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अंधेरगर्दी: प्राईवेट हॉस्पिटल नें पहले गारण्टेड ईलाज के नाम पर वसूल लिए 5 लाख फिर कहा– ट्रामा सेंटर जाओ

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प्राईवेट हास्पिटल्स की मनमानी बदस्तूर जारी, शासन के पास नही है कोई ईलाज, लगातार लुट रहे हैं गरीब पेशेंट्स के रिश्तेदार…

Tabish Ahmed

ताबिश अहमद

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: प्राईवेट हास्पिटल्स की मनमानी जारी है, पेशेंट सीरियस हो तो भी गारण्टेड ईलाज की बात कह एडमिट कर लिया जाता है, विभिन्न टेस्ट, दवाईयों और तरह-तरह की फ़ीस के नाम पर 4-5 लाख वसूल लिया जाता है फिर बीएचयू, पीजीआई, एम्स के लिए रेफर करके नोट गिनने बैठ जाते है। उसी तरह मरीज यदि सीरियस न हो तो भी एडमिट करके बड़े-बड़े मेडिकल टर्म्स का प्रयोग करके भारी धन उगाही करते है। जरूरी न होने के बावजूद मंहगे टेस्ट और विभिन्न चार्जेस के रूप में छोटी सी बिमारी के ईलाज के लिए लाखो रूपया ऐठ लेते है। इस तरह की बार-बार शिकायत आने के बावजूद शासन कोई भी ऐसा कदम नही उठाता कि ईलाज के नाम पर लूट मचाने वाले इन मंहगें निजी हास्पिटल्स की नकेल कसी जा सके।

इसी तरह का एक मामले में आज चितईपुर स्थित मां राजवती अस्पताल में मरीज के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। आरोप है कि परिजनों के साथ अस्पताल कर्मचारियों ने मारपीट भी किया। मौके पर पहुँचे भेलूपुर सीओ अयोध्या प्रसाद सिंह एवं बीएचयू चौकी इंचार्ज महेश मिश्रा एवं अन्य थाने की पुलिस ने मामले को शांत कराया।

बीएचयू

Relatives of patients Protest as before taking the money hospital had guaranteed for successful treatment of patient, but later hospital referred the patient to BHU… Bhelupur Police intervenes and lodged the FIR against 4 employment of Private Hospital…

सोनभद्र निवासी चंदन कुमार भारती कुछ दिन पूर्व रोड एक्सीडेंट में गम्भीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन सिंगरौली के नेहरू अस्पताल ले गए जहां कुछ दिन इलाज चलने के बाद जब मरीज की स्थिति सही न होने पर वहां के डॉक्टरों ने घायल को बनारस के लिए रेफर कर दिया। चितईपुर स्थित राजवती अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया। परिजन घायल चंदन को बीते 23 मार्च को लेकर यहां पहुंचे थे। परिजनों की मानें तो भर्ती करने के बाद डॉक्टर ने उनसे बोला खर्च ज्यादा लगेगा।

परिजन इलाज कराने के लिए तैयार हो गए। 4 दिन तक इलाज चला, लाखों रुपये लगने के बाद मंगलवार की शाम अस्पताल के डॉक्टरों ने घायल को ट्रामा सेंटर ले जाने को कहा। जिसके बाद परिजन गुस्से से आग बबूला हो गए। घर वाले उसी अस्पताल में इलाज कराने को लेकर डट गए। परिजनों की लिखित लेने की बात को लेकर अस्पताल प्रबंधन से नोक-झोंक होने लगी।

आरोप है कि गुस्से से तिलमिलाए हॉस्पिटल कर्मचारियों ने घायल के परिवार वालों से धक्का-मुक्की की। हल्ला सुनते ही लोगों की भीड़ चिकित्सालय के बाहर जुट गई। परिजनों से मामला जानने के बाद लोग उनके साथ अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध करने लगे। परिजनों के साथ मिलकर लोगों ने चितईपुर बाईपास रोड पर चक्का जाम कर दिया। बीच रास्ते पर बैठ कर लोग नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने लोगों को काफी समझाने का प्रयास किया पर परिजन कार्यवाही की मांग को लेकर अड़े रहे। काफी समझाने और अस्पताल प्रबन्धन पर कार्यवाही करने के आश्वासन के बाद लोगों ने जाम समाप्त किया।

चंदन के चाचा राजेन्द्र भारती ने बताया कि 23 मार्च को हमने मरीज को यहां इलाज हेतु एडमिट कराया था। तब से अब तक जांच, दवाइयां और भर्ती के नाम पर 4 से 5 लाख रुपये खर्च हो गए। जब मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर चंदन को ट्रामा सेंटर ले जाने की बात कहने लगे। जिसपर परिजनों ने लिखित मांगा तो प्रबन्धन ने देने से इनकार कर दिया और उनसे मारपीट करने लगे।

इस मामले में पुलिस ने बताया कि चक्का-जाम खत्म करा दिया गया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मरीज के परिवार वालों से मारपीट करने के आरोप में अस्पताल से चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। केस दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है। सूचना पर एसडीएम सदर ने भी मौके पर पहुँचकर मामले की जानकारी ली।