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Police killed her baby

एएसआई नें ली अपनी नवजात बच्ची की जान, डाक्टर की शिकायत के बावजूद पुलिस चुप

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Shabab Khan

शबाब ख़ान

धौलपुर (राजस्थान): बेटी बचाओ-देश बचाओ का नारा बुलंद करने वाले पीएम मोदी के देश में, और उनकी ही पार्टी से मुख्यमंत्री, वो भी महिला मुख्यमंत्री के राज्य राजस्थान में एक और मासूम को मात्र कुछ घण्टों की जिन्दगी जीने के बाद सुला दिया गया हमेशा के लिए।

नवजात को मारने वाला भी कोई बाहर से आया हुआ खूनी-दरिंदा नहीं, बल्कि उसका खुद का बाप था। ख़ता बस इतनी थी उस नवजात की कि वो बेटी बनकर पैदा हुई थी।

मामला धौलपुर के जिला अस्पताल का है। जहॉं कल सुबह जनाना अस्पताल में 5 बजे रजनी नाम की महिला नें एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची हर तरह से स्वस्थ्य थी एवं मॉं का दूध पी रही थी।

जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर अमरेश सेंगर उस समय दंग रह गए जब तकरीबन दो बजे के आसपास रजनी के पति और नवजात बच्ची का बाप मनीष बच्ची को मृत हालत में इमरजेंसी में लेकर आया और डाक्टर से बच्ची का चेपअप करने के लिए कहने लगा। डॉ० सेंगर नें देखते ही बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

सुबह पॉंच बजे बच्ची स्वस्थ्य थी, दोपहर तक स्वस्थ्य रही, फिर किसी परेशानी के लक्षण के बिना ही बच्ची मर गई। यह संभव नहीं है, यदि बच्ची को कोई तकलीफ होती तो बच्ची रोती-चिल्लाती, तकलीफ के लक्षण शो करती। उस हालात में यदि बच्ची के परिजन डाक्टर से संपर्क करते कि बच्ची किसी तकलीफ में है, चेक कर लें, तो उस परिस्थिति में किसी भी कॉप्लीकेशन के लिए अस्पताल में सारी सुविधांए है।

बच्ची यदि परेशानी में होती तो उसे बचाया जा सकता था। लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ, बिना किसी लक्षण के बच्ची की मौत हो गई, तब मरी हुई बेटी को लेकर पिता इमरजेंसी वार्ड आते है और डाक्टर से उसे देखने को कहते हैं।

डॉक्टर सेंगर नें मृत बच्ची की जॉंच मे पाया कि उसके शरीर का ऊपरी भाग, यानि सर से कमर तक का हिस्सा नीला हो गया था यानि बच्ची की मौत प्राकृतिक कतई नही थी। डॉ० सेंगर बताते है कि बच्ची का शरीर नीला केवल उसी स्थिति में हो सकता है जब बच्ची के चेहरे और सीने को किसी तकिया, गद्दे वगैराह से ढॉप कर जोर से कुछ देर के लिए दबा दिया जाए, जिससे बच्ची का दम घुट जाए, और सांस न ले पानें के कारण मौत हो जाए। बच्ची के नीले पड़े शरीर को देखकर डाक्टर फौरन समझ गये कि बच्ची को मारकर लाया गया है।

काम के प्रति अपनी इमानदारी का परिचय देते हुए डॉ० सेंगर नें फौरन कोतवाली पुलिस को फोन किया और घटना से अवगत कराया। इस बीच मनीष मृत बच्ची के शरीर को लेकर इमरजेंसी वार्ड से चला गया। जबकि उसकी पत्नी तब भी जनाना वार्ड में पड़ी थी। कोतवाली पुलिस नें यह कह कर अस्पताल आने से मना कर दिया कि बच्ची अब इमरजेंसी वार्ड में नही है।

यदि पुलिस आ जाती तो मृत बच्ची को अस्पताल से लेकर निकले परिजनों को पकड़ा जा सकता था, और बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराकर मौत का स्पष्ट कारण का पता लगाया जा सकता था। पूछताछ की जाती तो बच्ची की मॉं रजनी भी काफ़ी कुछ बता सकती थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

डॉक्टर सेंगर नें फिर भी हार नहीं मानी और उन्होंनें बच्ची की संदिग्ध अवस्था में मौत होने से संबधित तहरीर बनाकर अस्पताल के चपरासी से दस कदम की दूरी पर स्थित कोतवाली भेजा। जहॉं कोतवाली पुलिस नें तहरीर लेने से ही साफ मनाकर दिया।

Dholpur

Janmanchnews.com

जरा सोचिए, एक सरकारी डाक्टर पुलिस को तहरीर भेजता कि जगदम्बा कॉलोनी, धौलपुर निवासी मनीष की बच्ची की मौत प्राकृतिक नही हत्या प्रतीत होती है। अत: पुलिस आगे की कार्यवाई करें, लेकिन पुलिस उस तहरीर को लेने से इंकार कर दिया, क्यों? आखिर पुलिस डॉक्टर की हर सूचना को नजरअंदाज क्यों कर रही थी? अस्पताल के चपरासी ने तहरीर पर रिमार्क डाला कि ‘पुलिस नें तहरीर लेने से इंकार कर दिया।’

कोतवाली पुलिस के लचर रवैये से तंग आकर डॉ० सेंगर से धौलपुर के पुलिस कप्तान को फोन किया। जानकारी दें दुँ कि पुलिस अधिक्षक का सीयूजी नंबर बंद था। लेकिन फिर भी उन्होंनें एसएसपी को तहरीर की कॉपी व्हाटसऐप के माध्यम से भेज दी। फिर उन्होंनें सीओ को फोन करके सारी जानकारी दी। सीओ के निर्देश पर कोतवाली एसओ दलबल के साथ अस्पताल पहुँचते हैं।

वहॉं डॉ० सेंगर अभी बता ही रहें थे कि मनीष नाम के व्यक्ति नें कैसे अपनी ही बच्ची को मारा और कैसे नौटंकी करनें मृत बच्ची को इमरजेंसी में लेकर आया। तभी एक सिपाही नें कोतवाल को बताया कि ‘सर, वो अपने एएसआई मनीष सॉब की बेटी की यहॉं मृत्यु हो गई थी, जिसकी बॉडी को मनीष सॉब नें चंबल नदी में बहा दिया है।’ इसका मतलब न कोई बॉडी, न कोई पोस्टमार्टम, न कोई केस।

लेकिन एक बात समझ में नहीं आयी कि बच्ची के शरीर को इमरजेंसी वार्ड से लेकर निकलने और कोतवाली पुलिस के अस्पताल आने के बीच में एक घण्टा मात्र था। मनीष नें कैसे इतनी जल्दी चंबल में बेटी को बहा दिया कोई गणित मुझे नही समझा पाई।

मामला शीशे की तरह साफ है बच्ची का बाप भी पुलिसकर्मी है और धौलपुर में ही तैनात है, कोतवाली पुलिस नें डाक्टर द्वारा मौके पर बुलाये जाने पर न अाकर, तहरीर न लेकर, और चंबल नदी में बेटी को बहा चुकने की सूचना डॉक्टर सेंगर के कान में डालकर यह समझा दिया कि कोतवाली पुलिस एएसआई मनीष की पूरी मदद कर रहा है।

इस मदद की कोई कीमत थी या नहीं यह तो बाद में पता चल ही जाएगा। लेकिन उससे पहले दोषी बाप को सज़ा दिलाकर मासूम को इंसाफ दिलाना हमारा मिशन है। बताना जरूरी है कि इस न्यूज स्टोरी पर काम कर रहे पत्रकार नें जब कोतवाली एसएचओ ब्रजेश मीणा से प्रकरण के संबंध में बात करने के लिए फोन किया तो मीणा जी ने कॉल रिसीव नहीं किया।

डॉक्टर अमरेश सेंगर के इस पूरे प्रकरण में योगदान को देखते हुए हम उनसे जरूर कहना चाहेगें कि जब तक आप जैसे लोग है इंसानियत जिंदा रहेगी, हम आपको सलाम करते है। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि दोषी सलाखों के पीछे जरूर जाएगें।

धौलपुर सूत्र:- ओमप्रकाश वर्मा

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