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छात्रों के सुरक्षा को लेकर लापरवाह दिख रही है निजी स्कूलों के प्रशासन

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। स्कूलों मे पढ़ने बाले छात्रों के सुरक्षा को लेकर जितने लापरवाह प्रशासन के अधिकारी है उससे कई गुना ज्यादा निजी स्कूलों के संचालक व अच्छी तालीम दिलाने की लालसा पालकर दाखिला दिलाने वाले अभिभावक बने हुए है। जिसके चलते स्कूलों को खुले हुए महीनें भर का समय गुजर गया है, किन्तु परिवहन विभाग व प्रशासन की बनने वाली समन्वय समिति का ना तो गठन हुआ है न ही समिति की बैठक को लेकर चिंतन मनन किया जा रहा है।

आलम यह हो गया है कि निजी स्कूलों के संचालक बच्चों के जिन्दगी से खिलवाड़ करते हुए असुरक्षित बाहनों का संचालन कर मनमानी शुल्क जमा करा रहे है। इसके बाद भी सुरक्षित परिवहन का संचालन नही किया जा रहा है इससे लगता है स्कूल, प्रशासन, शिक्षा विभाग और यहां तक कि अभिभावक भी अभी तक बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं हुए हैं। स्कूली बच्चों की मौत के बाद सरकार के आदेशों को हवा में उड़ा दिया जा रहा है। अन्य आदेशों की तरह स्कूली बसों में बच्चों की सुरक्षा का आदेश भी फाइल में बंद हो गया।

स्कूल शुरू होने के महीने भर बाद स्कूल बसों के संचालन की सुरक्षा के लिए परिवहन समन्वय समिति का गठन नहीं हो सका है। यहां तक कि कई स्कूल तो इस आदेश के बारे में अब तक अनजान ही बने हुए हैं। बता दें कि बीते जनवरी के महीने में इंदौर के डीपीएस बस हादसे में पांच बच्चों की मौत के बाद सरकार व शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई आदेश जारी किये थे।

जिसमें स्कूल बसों के रख रखाव के मामले में प्रशासन ने सख्ती बरतने और यहां तक कि मापदंड के विपरित बसें होने पर मान्यता निरस्त कर देने की भी चेतावनी दी थी। लेकिन चंद दिनों में ही आदेशों की हवा निकल गई। स्कूलों ने आदेशों को सामान्य कागज की तरह फाइलों में लगाकर बंद कर दिया तो आदेश जारी करने वाले अफसर मुद्दा ठंडा होते ही ढीले पड़ गए। नया शिक्षा सत्र अप्रैल में शुरू हो चुका था। तब से अब तक स्कूलों में परिवहन समन्वय समिति का गठन नहीं हो सका है।

विडंबना यह है कि समिति का गठन नहीं होने पर स्कूल प्रबंधन से अब तक कोई सवाल-जवाब नहीं हुआ है। ज्यादातर स्कूलों के पास नई समिति बनाने को लेकर कोई योजना भी नहीं है, जबकि नियमानुसार स्कूल शुरू होते ही प्रबंधन को शिक्षक पालक संघ की तरह परिवहन समन्वय समिति का गठन करना था। लेकिन जिला प्रशासन व परिवहन विभाग के साथ स्कूल शिक्षा विभाग की सांठगांठ के चलते बच्चों के सुरक्षा को लेकर बनने बाली समिति अपने स्वरूप मे आने से पहले ही शैशव सैया मे चली गई है।

स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन ने मार्च में ही परिवहन समन्वय समिति के गठन के आदेश जारी किए थे। इस समिति के गठन के बिना स्कूलों की मान्यता समाप्त करने के आदेश थे, लेकिन अब तक एक भी स्कूल की मान्यता पर कोई संकट नहीं आया। मान्यता नवीनीकरण के लिए भी समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। मापदंडों पर खरा नहीं उतरने पर सीबीएसई, आईसीएसई सहित एमपी बोर्ड के सभी स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण नहीं होगा।

अभिभावकों की भागीदारी-

स्कूली वाहनों के सुरक्षित संचालन के लिए प्रत्येक स्कूल में उक्त समिति का गठन होना था। इसमें अभिभावकों की भागीदारी को विशेष स्थान दिया जाना है। इससे वे स्कूल बसों की स्थिति, स्पीड, ड्राइवर कंडक्टर का व्यवहार, बच्चों के आने-जाने का समय पर व्यक्तिगत निगरानी रख सके। इस समिति की प्रत्येक तीन महीने में बैठक होगी। इसमें परिवहन व्यवस्था की समीक्षा करने का दिया था आदेश। क्या हैं समिति के काम व जिम्मेवारिया स्कूली बच्चों के परिवहन में स्कूल में जितने भी छोटे-बड़े वाहनों का उपयोग हो रहा है, उन सभी का रिकॉर्ड समिति व पुलिस के पास होगा। पारिवहन के लिए निर्धारित मानक व गुणवत्तायुक्त बस व रिक्शे का उपयोग। बस या रिक्शा में बच्चों की क्षमता तय करना। तय क्षमता से ज्यादा बच्चे बस में नहीं हो, इसका ध्यान रखना।

समिति इस बात का ध्यान रखेगी कि बसों द्वारा बच्चों को स्कूल परिसर के अंदर ही छोड़ा जा रहा है या नहीं। बसों में अनिवार्य तौर पर सीट बेल्ट लगाए जाएं। साथ ही बच्चों के अभिभावकों को भी इस संबंध में जागरूक किया जाए कि वे बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें। स्कूल बसों के ड्राइवरों को समय-समय पर ड्राइविंग टेस्ट व प्रशिक्षण देने के लिए परिवहन विभाग से समन्वयक स्थापित करना। समिति इस बात का भी ध्यान रखेगी कि विद्यार्थी जिन वाहनों का उपयोग स्कूल आने जाने के लिए कर रहे हैं, वह तय मापदंड के अनुरूप है या नहीं।

विद्यार्थियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहनों का रिकॉर्ड रखना और पुलिस को इस संबंध में पूरी जानकारी देना। ऐसे होगी परिवहन समन्वय समिति स्कूल के प्राचार्य संयोजक जिलाशिक्षा अधिकारी या उनके द्वारा नामांकित सदस्य प्रतिनिधि जो व्याख्याता से कम न हो क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी या उनके द्वारा नामांकित सदस्य प्रतिनिधि जो निरीक्षक से कम न हो अनुविभागीय अधिकारी या उनके द्वारा नामांकित सदस्य प्रतिनिधि स्कूल में संचालित प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन से सदस्य एक विद्यार्थी के अभिभावक को शामिल किया जाना था। लेकिन सीधी जिले मे इसका दूर दूर तक कही पालन नही रहा है।