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भारतीय होने के उपाय करने में जुटी चीनी फोन कंपनियां, भारी-भरकम निवेश पर खतरा देख कंपनियों ने बदला रुख

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New Delhi: देश में चीन और चीनी सामानों के खिलाफ बने माहौल के बीच चीनी मोबाइल कंपनियां मेक इन इंडिया (Make in India) और खुद को ब्रांड चीन की जगह ब्रांड इंडिया का नारा बुलंद करने में जुट गई हैं। बताया जा रहा है कि चीनी फोन कंपनियां सोशल मीडिया एवं अन्य विज्ञापनों के जरिए अभियान चलाने वाली है। सूत्रों के मुताबिक चीनी कंपनियां हर हाल में अब खुद को पूरी तरह से भारत से जोड़ कर अपनी छवि को पेश करना चाहती है।

गत 20 जुलाई को चीनी फोन कंपनी शाओमी (Xiaomi) के इंडिया हेड मनु कुमार जैन ने ट्वीट कर बताया कि रेडमी नोट 9 फोन मेड इन इंडिया है और मेड फॉर इंडिया है। उन्होंने यह भी ट्वीट किया कि शाओमी इंडिया का 99 फीसद स्मार्टफोन स्थानीय स्तर पर बनाया गया है और इस निर्माण में 65 फीसद हिस्सेदारी स्थानीय संसाधनों की है। 30 जुलाई को रेडमी नोट 9 प्रो-सीरीज लांच किया जा रहा है। रियलमी की तरफ से तो यहां तक कहा गया कि यह इंडियन स्टार्टअप कंपनी है।

टेक विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले छह सालों से शाओमी इंडिया भारत के मोबाइल फोन बाजार में है और पिछले तीन सालों से स्मार्टफोन के भारतीय बाजार में शाओमी नंबर वन है। लेकिन किसी फोन के लांच से पहले शाओमी हेड को यह नहीं बताना पड़ता था कि लांच होने वाला फोन कहां बना है। भारतीय स्मार्ट फोन बाजार में 72 फीसद की हिस्सेदारी रखने वाली चीनी फोन कंपनियों को भारतीय होने का दावा नहीं करना पड़ता था।

विशेषज्ञों के मुताबिक लद्दाख सीमा पर चीन के साथ विवाद के बाद भारत में चीन के खिलाफ बने माहौल से भी चीनी कंपनियों के रुख में अंतर आया है। काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन के बाजार में चीनी फोन की हिस्सेदारी कम हुई है। दूसरी तिमाही में शाओमी की हिस्सेदारी एक फीसद गिरावट के साथ 29 फीसद पर आ गई तो रियलमी और ओप्पो की हिस्सेदारी 3-3 फीसद गिरावट के साथ 11 और 9 फीसद पर आ गई। वीवो 17 फीसद की हिस्सेदारी के साथ पूर्व स्तर पर कायम है। वहीं, दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग की हिस्सेदारी में दूसरी तिमाही में पहली तिमाही के मुकाबले 10 फीसद की उछाल दर्ज की गई और यह 26 फीसद के स्तर पर पहुंच गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक इन कंपनियों को अपने भारी-भरकम निवेश की भी चिंता सता रही है क्योंकि एक बार भारतीय नागरिकों ने इनके ब्रांड की खरीदारी बंद कर दी तो इनके अरबों रुपए के निवेश बर्बाद हो सकते हैं। शाओमी ने दक्षिण भारत में अरबों रुपए का निवेश कर रखा है तो वीवो और ओप्पो जैसी कंपनियों ने एनसीआर में। सूत्रों के मुताबिक 100 से अधिक चीनी एप पर भारत सरकार की तरफ से प्रतिबंध के बाद फोन बनाने वाली चीनी कंपनियां भी सकते में हैं।