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सरकार के दावों के बावजूद भी जर्जर स्थिति है प्राथमिक विद्यालयों की

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Rahul Yadav

राहुल यादव

रायबरेली। जहां एक ओर सरकार प्राथमिक विद्यालयों की दशा व दिशा सुधारने के उद्देश्य से ऑपरेशन कायाकल्प चलाकर जर्जर और पुराने हो चले विद्यालयों की इमारतों का जीर्णोद्धार कर विद्यालयों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत दिख रही है। तो वहीं दूसरी ओर हल्की बारिश में तालाब का रूप धारण कर चुके प्राथमिक विद्यालयों की ऐसी तस्वीरों को देखकर निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के नाम पर हो रहे सरकारी धन के बंदरबांट और ग्राम सभा द्वारा गांव की स्वच्छता के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है।

मामला महराजगंज तहसील मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विकासखंड अमावां के पूरे गढ़ी मजरे पहरेमऊ गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय का है। जहां इस बार हुई हल्की सी बरसात में विद्यालय के प्रांगण में घुटनों तक हुआ जलभराव यह बताने के लिए पर्याप्त है, कि यहां विद्यालय निर्माण प्रभारी द्वारा विद्यालय निर्माण के नाम पर खर्च की गई सरकारी धनराशि का किस कदर बंदरबांट किया है।

यहां विद्यालय परिसर में भरा घुटनों तक पानी जहां विद्यालय के बच्चों को शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार से वंचित कर रहा है तो वहीं जलभराव के बीच टापू का रूप धारण कर चुके प्राथमिक विद्यालय की इमारत भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। इस समस्या के बारे में जब प्राथमिक विद्यालय गढ़ी के प्रधानाचार्य अखिलेश सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि इस विद्यालय मे जलभराव की यह समस्या कोई नई नहीं है बल्कि यह समस्या विद्यालय निर्माण से ही विद्यमान है।

बता दे, इसके संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को सूचित भी किया गया। लेकिन इस जलभराव की समस्या का निदान आज तक संभव नहीं हो सका। वही निर्माण प्रभारी की गलतियों का खामियाजा आखिरकार छोटे-छोटे मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अशोक कुमार प्रस्तावित बजट ना होने का हवाला देकर मामले से पीछा छुड़ाते दिख रहे है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस गांव के बच्चों को शिक्षा जैसे मौलिक अधिकारों से वंचित करने के लिये शिक्षा अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता कहां तक जायज है।