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पुलिसकर्मियों का चिकित्सक से अभद्रता, चिकित्सकों ने किया कार्य का बहिष्कार

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Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा

धौलपुर। राजकीय मंगल सिंह सामान्य चिकित्सालय की इमरजेंसी में शनिवार साढ़े तीन बजे दुर्घटना में घायल दो जनों को लेकर दो पुलिसकर्मियों ने वहां तैनात चिकित्सक तथा नर्सिंग कर्मियों से गाली-गलौज करते हुए अभद्रता कर दी। सुबह होते-होते मामले ने तूल पकड़ लिया और जैसे-जैसे चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ अस्पताल पहुंचा तो पता लगते ही कार्य बहिष्कार कर दिया।

कोई भी चिकित्सक व नर्सिंगकर्मी न तो आउटडोर पहुंचा और ना ही वार्डों में ही राउण्ड लिया। इससे आउटडोर में चिकित्सकों को दिखाने आए मरीज वहां खड़े चिकित्सकों को इंतजार करते रहे। इस दौरान सभी चिकित्सक तथा नर्सिंगकर्मी पीएमओ कार्यालय में एकत्रित हो गए और जमकर पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

इस दौरान रोष प्रकट करते हुए पीएमओ को लिखित में ज्ञापन सौंपा। इस पर पीएमओ डॉ. जनार्दन सिंह परमार ने जिला पुलिस अधीक्षक अजय सिंह तथा जिला कलक्टर नेहा गिरी से मोबाइल पर वार्ता कर सम्बंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर एसपी ने शाम तक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इसके बाद पीएमओ ने सभी चिकित्सकों को आउटडोर में जाने की समझाइश की, लेकिन चिकित्सक तथा नर्सिंग स्टाफ जिला कलक्टर को ज्ञापन देने उनके आवास पर पहुंच गए। लेकिन कलक्टर ने कार्यालय पहुंचने की बात कही। लेकिन काफी इंतजार के बाद चिकित्सक करीब बारह बजे चिकित्सालय लौट आए। 

क्या है मामला:-

पीड़ित चिकित्सक केडी भृगु ने ज्ञापन में बताया कि वह रात्रिकालीन इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात थे। उनके साथ नर्सिंगकर्मी तथा अन्य स्टाफ भी ड्यूटी पर था। तड़के करीब 3.30 बजे कोतवाली में तैनात कांस्टेबल गजराज तथा रूपेन्द्र दुर्घटना में घायल दो मरीजों को लेकर आए। जिनका नाम पृथ्वीराज पुत्र रामजीलाल तथा वीरेन्द्र पुत्र रामबाबू था।

कांस्टेबल ने आते ही स्टाफ से तू-तड़ाक तथा गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। इसी बीच उन्होंने तथा स्टाफ ने मरीजों को तुरंत जीप से उतरवाकर इलाज चालू करवा दिया। फिर भी दोनों पुलिसकर्मी उनसे तथा स्टाफ से अभद्रता करते रहे।

फिर उन्हें समझा कर भेज रहे थे, फिर भी वे गाली-गलौज करते रहे और कार्य नहीं करने दे रहे थे। वहीं धमकी भी दे रहे थे कि उनकी इच्छा हो जो कर लेना। इससे चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ में रोष व्याप्त है। 

मदद की बजाय दे रहे थे आदेश:-

पीएमओ को ज्ञापन देने गए चिकित्सकों का आरोप था कि पुलिसकर्मी मरीजों को बेड तक लाने में मदद करने के बजाय चिकित्सक को ही घायल को ले जाने के लिए आदेशित कर रहे थे। जबकि चिकित्सक का कार्य उपचार करना है ना कि घायलों को बैड तक शिफ्ट करना।

उनका आरोप था कि मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों की भले ही चिकित्सक भले ही दो बात सुन लेते हैं, क्योंकि उनकी सहानुभूति होती है। लेकिन पुलिसकर्मी तो मदद करने के बजाय उल्टे चिकित्सक पर ही आदेश फरमा रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक कार्रवाई नहीं होगी, वे कार्य पर नहीं लौटेंगे। 

पीएमओ ने संभाले मरीज:-

ज्ञापन देने के बाद चिकित्सक आउटडोर में जाने के बजाय कलक्टर आवास पर चले गए। इसे देखते हुए स्वयं पीएमओ आउटडोर में पहुंचे और मरीजों को देखना शुरू कर दिया। अकेले चिकित्सक होने के कारण सभी मरीज उनकी टेबल पर ही आग गए। इससे मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। बाद में वार्ड ब्वॉय ने कतार में लगाने का प्रयास किया, लेकिन मरीज पहले दिखाने के चक्कर में खड़े रहे।

इनका कहना है:-

दो पुलिसकर्मी घायलों को लेकर आए थे। इस दौरान उन्होंने इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक केडी भृगु से अभद्रता की। इसे लेकर चिकित्सकों में रोष है। उनसे समझाइश की गई है। वे कलक्टर से मिलने के बाद कार्य पर लौट आए हैं। साथ ही एसपी को मामले से अवगत कराया है, उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।