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RRS ने मोदी सरकार को UPSC exam के पैटर्न को बदलाव करने का सुझाव दिया। हो सकते हैं ये बदलाव दलाव

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काजल सिंह की रिपोर्ट ,

 दिल्ली। आरएसएस के अनुसार, सीसैट क्वालिफाई करने वाले करीब 90 फीसदी अभ्यर्थी इंग्लिश मीडियम से आते हैं। यह परीक्षा सिविल सेवा के लिए उम्मीदवारों में जरूरी कौशल का परीक्षण भी नहीं करती। इसलिए क्वालिफाइंग एग्जाम के रूप में इस परीक्षा की जरूरत नहीं है।
इंटरव्यू के संबंध में आरएसएस का कहना है कि इसके पैटर्न में एकरूपता नहीं है। अलग-अलग पैनलों के अलग पैटर्न से अभ्यर्थी प्रभावित होते हैं। कुछ पैनल उदार होते हैं जबकि कुछ बेहद सख्त। आखिरकार अभ्यर्थियों का भविष्य इस बात पर निर्भर कर जाता है कि उसका इंटरव्यू पैनल किस तरह का है। यह बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।
कमेटी ने एक सुझाव यह भी दिया है कि सरकार इंटरव्यू को स्टैंटर्डडाइज करने के लिए पैनलों को प्रशिक्षण दे और इस प्रक्रिया की निगरानी करे।इसके अलावा इंटरव्यू को खत्म कर इसकी जगह आर्मी की तरह साइकोलॉजिकल टेस्ट शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है।
इसके अलावा संघ ने सरकार के समक्ष यूपीएससी मुख्य परीक्षा की आंसर-की जारी करने का भी प्रस्ताव रखा है। फिलहाल यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की आंसर-की जारी होती है, मुख्य परीक्षा की नहीं।

आइये जानते  इस बदलाव से होने वाले प्रमुख बिन्दुओं के बारे में।

  • हिंदी माध्यम विद्यार्थियों को थोड़ी सी मदद मिल सकती है।
  • पहला बदलाव Aptitiude टेस्ट खत्म करने को कहा है।
  • दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि इंटरव्यू की जगह आर्मी की तरह साइकोलॉजीकल टेस्ट लेने को कहा।

आपको बताते चलें की यह  जानकारी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दी गई। इस कार्यक्रम में RSS के प्रमुख मोहन भागवत के साथ अन्य वरिष्ठ सदस्य, केंद्र सरकार और UPSC के सदस्य व अन्य मह्त्वपूर्ण लोग मौजूद थे।

(काजल सिंह और प्रीति कुमारी की रिपोर्ट )