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यूपी की गज़ब सरकार– फायदे का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण

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बिजली का निजीकरण प्राइवेट कम्पनी को फायदा पहुंचाना है: रमज़ान अली

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: कांग्रेस के टिकट पर लगातार दो बार पार्षद का चुनाव जीतने वाले वार्ड नंबर 80 काजी सादुल्लापुरा वाराणसी के युवा और जुझारू पार्षद रमज़ान अली नें अाज कहा कि भाजपा बिजली निजीकरण मे अपनी नीति से हटती हुयी नजर आ रही है। जिस तरीके से मोदी जी का कहना था कि पूरे देश मे एक ही प्रणाली लागू होनी चाहिए। लोगो को एक ही तरीके का फायदा या नुकसान मिलना चाहिए। उस पर मोदी जी चले भी एक राष्ट्र-एक टैक्स के तहत GST लागू भी किया, अब चाहे GST का लोगो को नुकसान ही हुआ हो।

अागे उन्होने कहाकि मोदी जी के सिपहसालार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस नीति से हटते हुए नजर आ रहे हैं। योगी जी का सिद्धांत अलग है। वह फायदे का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण कर रहे है, जो उल्टी गंगा बहानें जैसा है।

Ramzan Ali

रमज़ान अली कांग्रेस पार्षद वार्ड नंबर 80, काज़ी सादुल्लापुरा, वाराणासी

इसी नीति के तहत योगी जी ने उत्तर प्रदेश के पांच जिलो के बिजली का निजीकरण कर दिया है। यह योगी सरकार का औचित्यविहीन फैसला है। क्योंकि वर्तमान परिवेश मे इन पांचो जिलों की बिजली मे व्यापक सुधार हो चुका है। निजीकरण तब किया जाता है जब विभागो की स्थिति दयनीय हो, विभाग नुकसान मे हो और जनता परेशान हो। आज के परिवेश मे बिजली लोगो के लिए हवा, पानी, राशन, कपड़े की भांति ‌आवश्यक वस्तु हो चुकी है। जिसे सस्ते दरो मे मुहय्या कराना सरकार का दायित्व हो चुका है।

रमज़ान अली नें पूछा कि जब हर चीज का निजीकरण ही जब करना है तो चुनी हुयी सरकार की क्या आवश्यकता? चुनाव की क्या आवश्यकता? आज बिजली लोगो की जरुरत हो चुकी है। इसे उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होने कहा कि सरकार को अन्य शहरो मे बिजली के निजीकरण की समीक्षा करनी चाहिए। सरकार ने आगरा मे बिजली का निजीकरण किया था। वहां अब तक 500 करोड़ का घाटा हुआ है। वही दूसरी तरफ कानपुर मे निजीकरण नही हो सका तो विभाग फायदे मे चल रहा है। सरकार के निजीकरण से जनता को कोई लाभ नही होने वाला है।

सरकार बुनकरो के बिजली बिल की सब्सिडी को पर्सनल एकाउंट मे ट्रांसफर करने की भी योजना बना रही है। सरकार को गैस सब्सिडी की भी समीक्षा करनी चाहिए कि यह योजना कितनी सफल है। गैस सब्सिडी मे कम पैसे का ट्रांसफर होता है इससे लोगो को कोई तकलीफ नही होती। पैसा आये या न आये फर्क नही पड़ता। लेकिन बिजली सब्सिडी के लिए पैसा गरीब बुनकर जमा ही नही कर पायेगा तो सब्सिडी आने या न आने का कोई मतलब नही।

अंत में युवा पार्षद नें कहा कि सरकार की यह सब योजनाएं उन देशो के लिए है जहां लोगो को रोजगार, नौकरी और पैसे की कमी नही है। यहां के लोग रोज कुआं खोदते है और पानी पीते है। यह सब यहां वाराणसी में चलने वाला नही है।

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