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सौभाग्य योजना बनी मजाक योजना

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी- जिले के आदिवासी विकासखंड कुसमी अंतर्गत पिपराही गांव आज भी विद्युत विहीन है. यहां आठ माह पूर्व विद्युत कंपनी द्वारा सौभाग्य योजना के तहत गांव को विद्युतीकृत किए जाने के लिए सर्वे कराया गया था. सर्वे का कार्य पूरा होते ही ग्रामीणों को लंबे चौड़े विद्युत विल थमाए जाने लगे हैं.

बिना विद्युत कनेक्शन व गांव को विद्युतीकृत किए जाने पहले ही बिजली के लंबे चौड़े विल पाकर ग्रामीण काफी परेशान हैं, पंच से लेकर सरपंच तक शिकायत की नतीजा कुछ नहीं निकला तो शिकायत लेकर विद्युत वितरण केंद्र मड़वास तक पहुंच गए. लेकिन, नतीजा कुछ नहीं निकला. अभी भी गांव मेें बिजली नहीं पहुंची है, लेकिन ग्रामीणों को लगातार विद्युत विल भेजा जा रहा है. विद्युत कंपनी की इस मनमानी से ग्रामीण काफी परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है.

अविद्युतीकृत गांव व टोला मजरों को विद्युतीकृत करने के लिए लागू की गई सौभाग्य योजना सीधी जिले में मजाक बनकर रह गई है. जिले के कई ऐसे गांव हैं, जहां सौभाग्य योजना के तहत गांव को विद्युतीकृत किए जाने के लिए सर्वे तो कराया गया है. लेकिन, विद्युतीकरण का कार्य आज भी अधर में लटका हुआ है. कुछ गांवों में विद्युतीकरण के नाम पर थोड़ी बहुत काम तो हुआ. लेकिन, लोगों के घरों में विद्युत कनेक्शन नहीं किए गए, इतना जरूर हुआ है कि सर्वे के बाद से ही ग्रामीणों को लंबे चौड़े विद्युत के विल भिजवाना शुरू कर दिया गया है.

बिजली को तरसती बूढ़ी आंखे-

जिले के आदिवासी विकासखंड कुसमी अंतर्गत ग्राम पिपराही पोष्ट उमरिया ऐसा गांव हैं. जहां आजादी के सात दशक बाद भी बिजली नहीं पहुंच पाई है. बताया गया कि इस गांव में एक हजार से अधिक परिवार निवासरत हैं, जिसमें बैगा जनजाति, गोंड़, अगरिया की संख्या ज्यादा है.

गांव के बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि घरों में विद्युत कनेक्शन के सपने संजोये आंखे बूढ़ी हो गई, लेकिन विद्युत कनेक्शन नहीं हो पाया. पिछले अगस्त माह में जब विद्युतीकरण के लिए सर्वे शुरू हुआ, तो लगा कि अब हमारे घर बिजली से रौशन हो जाएंगे, लेकिन अब लगता है कि यह सपना सपना ही रह जाएगा.

अगस्त माह में हुआ था सर्वे, जनवरी मे लगे पोल-

ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि गत अगस्त माह में सौभाग्य योजना के तहत गांव में विद्युतीकरण के लिए सर्वे शुरू किया गया था, सर्वे का कार्य पूरा होते ही सितंबर माह से बिल भेजना शुरू कर दिया गया. जो लगातार भेजा जा रहा है, हालांकि गत जनवरी माह जनवरी में गांव में विद्युत पोल लगा दिए गए हैं, कुछ जगह केविल भी लग गई है.