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अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सरकार नहीं है गंभीर

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ओमप्रकाश वर्मा,

धौलपुर। राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए गंभीर नहीं है। सही मायने में सरकार अप्रत्यक्ष रूप से खनन माफियाओं को पोषित कर वोट बैंक को सुरक्षित कर रही है।

यह आरोप आरटीआई कार्यकर्ता बनिया, फैसल खान, रामप्रकाश वर्मा, लल्ला घुरैया, जोगेंद्र सागर सहित कई अन्य कार्यकर्ताओं ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध खनन को रोकने के लिए खान एवं भू-विज्ञान विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं।

वर्षों से खनि अभिय॔ता, सहायक खनि अभियंता, ड्राफ्ट मैन, सुपरवाइजर, नाकेदार, चौकीदार सहित कई अन्य संवर्गों के पद खाली पड़े हैं। वहीं खनन माफिया हर तरह से सम्पन्न हैं। बिना पुलिस इमदाद के उनके खिलाफ कार्यवाही करना संभव नहीं है।


कार्यकर्ताओं ने बताया मैन पाॅवर, साधन व पुलिस इमदाद की कमी धौलपुर के खनि अभियंता तेजपाल ने भी स्वीकारी है। उन्होंनें कार्यकर्ता दीपू वर्मा को बताया कि धौलपुर के खान विभाग में कर्मचारियों व अधिकारियों के अधिकांश पद खाली पड़े हैं। पदों को भरने के लिए कई बार राज्य सरकार व संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है।

उसके बावजूद रिक्त पदों को नहीं भरा है। कार्मिकों के अभाव में खनन माफिया न केवल खान विभाग को करोड़ों रुपए के राजस्व की चपत लगा रहे हैं, बल्कि वे असामाजिक तत्वों को प्रलोभन देकर सभ्य और सभ्रांत समाज में भय का माहौल उत्पन्न कर रहे हैं। यह स्थिति देश और समाज के लिए घातक है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने बताया कि खनन माफियाओं के खिलाफ संयुक्त कार्यवाही करने के लिए संबंधित विभागों में आपसी सामंजस्य का अभाव है।

डेढ़ साल पूर्व राज्य सरकार ने राज्य के सभी जिला कलक्टरों को खान, परिवहन, वन, राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त कमेटियां गठित कर माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाने और अवैध खनन को पूर्णतया बंद कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्देश कागजी कार्यवाही साबित हुए। संयुक्त कार्यवाही का आंकड़ा हैरान करने वाला है।

रामप्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत खान एवं भू विज्ञान विभाग से अवैध खनन से संबंधित सभी आवश्यक सूचनाएं प्राप्त कर ली हैं। वे सूचना अवैध खनन के प्रति सरकार की मंशा को अच्छी तरह उजागर करती है। वहीं दूसरे शब्दों में सरकार खनन माफियाओं को अप्रत्यक्ष रूप से पोषित करती है।