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लखीसराय और सूर्यगढ़ा की सीटों पर बगावत के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

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Patna: लखीसराय जिले की दोनों विधानसभा सीट सूर्यगढ़ा और लखीसराय में आगामी 28 अक्टूबर को मतदान होना है। सूर्यगढ़ा नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। इस कारण इस क्षेत्र में सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक वोट पड़ेंगे। जबकि लखीसराय में सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा। दोनों विधानसभा मिलाकर कुल 37 प्रत्याशी मैदान में हैं। लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे 18 और सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे 19 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 7,02,985 मतदाता करेंगे। सभी प्रत्याशी अपने-अपने स्तर से मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जनसंपर्क अभियान में लगे हुए हैं। स्टार प्रचारकों का आना भी शुरू है। सबसे पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सूर्यगढ़ा में अपने दल के प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी सभा कर चुके हैं। बावजूद दलीय बगावत तेज हैं और वोटों की सेंधमारी की पूरी संभावना दोनों क्षेत्र में है। इसे रोकने के लिए दलीय प्रत्याशी स्टार प्रचारकों पर ही भरोसा कायम किए हुए हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं।

लखीसराय : 18 प्रत्याशी

1 विजय कुमार सिन्हा, राजग (भाजपा)

2 अमरेश कुमार, महागठबंधन (कांग्रेस)

3 फुलैना ङ्क्षसह, निर्दलीय

4 सुजीत कुमार, निर्दलीय

माननीय की प्रतिष्ठा दांव पर

लखीसराय विधानसभा क्षेत्र हॉट सीट बन गया है। कुल 18 प्रत्याशियों में से एक राज्य के श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा यहां से राजग (भाजपा) के प्रत्याशी हैं। विगत दस साल से वे यहां के विधायक हैं। उनके मुकाबले में महागठबंधन में यह सीट राजद से निकलकर कांग्रेस की झोली में चले जाने के कारण यहां बहुत कुछ नहीं रह गया है। कांग्रेस ने जदयू छोड़कर आए नए चेहरे अमरेश कुमार पर दांव खेला है। हालांकि पूर्व विधायक फुलैना ङ्क्षसह निर्दलीय मैदान में कूदकर चुनावी लड़ाई में रोमांच ला दिया है। फुलैना ङ्क्षसह वर्ष 2005 के चुनाव के राजद की टिकट पर चुनाव लड़े थे और भाजपा के विजय कुमार सिन्हा को पराजित किए थे। फिर 2010 में वे विजय कुमार सिन्हा से काफी अंतर से चुनाव हार गए। बीच में कुछ दिनों के लिए राजद से अलग होकर जदयू में शामिल हुए थे लेकिन बहुत दिनों तक उस दल में नहीं रह पाए। इस बार राजद से टिकट लेने के लिए रांची से लेकर पटना तक दौड़ लगाए लेकिन दलीय टिकट से उन्हें वंचित होना पड़ा। आखिर में निर्दलीय मैदान में खड़े हैं। उधर भाजपा से बागी होकर कुमारी बबिता और जदयू से बागी होकर सुजीत कुमार चुनावी अखाड़े में वर्तमान विधायक के वोटों में सेंधमारी करने की फिराक में लगे हैं और इस कारण निर्दलीय ने यहां की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। लखीसराय विधानसभा क्षेत्र के

1,95,467 पुरुष मतदाता एवं 1,70,699 महिला मतदाता उक्त 18 में से किसी एक के भाग्य को आगामी 28 अक्टूबर को मतदान के माध्यम से लिखेंगे।

सूर्यगढ़ा : 19 प्रत्याशी

1 प्रहलाद यादव, महागठबंधन (राजद)

2 रामानंद मंडल, राजग (जदयू)

3 गणेश कुमार, रालोसपा

बागी के कारण मुकाबले में रोमांच

सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र से कुल 19 प्रत्याशी चुनावी मैदान में खड़े होकर विधानसभा की दहलीज पार करने को बेताब हैं। महागठबंधन से यह सीट परंपरागत तरीके से राजद के हिस्से में रहा है। प्रहलाद यादव इस क्षेत्र से 1995 में निर्दलीय चुनाव जीतकर राजद में शामिल हुए थे और तब से इस दल के जिलाध्यक्ष हैं। वर्ष 2000 और 2005 के फरवरी में हुए चुनाव में भी वे राजद की टिकट पर निर्वाचित हुए। बिहार विधानसभा का गठन नहीं हो पाने के कारण अक्टूबर 2005 के चुनाव में भाजपा के प्रेम रंजन पटेल ने यहां से जीत दर्ज कर ली। 2010 में भी पटेल ही निर्वाचित हुए लेकिन 2015 में प्रहलाद यादव ने फिर से कब्जा जमाया। पाटी ने फिर से उन पर भरोसा किया है। जबकि उनके मुकाबले में राजग की ओर से यह सीट भाजपा के बदले जदयू के खाते में चली गई है। जदयू ने दल के जिलाध्यक्ष रामानंद मंडल पर भरोसा किया है। उधर मंडल को टिकट मिलते ही दल के अंदर ही आग लग गई। मुंगेर के सांसद ललन ङ्क्षसह के खास रहे रविशंकर प्रसाद ङ्क्षसह उर्फ अशोक ङ्क्षसह ने दल से बगावत करते हुए लोजपा की टिकट पर ताल ठोक कर मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना दिया है। जदयू के ही एक अन्य नेता गणेश कुमार रालोसपा की टिकट पर मैदान में हैं। कई अन्य टिकट से वंचित होने पर नाराज चल रहे हैं। सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र में 1,81,417 पुरुष मतदाता एवं 1,55,388 महिला मतदाता उक्त 19 प्रत्याशियों में से किसी का चयन करने करेंगे।