत किए गए।

निर्माण कार्य की जानकारी देने के साथ-साथ कितने लोगों को आर्थिक सहायता अनुदान राशि कार्यों की लागत कार्यस्थल का विवरण क्रियान्वयन एजेंसी के नाम एवं सांसद निधि से कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन का प्रमाण पत्र के अलावा निजी स्कूलों को दिए गए अनुदान राशि का विवरण मांगा था।

जिसे पढ़कर जिला योजना मंडल अधिकारी ने उनका पत्र लेने से ही इंकार कर दिया था। आरटीआई कार्यकर्ता मानिक लाल साकेत ने अधिकारी की जानकारी नहीं देने के भावनाओं को देख कर डाक के माध्यम से जानकारी मांगने का प्रयास किया। उन्होंने 13 फरवरी 2019 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पत्र भेजा 14 फरवरी को पत्र योजना मंडल पहुंच गया।

रजिस्टर्ड डाक लेकर पहुंचे पोस्टमैन से पत्र लेकर अधिकारी ने पहले तो पत्र खोल कर पढ़ लिया। फिर पोस्टमैन पर डाक नहीं लेने को लिख कर वापस कर देने का दवा बनाने लगे। वे अपने मकसद में कामयाब भी हो गए। पोस्ट मैंने 14 फरवरी को ही रजिस्टर्ड डाक में लेने से इनकार लिखकर डाक भेजने वाले के पते पर वापस कर दिया।

जिसको लेकर सूचना चाहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता को जहां आर्थिक शपथ लगी हैं, जिले के अधिकारियों द्वारा अपनाए जा रहे हैं। सूचना के अधिकार कानून तोड़ने की भावनाओं को लेकर असंतोष का भाव भी पनप रहा है।

बता दें, कि योजना मंडल के अधिकारी सांसद और विधायक के द्वारा किए गए अनुशंसा में फेरबदल करके अपने चाहने वाले लोगों को काम सौंप देने का खेल बदस्तूर जारी किए हुए जिसको छुपाने के लिए आरटीआई से मांगी जाने वाली जानकारी को देना उचित नहीं समझते।

इनका कहना है:-

सांसद और विधायकों द्वारा किए जा रहे जिले के विकास कार्यों के अनुशंसा की जानकारी योजना मंडल से चाहा था। लेकिन, अधिकारियों ने जानकारी देना तो दूर पत्र लेना भी उचित नहीं समझा, यहां तक कि डाक से भेजे गए पत्र को भी वापस कर दिया है।

इसको लेकर मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात करके उनके अधिकारियों की असलियत बताने के साथ साथ सांसद के 5 वर्ष के किए गए कार्यों के अनुशंसा की जानकारी दिलाने की अपेक्षा की जाएगी।