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supreme court of india

जस्टिस खन्ना और जस्टिस माहेश्वरी की नियुक्ति पर उठे सवाल

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सड़क पर उतरने की दी चेतावनी…

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janmanchnews.com

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त कर दिया है गया है। वहीं बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस फैसले को लेकर काफी नाराज नजर आ रहे हैं।

साथ ही बार काउंसिल ने फैसले को लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी भी दे डाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि संजीव खन्ना और दिनेश माहेश्वरी की नियुक्ति के लिए 32 वरिष्ठ जजों की अनदेखी की गई है।

कॉलेजियम ने 10 जनवरी को कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की थी। 10 जनवरी से पहले गत 12 दिसंबर को भी कॉलेजियम बैठी हुई थी। उसने कुछ निर्णय भी लिए गये थे, लेकिन उस पर ज्यादा विचार-विमर्श नहीं हो पाया था, क्योंकि शीतकालीन अवकाश हो गया था।

जिस प्रकार से जस्टिस जोसेफ को 11 जजों की वरिष्ठता को दरकिनार करके सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था, ठीक उसी प्रकार से राष्ट्रपति ने जजों की नियुक्ति पर मुहर लगाई है।

पूर्व जजों ने उठाए सवाल:-

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के 2 पूर्व चीफ जस्टिस ने आलोचना करते हुए फैसले पर ऐतराज जताया है। जस्टिस संजीव खन्ना के प्रमोशन पर ऐतराज जताते हुए कहा गया है कि उन्हें कई जजों की वरीयता को दरकिनार करते हुए प्रमोशन दिया गया है।

वहीं दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व जज ने राष्ट्रपति को खत लिखकर इसे न्यायपालिका के लिए काला दिन बताया है। कॉलेजियम के इस फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के जज संजय कौल ने सीजेआई रंजन गोगोई को खत लिखा है।

दरअसल, 19 नवंबर को कॉलेजियम ने राजस्थान और दिल्ली हाईकोर्ट के सीजे प्रदीप नंद्राजोग और राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश का फैसला लिया था। लेकिन बाद में इन दोनों की जगह कॉलेजियम ने दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना के नाम की सिफारिश की।

खन्ना दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस हैं, जबकि माहेश्वरी कर्नाटक हाईकोर्ट के सीजे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जज संजय कौल ने राजस्थान हाईकोर्ट के सीजे नंद्राजोग को नजर अंदाज किए जाने के खिलाफ सीजेआई को लिखे खत में आपत्ति जताई है। खत में कौल ने कहा है कि जिन नामों पर विचार किया गया है, उनमें सीजे नंद्राजोग सबसे वरिष्ठ जज हैं।

उन्हें नजरअंदाज करने से एक गलत संकेत मिलता है। सूत्रों के मुताबिक कौल का कहना है, “वह (नंद्राजोग) सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं।” 

पिछले साल हुए प्रेम कॉन्फ्रेंस के बाद भी कुछ नहीं बदला : पूर्व सीजेआई लोढ़ा

वहीं पूर्व सीजेआई लोढ़ा ने कहा कि पिछले साल इस एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉलेजियम के कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन उसमें कोई सुधार नहीं हुआ, मुद्दे और बिगड़ गए। लोढ़ा ने कहा उस दौरान संवाददाता सम्मेलन में वर्तमान सीजेआई रंजन गोगोई भी मौजूद थे।

लोढ़ा 27 अप्रैल 2014 से 27 सितंबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। लोढ़ा ने कहा कि विवादास्पद संवाददाता सम्मेलन में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ कई मुद्दे उठाए गए थे। इसमें उच्च अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का भी मसला था। लोढ़ा ने कहा कि आज वह मसले बरकरार हैं कोई उद्देश्य पूरा नहीं हुआ जिसके लिए 4 जज प्रेस के सामने गए थे।

कॉलेजियम प्रणाली क्‍या है:-

जिस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्तियां की जाती है, उसे “कॉलेजियम सिस्टम” या कॉलेजियम व्‍यवस्‍था कहा जाता है।

-1990 में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों के बाद यह व्‍यवस्‍था बनाई गई थी। कॉलेजियम व्‍यवस्‍था के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के नेतृत्‍व में बनी सीनियर जजों की समिति जजों के नाम तथा नियुक्ति का फैसला करती है।

– सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति तथा तबादलों का फैसला भी कॉलेजियम ही करता है।

-हाईकोर्ट के कौन से जज पदोन्‍नत होकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे यह फैसला भी कॉलेजियम ही करता है।

-कॉलेजियम व्‍यवस्‍था का उल्‍लेखन न तो मूल संविधान में है और न ही उसके किसी संशोधन में।