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जान हथेली पर रखकर खटारा बसों में यात्रा करने को मजबूर मुसाफिर

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बस मालिक काट रहे चांदी, ऐसे मामले की कहां करें शिकायत…

परिवहन अधिकारी की अनदेखी से मनमानी कर रहे बस मालिक…

Rambihari pandey
रामबिहारी पांडेय
सीधी। परिवहन विभाग की अनदेखी से जिले में खटारा बसें दौड़ रही हैं। इनमें न आपातकालीन खिड़की होती है न ही प्रवेश-निकासी के लिए अलग-अलग गेट। अनहोनी की स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार तो इसी चक्कर में लोग जान गंवा बैठते हैं। बस संचालन के लिए शासन ने भले ही नियम-कायदे तय कर दिए हैं, लेकिन इनका पालन करने में न तो बस मालिक रुचि दिखा रहे है न ही विभागीय अधिकारी इसे अपनी जिम्मेदारी समझते।

यही वजह है कि जिलेभर में मनमानी का दौर चल रहा है। हादसे-दर-हादसे के बाद भी प्रशासन बसों की फिटनेस को लेकर सख्ती नहीं बरत रहा। ज्यादातर बसें धक्के से स्टार्ट होती हैं। टूटी खिड़कियां और फटी उखड़ीं सीटें भी यात्रियों के लिए पेरशानी का सबब बनी हुई हैं। यह नजारे दूरस्थ गांवों ही नहीं कस्बों में भी दिख जाते हैं।

इमरजेंसी गेट तक नहीं, सुरक्षा इंतजामों की भी कर रहे अनदेखी…

जिले में संचालित होने वाली ज्यादातर बसों मे इमरजेंसी गेट नहीं है। यदि कोई हादसा होता है तो यात्रियों की जान संकट में पड़ जाती है। परिवहन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। परिवहन विभाग यात्री बसों की चेकिंग के लिए अक्सर अभियान भी चलाता है तो यह सिर्फ कुछ दिनो तक ही चलता है इसके बाद स्थिति फिर पुराने ढर्रे पर आ जाती है। जिले मे कई बस ऐसी संचालित हो रही है जिनमें सिर्फ एक ही गेट है।

अगर हादसा कोई हादसा होता है तो यात्रियों को बस से निकलना भी मुश्किल हो जाएगा। बसों मे एक ही गेट होने की बजह से बस के अंदर यात्रियों का प्रवेश और निकासी एक ही गेट से होती है। एक ही गेट होने की बजह से महिला यात्रियों को पुरूष यात्रियों के साथ उतरने-चढने मे काफी परेशानी होती है।

नहीं हटे जाल…

शासन ने बस के पीछे जाल हटाने के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन जिले में अब भी ज्यादातर बसों में ये जाल आसानी से देखे जा सकते हैं। अंदर जगह न होने पर कई बार यात्री इन्हीं में लटक कर सफर करते हैं।

यह है नियम: पुरानी बसों के लिए परिवहन कार्यालय एक साल के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करता है। अगर बस नईं है तो दो साल तथा वीडियो कोच बसों के लिए तीन साल के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है।

सुरक्षा इंतजाम: सुरक्षा इंतजामों का अभाव है। बसों में न अग्रिशमन यंत्र होता है न ही फस्र्ट एड किट। लापरवाह बस मालिक की जिला कलेक्टर से शिकायत किया जा सकता है।

ओवरलोडिंग बसों में ओवरलोडिंग भी बेखौफ की जा रही है। क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं। खासकर शादी-सीजन में ठूंस-ठूंस कर यात्री बैठाए जाते हैं। सिहावल, कुसमी, मझौली, नकझर, लौआर व बीछी मार्ग में स्थिति ज्यादा बुरी है।