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शिक्षामित्र

क्या शिक्षा मित्रों के भविष्य के साथ जानबूझ कर खिलवाड़ किया जा रहा है

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महिला शिक्षकों को शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक करनी पड़ेगी परीक्षा ड्यूटी…

Yuvraj SIngh

युवराज सिंह

 

 

 

 

 

कौशाम्बी: पहले तो सरकार ने शिक्षा मित्रों के साथ मनमानी की फिर रही सही कोर -कसर माननीय न्यायालय ने पूरी कर दी। लेकिन जब इतने में जी नहीं भरा तो TET पास शिक्षा मित्रों को अधयापक बनने के लिये आवश्यक परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया, जिसके चलते शिक्षा मित्रों को विद्यालय में कई कार्य निपटाने के बाद परीक्षा से गुजरने के लिये तैयारी करना पड़ रहा है।

लेकिन उनकी इस तैयारी को भी डांवाडोल करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपनी कमर कस ली है।

मालूम हो 6 फरवरी से बोर्ड की परीक्षा शुरू होने को है, वही मार्च में शिक्षा मित्रों को भी आवश्यक परीक्षा से गुजरना है। ऊपर से परीक्षा देने वाले उन्ही शिक्षा मित्रों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगाकर उनके भविष्य से खिलवाड़ करने में अधिकारी तनिक भी गुरेज नहीं कर रहे है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है, हद तो तब हो गई जब महिला शिक्षकों की ड्यूटी भी कई किलोमीटर दूर विद्यालयों में लगाई जा रही है जबकि उन्ही के गाँव में ड्यूटी लगाकर परीक्षा सकुशल कराई जा सकती है।

मालूम हो जिले में शिक्षक नेताओं की पूरी फौज खड़ी है लेकिन उस फौज का सामना करने की हिम्मत प्रशासन में नहीं दिख रही है। वहीँ यदि प्रशासन इन शिक्षक नेताओं की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगाती तो न ही शिक्षा मित्रों के भविष्य से खिलवाड़ होता और न ही किसी महिला शिक्षक को जिले के एक कोने से दूसरे कोने जाकर ड्यूटी करनी पड़ती।