अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पढ़ना शुरू किया, सीजेआई ने कहा- हमें श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए

80

New Delhi: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ शनिवार को सुबह 10:30 बजे फैसला पढ़ना शुरू किया। संविधान पीठ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े की याचिकाएं खारिज कर दीं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है। हालांकि, सीजेआई ने कहा कि अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए। अदालत ने 6 अगस्त से 16 अक्टूबर तक 40 दिन तक हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

संविधान पीठ का फैसला

  • चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- मीर बकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई। धर्मशास्त्र में प्रवेश करना अदालत के लिए उचित नहीं होगा।
  • चीफ जस्टिस ने कहा- हम सर्वसम्मति से फैसला सुना रहे हैं। इस अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए। अदालत को संतुलन बनाए रखना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विवादित जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर चिह्नित थी। शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे पर था। इसी को खारिज किया गया है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया। निर्मोही अखाड़े ने जन्मभूमि के प्रबंधन का अधिकार मांगा था।
  • चीफ जस्टिस ने कहा- विवादित ढांचा इस्लामिक मूल का ढांचा नहीं था। लेकिन आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं कहा था कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को ढहाया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना को और बल दे: मोदी 
फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था- अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।