BREAKING NEWS
Search
RTI

बंगलादेशी घुसपैठियों पर आर टी आई कार्यकर्ता विचारक सुरेन्द्र मणि दुबे ने दिया बड़ा बयान

390
Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। सामाजिक और आर टी आई कार्यकर्ता विचारक सुरेन्द्र मणि दुबे ने बताया कि एन आर सी पूरे देश में अभी जो ज्वलंत चर्चा का विषय बना हुआ है। हमें राष्ट्र भक्त जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस विषय को समझने एवं हर भारतीय को समझाने का प्रयास करना चाहिए।घुसपैठिया राष्ट्र के लिये घातक है।

श्री दुबे ने महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में एन आर सी को पूरे देश में लागू करने की मांग करते हुए कहा कि देश में घुसपैठियों की पहचान नितांत आवश्यक है। किसी भी राष्ट्र का निर्माण जन, जमीन, संप्रभुता एवं संस्कृति से ही होता है। जन के साथ ही शेष तीन शर्तें जुड़ी रहती हैं क्यूंकि एक निश्चित भूभाग पर रहने वाला, उसी भूमि पर जाया जन्मा जन समूह ही अपने लोक व्यवहार से कालांतर में एक संस्कृति को जन्म देता है।

वह संस्कृति ही उस जन समूह की सामूहिक पहचान बन जाती है। यही राष्ट्रीयता कहलाती है। यह संस्कृति ही भूमि एवं अन्य संसाधनों के प्रति जन का दृष्टिकोण विकसित करती है। जैसे की यह धरती हमारी मां हैं भूमि के साथ मां जैसा संबंध हमारा आज का विचार नहीं है। यह वैदिक विचार हैं “ माता भूमिपुत्रोऽहम पृथिविया:”।

भूमि ही नहीं प्रत्येक प्राकृतिक संसाधन के साथ अपना मानवीय संबंध जोड़ना यह हमें हमारी संस्कृति ने ही सिखाया है। यदि निश्चित भू भाग पर उस संस्कृति के अनुरूप जीवन व्यवहार करने वाला जन ही नहीं रहेगा तो राष्ट्र की संप्रभुता कैसे बचेगी।

यदि राष्ट्र में एसे जनों की संख्या बढ़ जाएगी जो उन सांस्कृतिक मूल्यों को नहीं मानेगी। जिन पर राष्ट्र का अस्तित्व टिका हो तो क्या राष्ट्र बचेगा ?राष्ट्र के अस्तित्व को मिटाने के लिये ही जनसंख्या असन्तुलन के माध्यम से एक शांत युद्ध लड़ा जा रहा है। जिससे हम सभी अपरिचित है।

जनसंख्या असंतुलन के लिये तीन प्रमुख साधन हैं  जन्म दर में अभिवृद्धि ,धर्मांतरण बाहरी घुसपैठ व तीसरा साधन हैं घुसपैठ जो देश के विभाजन से ही सतत् क्रियाशील है। जिसका विकराल रूप आज हमें आसाम  में देखने को मिल रहा है।

राष्ट्रवादियों ने इस राष्ट्र भंजक षड्यंत्र को NRC राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन के माध्यम से देश के सामने लाने का प्रयत्न किया। जिसमें केवल आसान में 40 लाख घुसपैठि सामने आये। जो 20 विधायक एवं 5 सांसद चुनते है। जो आसाम की कुल जनसंख्या का लगभग 10% है। शेष देश मे लगभग 10- 15 करोड़ घुसपैठिया है।

वही NRC – बंगलादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिये आसम के छात्रों ने एक आंदोलन चलाया। यही आंदोलन असम गण परिषद् के रूप में एक राजनीति दल बना इन्होंने भारत के तात्कालिक प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी से लिखित समझौता किया था जो NCR कहलाया। NRC को समझने एवं समझाने के लिये 6 प्रमुख बिंदु  देश में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है।

असम में सिटिजनशिप रजिस्टर देश में लागू नागरिकता कानून से अलग है। यहां असम समझौता 1985 से लागू है और इस समझौते के मुताबिक- 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्‍य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) के अनुसार,जिस व्यक्ति का नाम सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है।

उसे अवैध नागरिक माना जाता है। इसे 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। इसमें यहां के हर गांव के हर घर में रहने वाले लोगों के नाम और संख्या दर्ज की गई है। NRC की रिपोर्ट से ही पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं है। आपको बता दूं कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्‍तान के बंटवारे के बाद कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए। लेकिन उनकी जमीन असम में थी और लोगों का दोनों और से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा।

 इसके बाद 1951 में पहली बार NRC के डाटा का अपटेड किया गया। इसके बाद भी भारत में घुसपैठ लगातार जारी रही। असम में वर्ष 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद भारी संख्‍या में तथाकथित शरणार्थियों का पहुंचना जारी रहा और इससे राज्‍य की आबादी का स्‍वरूप बदलने लगा।

80 के दशक में अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने एक आंदोलन शुरू किया था। आसू के छह साल के संघर्ष के बाद वर्ष 1985 में असम समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार उसकी देख रेख में 2015 से जनगणना का काम शुरू किया गया।

इस साल जनवरी में असम के सिटीजन रजिस्‍टर में 1.9 करोड़ लोगों के नाम दर्ज किए गए थे। जबकि 3.29 आवेदकों ने आवेदन किया था।असम समझौते के बाद असम गण परिषद के नेताओं ने राजनीतिक दल का गठन किया। जिसने राज्‍य में दो बार सरकार भी बनाई। वहीं 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1951 के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप को अपडेट करने का फैसला किया था।

उन्होंने तय किया था कि असम में अवैध तरीके से भी दाखिल हो गए लोगों का नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप में जोड़ा जाएगा। लेकिन इसके बाद यह विवाद बहुत बढ़ गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। जो लोग NRC का विरोद्ध कर रहें है। यह वही लोग हैं जो भारत में एक नये पाकिस्तान को जन्म देना चाहते है।

केवल अपने राजनीतिक स्वार्थों एवं तुष्टिकरण के चलते एक और भारत विभाजन को स्वीकार कर रहें है। यदि हम सच्चे राष्ट्रभक्त नागरिक हैं तो घुसपैठियों को बसाने वालों का पुरज़ोर विरोध करें और पुरे देश में एन आर सी लागू करने की मांग करे।