Public Health Engineering Department

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लापरवाही आयी सामने

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करोड़ों खर्च करके भी चालू नहीं कर सका ठप्प पड़े नल जल योजना…

Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। जिले में गर्मी सीजन का आगाज होते ही पेयजल की समस्या शुरू हो गई है। लगातार गिरते जल स्तर के कारण यहां के कुएं और हैंडपंप सूखने लगे हैं। वहीं ग्रामीणों को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है।

हालांकि मजबूत, जनप्रतिनिधियों की पहल पर जिले के ग्रामीण अंचलों में प्रशासन की ओर से पर्याप्त मात्रा में नल जल योजनाएं स्थापित कराई हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में ज्यादातर नलजल योजनाएं वर्षों से खराब पड़ी हुई हैं। इन खराब नल जल योजनाओं को दुरुस्त कराने के नाम पर प्रति वर्ष विभाग द्वारा लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। बावजूद इसके नलजल योजनाओं का सुचारू रूप से संचालन नहीं हो पा रहा।

गांव में पानी का संकट गहराया:-

ग्रामीणों की मानें तो अंचल में संचालित नलजल योजनाएं पीएचई विभाग के लिए एक तरह से कमाई का जरिया बनी हुई हैं। नज जल योजनाओं से लोगों को पानी तो नहीं मिल पा रहा है, लेकिन पीएचई विभाग को प्रति वर्ष इनके मरम्मतीकरण के नाम पर प्रति वर्ष कमीशन बतौर मोटी रकम जरूर मिल जाती है, ऐसी स्थिति में आरोप है कि पीएचई विभाग के अधिकारी स्वयं नहीं चाहते हैं कि उक्त नल जल योजनाएं सुचारू रूप से चलें।

जिले में पूर्व से स्थापित करीब 263 नल जल योजनाओं का सही तरीके से संचारण व संधारण नहीं हो पा रहा। इसके बावजूद इस वर्ष जिले में 25 करोड़ से ऊपर की करीब 18 नवीन नलजल योजनाएं स्वीकृत कर दी गई हैं। अभी इनका निर्माण चल रहा है, लेकिन लोगों का कहना है कि तैयार होने के बाद इन योजनाओं से गांव में पानी की समस्या हल हो जाएगी, इस बात की गारंटी नहीं है।

करोड़ों खर्च के बाद भी 68 नलजल योजनाएं बंद:-

पीएचई विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान समय में जिले की 263 में से 68 नल जल योजनाएं बंद पड़ी है। इसका प्रमुख कारण कहीं मोटर की खराबी तो कही विद्युत बिल का बकाया भुगतान ही बताया गया। इसके लिए पीएचई विभाग के अधिकारी ग्राम पंचायतों को गैर जिम्मेदार बता रहे हैं तो पंचायत के प्रतिनिधि पीएचई पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।

गत वर्ष गर्मी सीजन से पहले ही बंद पड़ी नल जल योजनाओं को चिह्नित कर मरम्मतीकरण के लिए टेंडर किया गया गया था। लेकिन, इसमें जमकर खेल हुआ। कई योजनाएं तो कागजों में दुरुस्त कर राशि आहरित कर ली गई। मरम्मतीकरण के नाम पर शासन के करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अफसर खर्च राशि का ब्यौरा देने को तैयार नहीं हैं।

नल जल योजनाओं की जिम्मेदारी पंचायतों की:-

सीधी कार्यपालन यंत्री बीएस बारस्कर ने बताया कि ग्रामीण नल जल योजनाओं के संचारण संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। लेकिन, पंचायतों के द्वारा न तो विद्युत विल जमा किया जाता और न ही मोटर आदि खराब होने पर उनका मेंटीनेंस कराया जाता। ज्यादा खराबी होने पर हम मेंटीनेंस कराकर पंचायतों को हैंडओवर कर देते हैं।

अब चलाने की जिम्मेदारी उनकी है। जिले में मुख्यमंत्री नलजल योजना के तहत 18 नवीन नल जल योजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इनका निर्माण कार्य चल रहा है। बनने के बाद एक वर्ष तक ये योजनाएं संबंधित संविदाकार की देख रेख में संचालित होंगी। इसके बाद इन्हें भी संचालन के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिया जाएगा।