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सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़े सुझाव की ओर कदम, केरल सरकार से नया कानून बनाने को कहा

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New Delhi: हाल ही में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बहुमत के फैसले ने इस मामले को सात न्यायाधीशों की वृहद पीठ को भेजने का निर्णय किया, जिसमें सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से संबंधित शीर्ष अदालत के 2018 के फैसले की पुनर्विचार की मांग की गई थी। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर को श्रद्धालुओं के 17 नवंबर को खोल दिया गया है और मंदिर में सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए हैं। इस बीच अब केरल के लिए स्थायी परामर्शदाताओं ने एएनआई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बातचीत के बारे में बताया।

केरल के लिए स्थायी सलाहकारों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर पर एक नए कानून को लाए जाने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हो सके तो सबरीमाला पर जल्द एक नए कानून को लाया जाए। कोर्ट ने सरकार को क़ानून लाने के लिए अगले साल जनवरी के तीसरे हफ्ते तक का वक्त दिया है। तब तक सुनवाई टाल दी गई है। आपको बता दें कि कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में केरल सरकार को सबरीमला मन्दिर के नया कानून लाने के लिए कहा था, लेकिन राज्य सरकार ने त्रावनकोर- कोचीन रिलीजियस इंस्टिट्यूशन एक्ट का ड्राफ्ट पेश कर दिया था।

हालांकि, यहां आपको बता दें कि बहुमत के फैसले ने समीक्षा याचिका को सात न्यायाधीशों की वृहद पीठ के लिए लंबित रखा है और 28 सितंबर 2018 के फैसले पर रोक नहीं लगाई गई है इसलिए सभी आयु वर्ग की लड़कियां और महिलाएं मंदिर में जाने की पात्र हैं।