Surendra Sharma

कोलारस उपचुनाव: भाजपा उम्मीदवार के रूप में सुरेन्द्र शर्मा का नाम सबसे आगे

361
Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

शिवपुरी। उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद अब भाजपा और कांग्रेस में टिकट की दावेदारी के लिए सक्रियता बढ़ गई है। चुंकी शिवपुरी जिले की कोलारस विधानसभा सीट कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रभाव वाली सीट है। इसलिए भाजपा को सिंधिया के सामने एक ऐसा उम्मीदवार खड़ा करना होगा जो ना सिर्फ जीत दिला सके बल्कि सिंधिया के गढ़ में सेंध लगा सके। टिकट के लिए उम्मीदवार की रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन रेस में सबसे आगे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा का नाम चर्चा में है।

सुरेंद्र शर्मा कोलारस उपचुनाव में भाजपा के सबसे बड़े दावेदार के रूप उभरकर सामने आ रहे है। जिले में सुरेन्द्र शर्मा का जनता से सीधा जुड़ाव है, वे वहां के सबसे प्रभाशाली नेता माने जाते है। साथ ही प्रदेश स्तर पर भी उनका नाम बड़े चेहरे के रूप में देखा जाता है, ऐसे में उनकी दावेदारी मजबूत होगी, वहीं पार्टी भी कोई जोखम न उठाते हुए जनता के बीच अच्छी छवि वाले और बड़े चेहरे को ही अपना उम्मीदवार बनाना चाहेगी जो सिंधिया के गढ़ में टक्कर दे सके।

अब तक टिकट की रेस में पत्ता कारोबारी और पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन, कांग्रेस मूल के भाजपा नेता वीरेन्द्र रघुवंशी और जिला अध्यक्ष सुशील रघुवंशी के नाम सामने आ रहे है, लेकिन नए संकेतों की बात करे तो कोलारस मूल के भाजपा नेता सुरेन्द्र शर्मा का नाम भी सुर्खियों में आ गया है।

सुरेन्द्र शर्मा लगातार कोलारस विधानसभा में भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। अब तक उनकी मांग पर सौ करोड़ से अधिक के विकास कार्य हुए हैं, जिसको लेकर जनता में उनकी छवि एक काम कराने वाले नेता की है। वे सीएम से कहकर कई घोषणाएं करवा चुके है, उनके क्रियान्वन के लिए भी उनको खत लिख चुके है। जिसके चलते मुख्यमंत्री शिवराज के बीच एक अच्छी छवि बनाए हुए है। सुरेन्द्र कोलारस मूल के ही रहने वाले हैं, उनका परिवार मढ़वासा गांव में रहता है। इसलिए चुनाव के दौरान वे जनता से सीधा संपर्क साध सकते है जो कहीं ना कहीं भाजपा को बड़ी जीत दिला सकते है।

इसके विपरित बाकी दावेदारों की बात करे तो पत्ता कारोबारी देवेन्द्र जैन को कोलारस में बाहरी नेता माना जाता है। करोड़पति कारोबारी होने और पूर्व विधायक के साथ साथ सत्ता के दूसरे पदों पर उनके परिवारजनों की मौजूदगी रहने के कारण वो काफी विवादित भी रह चुके हैं। दूसरे दावेदार कांग्रेस मूल के नेता वीरेन्द्र रघुवंशी हैं। उनकी छवि ठीक है परंतु भाजपा के भीतर वीरेन्द्र रघुवंशी का काफी विरोध भी है। रघुवंशी को आज भी सिंधिया विरोधी कांग्रेसी ही माना जाता है। कोलारस में क्षेत्र में ब्राह्मण वोट महत्वपूर्ण स्थिति में है और पहली बार ब्राह्मण वोटर्स एकजुट नजर आ रहा है। ऐसी स्थिति में सुरेन्द्र शर्मा के उम्मीदवार बनने की संभावना ज्यादा जताई जा रही है।

संघ से निकलकर फिर भाजपा में जुड़े…

सबसे पहले सुरेन्द्र शर्मा शिवपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिलाध्यक्ष बने। इसके बाद वे एबीवीपी के प्रांतीय संगठन मंत्री के पद पर आए। बाद में आरएसएस ने बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उन्हे भाजपा में भेज दिया। संघ से नजदीकी के चलते उनकी पकड़ हमेशा से मजबूत मानी जाती रही है। भाजपा में उन्हे प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया। कोलारस विधानसभा के गांव मढ़वासा के रहने वाले सुरेन्द्र शर्मा को भाजपा ने कोलारस विधानसभा की तैयारियों के लिए भेजा था। वो पिछले 3 माह से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।

बीते दिनों कोलारस भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और सुरेन्द्र शर्मा की भोपाल में मुलाकात भी हुई थी। दोनों भोपाल में मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में रामेश्वरम धाम की यात्रा पर जा रहे तीर्थ यात्रियों को विदाई समारोह में शामिल हुए थे। इससे पहले सुरेन्द्र शर्मा की सीएम शिवराज सिंह से भी विशेष मुलाकात हो चुकी है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोलारस उम्मीदवार के रुप में सुरेन्द्र शर्मा का नाम सबसे पहले है।