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सोशल मीडिया बनी यादों की खिड़की, बीते लम्हें किए जा रहे हैं याद

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अमित कुमार की दिल की कलम से –

ब्लॉग। जहां पूरा देश शोक की लहर में डूबा हो, इसलिए कि लोगों के लोकप्रिय राजनेता व देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन गुरुवार शाम पांच बजे हो गई। उनकी मृत्यु से पूरा देश स्तब्ध है। हर कोई अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति अपनी भावनाओं को स्थान देने के लिए सोशल साइट्स का सहारा ले रहा हैं।

देश के हर वर्ग से एक ही आवाज आ रही है कि अटल का शरीर अंतिम यात्रा पर गया है, उनके विचार देश के हर कोने में हर समय जिंदा रहेगी। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप्प, यू-ट्यूब के जरिए लोग गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। देश के युवा, शिक्षक, व्यवसायी, महिलाएं, राजनेता सहित सभी तरह के वर्ग उनकी तस्वीरों के साथ कुछ कविता, पंक्तियां, वीडियो आदि द्वारा श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

हर कोई अपने अंदाज से उन्हें अपने दिलों में जिंदा रखने की कोशिश कर रहा हैं। सोशल साइट्स के जरिए लोग कई तरह के हैज टैग द्वारा उन्हें हमेशा अपनी स्मृति पटल में रखने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिज्ञ, साहित्यकार, विद्वान आदि के नाम से प्रचलित अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी कविता हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा को सोशल साइट्स पर काफी स्थान दिया जा रहा हैं।

कुछ लोगों के साथ उनकी यादें इस प्रकार जुड़ी हुई है कि वे अभी तक इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो चुका है। सोशल साइट्स के जरिए जेडी विमेंस कॉलेज की जदयू उपाध्यक्ष सोनी तिवारी अपने दादा के साथ अटल बिहारी वाजपेयी की दोस्ती को साझा करती हैं। वे लिखती हैं कि सन 1982 में जब अटल बिहारी वाजपेयी बक्सर का दौरा किए थे।

तब वे सोनी के दादा देवदयाल तिवारी के घर ठहरे थे। इसी लेख में सोनी अपने पिता गोपाल जी तिवारी तथा अटल जी के साथ हुई बातचीत को लिखती हैं कि जैसे ही पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के सामने खाने की थाली रखी गई वैसे ही अटल जी ने कहा, मुझे पतली रोटी नहीं चित्ती मारी हुई रोटी खानी है। उस समय तंदूर का व्यवस्था नहीं हुआ करता था।

फिर भी मोटी रोटी का प्रबंध हुआ। खाना खाने के बाद कई तरह के वार्तालाप हुए थे। घंटों बातचीत हुई। सोनी लिखती हैं कि इस दौरान दादा जी तथा अटल जी के बीच काफी अच्छी दोस्ती हो गई और ये दोस्ती का रिश्ता दादा जी के गुजर जाने के बाद पिता के साथ भी बरकरार रहीं।

अच्छे कवि अच्छे वक्ता के साथ हीं हार शब्द को न मानने वाले राजनीति के महानायक के रुप में प्रसिद्ध पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन से देश के चारो तरफ शोक की लहर हैं। जिसने देश को शिक्षित और गरीबी से मुक्त करने का संकल्प लिया। देश के नागरिकों से किए हुए हर वचन को बहुत ही कम समय में पूरा किया।

जिन्होंने देश को अपने बदौलत कई उपहार देकर सुन्दर और विकासशील बनाया, ऐसे महान व्यक्ति का देश को अलविदा कहना राजनीति जगत के साथ ही देश के लिए एक विचार की क्षति हुई। अटल जैसे महान वचनबद्ध नायक को देश युग-युग तक याद रखेगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए उन तक न पहुंच पाने वाले लोगों की भी लंबी लाई सोशल मीडिया पर देखने का मिल रही हैं।

कई लोग अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लिख रहे हैं कि अटल का देश को अलविदा देश के नागरिकों के लिए मानवीय सम्मान के घटने के बराबर है। उनका देशवासी होना जनता और देश दोनों के लिए गर्व की बात थी जो सदा बनी रहेगी। वहीं कुछ प्रशंसक तो ऐसे भी हैं जो पिछले 22 घंटों से सोशल मीडिया के अपनी आवाज को उन तक पहुंचाने के लिए।

लाइव होकर दुख व्यतीत कर रहें हैं। इस दौरान वह रो भी रहें हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में उनके चाहने वालों के आंसू यह साफ कह रहें हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे व्यक्ति थे जो देश के हर एक व्यक्ति के दिलों में अपनी जगह बना चुके थे। जिनके जाने से लोगों बेहद दुख है। सोशल मीडिया का कोई भी ऐसा साइट नहीं जिसपर उनके चाहने वालों की कतार न हो जो भी जैसा भी हो सब अपने-अपने शब्दों में उनके प्रति अपनी संवेदना बयां कर रहें हैं।

एक व्यक्ति ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि अपने शब्दों को नया रंग देने वाले कवि और देश के राजनीति पन्नों में मशहूर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शरीर आजीवन गहरी नींद को प्राप्त हो सकता है लेकिन वह कभी लोगों के लिए नही मर सकते हैं। उनकी याद हमेशा उनके स्वस्थ्य होने का इंतजार करेगी। देश की राजनीति हो या लोगों के दिल का मंदिर उसमें सदा उनको सम्मान दिया जाएगा। साथ हीं उनके काम करने की जिज्ञासा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।