Solar eclipse

गुरुवार को सूर्य ग्रहण और धनु राशि में 6 ग्रहों का दुर्लभ योग, अब 559 साल बाद बनेगा ऐसा संयोग

238

New Delhi: गुरुवार, 26 दिसंबर 2019 की सुबह सूर्य ग्रहण होगा। ये ग्रहण भारत में अधिकतम स्थानों पर खंडग्रास सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। दक्षिण भारत की कुछ जगहों पर कंकणाकृति सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार भारत के अलवा ये ग्रहण एशिया के कुछ देश, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। भारत में ग्रहण काल 2.52 घंटे का रहेगा। सुबह 8.04 बजे से ग्रहण शुरू होगा, 9.30 बजे मध्य काल और सुबह 10.56 बजे ग्रहण खत्म होगा। जब सूर्य ग्रहण होगा, तब धनु राशि में एक साथ 6 ग्रह स्थित रहेंगे। इस दिन पौष मास की अमावस्या तिथि रहेगी। ग्रहण के बाद पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। ये ग्रहण मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई, मैसूर, कन्याकुमारी सहित भारत के कई अन्य शहरों में भी दिखाई देगा। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 21, जून 2020 को होगा, ये भारत में दिखाई देगा। 26 दिसंबर के सूर्य ग्रहण के बाद एक राशि में 6 ग्रहों के साथ सूर्य ग्रहण का योग 559 साल बाद सन 2578 में बनेगा।

  • सवाल – सूर्य ग्रहण पर कौन-कौन से दुर्लभ योग बन रहे हैं और कितन सालों बाद ये योग बने हैं?

जवाब – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डॉ. गणेश प्रसाद मिश्रा बताते हैं कि ऐसा दुर्लभ सूर्यग्रहण 296 साल पहले 7 जनवरी 1723 को हुआ था। उसके बाद ग्रह-नक्षत्रों की वैसी ही स्थिति 26 दिसंबर को रहेगी। इस दिन मूल नक्षत्र और वृद्धि योग में सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। 296 साल बाद दुर्लभ योग बन रहे हैं। इस दिन मूल नक्षत्र में 4 ग्रह रहेंगे। वहीं, धनु राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु रहेंगे। इन 6 ग्रहों पर राहु की पूर्ण दृष्टि भी रहेगी। इनमें 2 ग्रह यानी बुध और गुरु अस्त रहेंगे। इन ग्रहों के एक राशि पहले (वृश्चिक में) मंगल और एक राशि आगे (मकर में) शुक्र स्थित है।

  • सवाल – अब भविष्य में कब बनेगा ऐसा योग?

जवाब – पं. मनीष शर्मा के अनुसार 26 दिसंबर को  धनु राशि में 6 ग्रहों की युति के साथ सूर्य ग्रहण होने जा रहा है, ये योग 296 साल बाद बना है। गुरुवार को सूर्य, बुध, गुरु, शनि, चंद्र और केतु धनु राशि में रहेंगे। राहु की दृष्टि रहेगी, मंगल वृश्चिक में और शुक्र मकर राशि में रहेगा। इस तरह का सूर्य ग्रहण 7 जनवरी 1723 को 296 साल पहले बना था। अब ऐसा योग 559 साल बाद 9/1/2578 को बनेगा। उस समय सूर्य, बुध, गुरु, शनि, चंद्र और केतु धनु राशि में रहेंगे, राहु की दृष्टि के साथ सूर्य ग्रहण होगा।

  • सवाल – सूर्य ग्रहण के समय धनु राशि में कौन-कौन से 6 ग्रह रहेंगे?

जवाब – पं. शर्मा के अनुसार इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण मूल नक्षत्र और धनु राशि में होगा। ग्रहण के समय सूर्य, बुध, गुरु, शनि, चंद्र और केतु धनु राशि में एक साथ रहेंगे। केतु के स्वामित्व वाले नक्षत्र मूल में ग्रहण होगा और नवांश या मूल कुंडली में किसी प्रकार का अनिष्ट योग नहीं होने से प्रकृति को नुकसान की संभावना नहीं है। इस बार सूर्य ग्रहण से पहले चंद्र ग्रहण नहीं हुआ है और आगे भी चंद्र ग्रहण नहीं होने से प्रकृति को बड़े नुकसान की संभावना नहीं है। ग्रहण का प्रभाव मूल नक्षत्र और धनु राशि वालों पर ज्यादा रहेगा।

  • सवाल – सूर्य ग्रहण का सूतक काल कब से शुरू होगा?

जवाब – सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पूर्व से माना जाता है। 25 दिसंबर की रात 8 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण के मोक्ष के बाद समाप्त होगा। इसके बाद घर में और मंदिरों में साफ-सफाई करने की और पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।

  • सवाल – शास्त्रों के अनुसार ग्रहण क्यों होता है?

जवाब – पं. शर्मा के अनुसार सूर्य ग्रहण की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। प्राचीन काल में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन में 14 रत्न निकले थे। समुद्र मंथन में जब अमृत कलश निकला तो इसके लिए देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। सभी इसका पान करके अमर होना चाहते थे। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और देवताओं को अमृतपान करवाया। उस समय राहु नाम के एक असुर ने भी देवताओं का वेश धारण करके अमृत पान कर लिया था। चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। विष्णुजी ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया, क्योंकि राहु ने भी अमृत पी लिया था, इस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। राहु का भेद चंद्र और सूर्य ने उजागर कर दिया था। इस वजह से राहु चंद्र और सूर्य से शत्रुता रखता है और समय-समय पर इन ग्रहों को ग्रसता है। शास्त्रों में इसी घटना को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।

  • सवाल – विज्ञान के अनुसार कब होता है सूर्य ग्रहण?

जवाब – जब पृथ्वी पर चंद्र की छाया पड़ती है, तब सूर्य ग्रहण होता है। इस दौरान सूर्य, चंद्र और पृथ्वी एक लाइन में आ जाते हैं। पृथ्वी के जिन क्षेत्रों में चंद्र की छाया पड़ती है, वहां सूर्य दिखाई नहीं देता है, इसे ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से देखने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय में सूर्य से जो किरणे निकलती हैं, वे हमारी आंखों के लिए हानिकारक होती हैं।

  • सवाल – सूर्य ग्रहण के समय कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं?

जवाब – पं. शर्मा के अनुसार ग्रहण के समय सिर्फ मंत्रों जाप करना चाहिए। इस दौरान पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए। इससे खाने पर ग्रहण की नकारात्मक किरणों का असर नहीं होता है। भोजन की पवित्रता बनी रहती है। ग्रहण पूर्ण होने के बाद किसी पवित्र में नदी में स्नान करें और दान-पुण्य करें। इस दिन अमावस्या तिथि रहेगी। इसलिए ग्रहण के बाद घर के पितर देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर इनके लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है।

  • सवाल – गुरुवार और अमावस्या के योग का कैसा फल मिलता है?

जवाब- ज्योतिष के संहिता स्कंध के अनुसार, शुभ दिनों में पड़ने वाली अमावस्या शुभ फल देने वाली होती है। 26 दिसंबर, गुरुवार को पौष माह की अमावस्या का संयोग भी 3 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 29 दिसंबर 2016 को गुरुवार और अमावस्या थी। इसके साथ ही 296 साल पहले हुए सूर्य ग्रहण पर भी गुरुवार और अमावस्या का संयोग बना था। इस संयोग के प्रभाव से ग्रहों की अशुभ स्थिति का असर कम हो जाता है। इससे अच्छी आर्थिक और राजनीतिक स्थितियां बनती हैं।

  • सवाल – सूर्य ग्रहण का सभी 12 राशियों पर कैसा असर होगा?

उत्तर – पं. शर्मा के अनुसार, इस सूर्य ग्रहण का सभी 12 राशियों पर असर होने वाला है। मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर राशि के लोगों के लिए ये सूर्य ग्रहण अशुभ फल देने वाला रहेगा। कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि के लिए ग्रहण शुभ रहने वाला है। इन लोगों को लाभ मिल सकता है। जानिए इन राशियों का राशिफल…

मेष- इस राशि के लिए नवम राशि में ग्रहण होगा। भाग्य की कमी हो सकती है। सहायता देने वाले तैयार होंगे, लेकिन समय के तालमेल से गड़बड़ी हो सकती है।

वृषभ- आपके लिए अष्टम राशि में ग्रहण होगा। अत्यंत सावधान रहना होगा। वाहनादि में सावधानी रखें एवं विवादों से दूर रहने का प्रयास करें।

मिथुन- मिथुन राशि से सप्तम राशि में ग्रहण होगा। प्रेम में समस्याएं आ सकती है। वैवाहिक जीवन में भी तनाव हो सकता है।

कर्क- आपके लिए षष्ठम राशि में ग्रहण होगा। स्वयं को संभालने का समय है। मेहनत का फल मिलेगा। शत्रुओं को पराजित करने में सफल हो सकते हैं।

सिंह- पंचम राशि में ग्रहण होने से संतान के संबंध में चिंता बढ़ेगी। नौकरी में तनाव हो सकता है। कार्यस्थल पर विवाद भी हो सकता है।

कन्या- चतुर्थ राशि में ग्रहण हो रहा है। सुख में कमी करेगा। अशुभ समाचार मिल सकते हैं। तनाव को बढ़ाने वाली होंगी।

तुला- तृतीय राशि में ग्रहण हो रहा है। पुराने विवाद शांत होंगे। पराक्रम श्रेष्ठ रहेगा। योजनाएं सफल हो सकती हैं।

वृश्चिक- द्वितीय राशि में ग्रहण होगा। स्थाई संपत्ति से जुड़े मामलों में समस्याएं आ सकती हैं। धन की कमी रहेगी और उदासी रहेगी।

धनु- इसी राशि में एक साथ 6 ग्रह रहेंगे और ग्रहण होगा। धैर्य रखने का समय है। स्वयं को संभाले और विचारों में समानता रखें।

मकर- द्वादश राशि में ग्रहण। व्यय की अधिकता करेगा, एवं अनावश्यक परेशानी उत्पन्न करेगा। घरोपयोगी वस्तुएं ठीक ढंग से कार्य नही करेंगी।

कुंभ- एकादश राशि में ग्रहण आय को बाधित कर सकता है, लेकिन मेहनत का फल मिलेगा। पूजा-पाठ में मन लगेगा।

मीन- दशम राशि में ग्रहण कार्य में बाधाएं आएंगी, लेकिन स्वयं की समझदारी से परेशानियों का हल निकाल पाएंगे।