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Kalpana Parulekar

नेता प्रतिपक्ष भाजपा के साथ हाथ मिलाकर किसानों को लूट रहे: कल्पना पारुलेकर

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राम बिहारी की रिपोर्ट,

सीधी। किसानों पर हो रहे अत्याचार पर कांग्रेस मौन साधकर बैठी है तो विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष अपने क्षेत्र के किसानों को वाजिव हक दिलाने का प्रयास नहीं किये। इससे यह साबित होता है कि सरकार के किसान विरोधी नीति में वे सरकार गोद में बैठकर कर समर्थन कर रहे हैं। विपक्ष की जो भूमिका है उसका निर्वहन करने में विफल साबित हुए हैं। उक्त बाते कांग्रेस की पूर्व विधायिका डॉ. कल्पना पारूलेकर ने गुलाव सागर बांध में बने गेट को हटाने व किसानों को बचाने के लिये चलाये जा रहे आन्दोलन में शामिल होने सीधी पहुंचने के बाद पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए कहा है।

सुश्री पारूलेकर ने कहा कि कांग्रेस जिस मुगालते में रहकर किसानों पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी साधे बैठी है तो किसान उनके साथ जाने वाले नहीं है। बल्की किसान पूरे प्रदेश में 50 संगठनों को एक मोर्चा बनाकर भाजपा व कांग्रेस दोनों को चुनौती देने चुनाव मैदान में उतरने की योजना तैयार कर रहे हैं।

अभी तो यह संगठन सीधी के उन नौ गांव के किसानों पर हुए अत्याचार से मुक्त कराने का प्रयास कर रहा है। 23 फरवरी से जिला प्रशासन के साथ-साथ संगठन गांव-गांव जाकर समस्या का समाधान कराने की योजना बनाई है। 15 मार्च तक यदि सरकार व प्रशासन किसानों के मारे गये हक को वापस नहीं करता तो मोर्चा जेल भरो आन्दोलन करेगा। यही से चुनावी शंखनाद भी होगा।

डॉ. पारूलेकर ने कहा कि वर्तमान में मध्य प्रदेश नेतृत्व विहीन हो गया है। और प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य है कि जिस प्रदेश विन्ध्य प्रदेश सोना उगलने वाला प्रदेश है। विधान सभा का प्रतिपक्ष नेता भी जिस क्षेत्र के हैं। बने गुलाब सागर बांध के 9 गांवो के किसान प्रभावित हो रहे हैं। नहर से बड़ी संख्या मे गांव प्रभावित हो रहे हैं।

गरीबों को कोई मुआवजा का वितरण नहीं किया गया है। जहां किया गया मनमानी किया गया है। पर नेता प्रतिपक्ष चुप्पी साधे बैठे है। सरकार बिजली के बिल अनाप, सनाप भेज रही है भावान्तरण के नाम पर किसानों छला जा रहा है। इस कारण किसान अब न बिजली का बिल भरेगें न लिया गया बैंकों का कर्जा भरेगें इसके लिये वे किसानों के साथ खुद जेल जाने को तैयार है।

प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि या तो किसानों की इस लड़ाई में शामिल होकर लड़े अगर वह सरकार से गोपनीय सौदा तय नहीं किया है तो मैदान में सामने आये यदि कांग्रेस किसानों के साथ नहीं आई तो किसान सड़क से लेकर चुनाव तक अपनी लड़ाई खुद लड़ेगें।

किसानों के मुख्य मुद्दे के साथ हमारा दूसरा मुद्दा संविदा नियुक्ति के खिलाफ है। संविदा नियुक्ति को पमार्नेन्ट देकर सारी सुविधा उपलब्ध कराया जाय। दैनिक वेतन भोगियों को कांग्रेस भाजपा दोनो ने छला हैं। उन दैनिक वेतन भोगियों की अपील माननीय न्यायालय में दायर कराकर 4 सप्ताह के अन्दर सरकार से जबाव मांगकर पमार्नेन्ट क्यों नहीं किया गया। निश्चित ही 110 प्रतिशत हम यह लड़ाई जीतेंगें।

म0प्र0 की भावन्त सरकार भावान्तर का नाटक बंद करो और सरकार स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर लागत से डेढ़ गुना फसल का समर्थन मूल्य हमारे हाथ में दे और कर्ज के जाल में न फंसा कर किसानों को आत्महत्या के लिये न मजबूर करें। किसानों के बिजली कनेक्शन पमार्नेन्ट करके 3 हार्सपावर पर 50 रुपए, 5 हार्सपावर पर 100 रुपए, 7 हार्स पावर पर 150 रुपए के सामान्य दर पर बिजली दर से मुहैया कराया जाय।

इससे जो होने वाला घाटा मण्डी टेक्स से पूरा किया जाय। कर्नाटक तेलगाना में जिस प्रकार किसानों को सहायता राशि दी जा रही हैं उसी प्रकार से म0प्र0 सरकार भी म0प्र0 के किसानों को सहायता राशि उपलब्ध कराये। इन मागों के साथ 15 मार्च तक गुलाब सागर बांध के प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया तो जेल भरो आन्दोलन किया जायेगा।

इस दौरान गिरजाशंकर शर्मा पूर्व विधायक, उमेश तिवारी संयोजक टोंको रोंको ठोंको, रामनारायण कुररिया सचिव मध्य प्रदेश किसान सभा, कांमरेड सुन्दर सिंह, रामचरण सोनी विद्याचरण शुक्ल जनअधिकार संगठन के पदाधिकारियों के अलावा किसान मौजूद रहे।