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अपनी पढ़ाई के लिए नहीं थे दो सौ रुपये, आज दे रहें दो हजार बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा

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सात वर्षो से नि:शुल्क शिक्षा के साथ सामाजिक कार्यों में जुटे हैं ललित किशोर कुमार…

गरीब बच्चों को शिक्षा के साथ साथ जरूरतमंद में बांट रहे कंबल…

देश भर के गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देना ही है जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है…

Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा

जनमंच विशेष। बिहार के बांका में आज की भागम-भाग जिन्दगी में किसी को किसी के लिए किसी के पास एक वक्त की समय नहीं है। बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रूपया हो गया है, ऐसे में कोई सख्स यदि लोगों की आवश्यकता को देखते हुए सेवा भाव की भावना को अपना मिशन बना ले तो समाज में बदलाव की एक उम्मीद प्रकाश की भांति चमकती है। गरीबों का सहारा बन कर ललित किशोर कुमार सामाजिक जगत में इतिहास बना रहे हैं।

शिक्षा प्राप्त करने के साथ सामाजिक सेवा की भावना को जुनून बना लेना कोई ललित किशोर कुमार से सीखें। क्योंकि महज 21 वर्ष की उम्र में मास्टर डिग्री की पढ़ाई करके भी जिन तन्मयता से समाज सेवा कर रहे हैं वो आज विरले ही देखने को मिलता है। इनके सेवा भाव का कार्य क्षेत्र किसी खास जगह सीमित न होकर हर जिले, हर अंचल में फैलकर हर वर्ग, हर जाति, हर स्तर के गरीबों के दु:ख दर्द को दूर करने मे लगे हुए है।

विडियो में देखें…

जिस तरह स्थिर आकाश नहीं है। उसी तरह इनकी सेवा भावना की अनन्त विस्तार है। लोक जीवन में सेवा प्रदाता के रूप में इनकी पहचान स्थापित हुई है। जिनसे प्रभावित होकर इनके प्रशंसकों का निरंतर विस्तार होते जा रहा है।

ललित किशोर कुमार में सेवा करने की भावना इस कदर रच बस गयी है कि उनकी सेवा भावना के मिशन के पैमाने को निश्चित नहीं किया जा सकता।

जिले में दर्जनों की संख्या में स्वंय सेवी संस्थाएं व संगठन काम कर रही है। जो, सरकार के साथ मिलकर समाज सेवा करती है। लेकिन बीना किसी फंड या सरकारी सहयोग के अपने जीवन में आई मुश्किलों से प्रेरित होकर काम करने वाले ललित किशोर कुमार समाज में नई सिख दे रहे हैं। समाज के पीछड़े व आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देकर उनके सपनों में रंग भर रहे हैं। शहर के जगतपुर प्राथमिक विद्यालय में वे हर रोज दसवीं के छात्रों को नि:शुल्क कोचिंग करा रहे हैं। जहां आसपास के दर्जनों गांवों के छात्र-छात्राएं सात से दस किमी की दूरी साइकिल से तय कर पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं।

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File Photo: ललित कुमार बच्चों को पढ़ाते हुए…

इसके अलावे ललित समाज में गरीब व पिछड़ों को कंबल बांटने के साथ ग्रामीण बच्चों को कलम, कॉपी व किताब भी मुहैय्या करा रहे हैं। समाज के बीच समाज के लोगों से ही सहयोग लेकर गरीब तबके के लोगों में शिक्षा, सेवा के साथ जागरूकता का भी काम कर रहे हैं।

इनमें ललित ने जलाए शिक्षा व स्वाभिमान के दीप….

मूल रूप से अपने ननिहाल सीतामढ़ी में रहकर अपनी प्रारंभिक व उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले ललित किशोर कुमार अब तक बांका ही नहीं सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीवान, चंपारण, कटिहार सहित अन्य स्थानों पर अंधेरी बस्ती में शिक्षा का दीप जला चुके हैं। इन क्षेत्रों में दो हजार से अधिक बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, 300 गरीब परिवारों को मुफ्त कपड़ा, सात हजार से अधिक गरीब बच्चों को कलम, कॉपी, किताब देने में वे सफल रहे हैं।

वर्तमान में बांका के लगभग सौ से अधिक वैसे गरीब बच्चे जो किसी कोचिंग संस्थान में फी देकर ट्यूशन नहीं ले सकते हैं। उन्हें निःशुल्क कोचिंग दे रहे हैं। जो, क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है। इनके इसी सोच से प्रेरित होकर यहां के भी दर्जनों युवा अब उनके साथ जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, नारी उत्थान, दलित-महादलित उत्थान तथा अल्पसंख्यक समुदाय सहित अन्य क्षेत्रों में समाज सेवा के कार्यो में विगत सात सालों से लगे हैं।

कैसे मिली प्रेरणा…

सीतामढ़ी अपने ननिहाल में बचपन बिताने के बाद जब वे माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति दैनिय हालात होने के कारण वे कोचिंग का फीस जमा नहीं कर पा रहे थे। इसके चलते उन्हें कोचिंग से निकाल दिया गया था। जिसके बाद ललित ने कोचिंग के शिक्षक के घर का काम काज करने के बदले उनसे शिक्षा ग्रहण किया।

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File Photo: ललित कुमार

उस दौरान उनकी माँ जहां मजदूरी करती थी, पिता चलितर राम छोटी-छोटी झुग्गी, झोपड़ी बनाने का काम। लिहाजा घर की आर्थिक स्थिति इतनी दैनिय थी कि ललित किशोर कुमार 50 रूपये से बच्चों को ट्यूशन पढ़कर अपनी पढ़ाई जारी रखा। इनकी जिन्दगी में इतनी कष्ट काटने के बाद ललित ने संकल्प लिया कि मैं पढ़-लिखकर सिर्फ गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देंगे और आज अपना घर परिवार को भी छोड़कर समाज सेवा जुटे हैं।

अपनी जिन्दगी की दर्द भरी कहानी बताते-बताते ललित किशोर कुमार के आँख से आँसु छलक गए और उन्होंने बताया कि आज के इस युग में सभी युवा और लोग पढ़-लिख कर नौकरी या अच्छी सी जिन्दगी जीना चाहते हैं लेकिन मैं अकेले ही सब गरीब, कमजोर, निर्धन, बेसहारा, पीड़ित तथा जरूरतमंद बच्चों और लोगों को हमेशा मदद करने के लिए बन गए। ललित किशोर कुमार के पास इतना पैसा भी नहीं था कि उच्च शिक्षा के लिए कोई बड़े शहर जा सके।

इन लोगों ने दिया भरपूर सहयोग….

मोहन यादव, श्रवण कुमार गुप्ता, डब्ल्यू पासवान, लालू कुमार, संजीव कुमार ने भी पूरी तन -मन से सहयोग दिया। चाहे वो बच्चों के लिए मुफ्त में शिक्षा, काॅपी या पेन हो सभी में इन दोनों ने सहयोग दिया। अन्य लोगों में पूजा कुमारी सिंह, पल्लवी सलोनी, गुंजा पंडित, राज कुमार, नीरज कुमार, शिव कुमार दास।

संक्षिप्त परिचय लिलत कुमार के बारे में…

नाम- ललित किशोर कुमार
पिता- श्री चलितर राम
माता- श्रीमति जहरी देवी

शिक्षा:

मैट्रिक- श्री मथुरा उच्च विद्यालय सीतामढी
इंटर- श्री लक्ष्मी किशोरी महाविद्यालय सीतामढी
स्नातक (B.Sc(Math)- श्री ललित नारायण मिथिला महाविद्यालय दरभंगा
स्नाकोत्तर (M.Sc(Math)- श्री ललित नारायण मिथिला महाविद्यालय दरभंगा