Global Pollution

चित्रकूट मंडल में प्रदूषण बना मौत का मंजर

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हाई कोर्ट के आदेशों की जा रही अनदेखी… 

सम्बन्धित अफसर हो रहे मालामाल…

अब्दुल समीर खान की रिपोर्ट-

बांदा। चित्रकूट मंडल में प्रदूषण मौत का मंजर बन गया है। शासन स्तर पर इसमें खामोशी है। कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? क्योकि प्रदूषण फैलाने वाले खुद तो मालामाल होते ही है, शासन और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों को भी माला माल करते रहते हैं ?

चित्रकूट मंडल के प्रदूषण मामले में प्रयागराज उच्च न्यायालय ने व्यवसायिक भवनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को होटल, मैरिज हाउस और नर्सिंग होम, क्रेशर आदि का सर्वे कराने का आदेश दिया था। प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम का हवाला देकर आदेशित किया था कि बोर्ड यह पता लगाए कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं?

इसे संदर्भ मे प्रयाग हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर थी। इसमें कहा गया था कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग लापरवाह हैं। कामर्शियल भवनों खासकर होटल, नर्सिंग होम और मैरिज हालों और क्रेशरों के पास पर्यावरण की एनओसी नहीं है। यह भी कहा कि जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने पर विभाग और सरकार सूचनाएं नहीं देतीं। याचिका पर अधिवक्ता राकेश पाठक और राकेशचंद्र त्रिपाठी ने वकालत की थी।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव ने याचिका पर अपने आदेश में कहा था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस संबंध में सर्वे कराए कि प्रदूषण नियंत्रण एक्ट 1986 और उसके नियमों का पालन हो रहा है या नहीं? न्यायाधीशों ने याचिका का निस्तारण करते हुए यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता इस मामले पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) जा सकता है।

आपको बता दें, कि बुनदेलखंड में जहां वैध और अवैध खनन और क्रेशर आदि से अंधाधुंध प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं यहां स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है। इस कार्यालय की अधिकांश कुर्सियां वीरान हैं। क्षेत्रीय निदेशक को प्रदूषण के बारे में कुछ पता नहीं है।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि चित्रकूटधाम मंडल में अधिकांश भवनों के पास प्रदूषण नियंत्रण की एनओसी नहीं है। यह घरेलू टैक्स देते हैं। ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है। क्रेशरों की धूल से जबरदस्त और जानलेवा प्रदूषण फैल रहा है। कई मौतें हो चुकी हैं, लेकिन मंडल का बांदा स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह बेपरवाह है।

वेतन के रूप में शासन का पैसा बेवजह खर्च हो रहा है। क्षेत्रीय निदेशक चुप्पी साधे हैं। प्रदूषण से मौतों का मंजर जारी हैं। टीवी और सिल्कोसिस जैसी जानलेवा बीमारी फैलने के साथ ही खेती की भूमि भी बंजर हो रही है।