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Teachers strike

शिक्षक और कर्मचारियों ने दिल्ली में पीपुल्स मार्च निकाल कर किया विरोध प्रदर्शन

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Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा

धौलपुर। शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ के नारे के साथ केन्द्र सरकार की शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी नीतियों के खिलाफ मंगलवार को हजारों की तादाद में शिक्षक, छात्र और अन्य कर्मचारियों ने दिल्ली में पीपुल्स मार्च निकाला कर जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया।

शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश संघर्ष समिति संयोजक यादवेंद्र शर्मा ने वताया कि मोदी सरकार के आने के बाद से शिक्षा पर हमले और बढ़ गए हैं। शिक्षा मद में कटौती, भगवाकरण और लोकतांत्रिक ढांचों पर हमला कर शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है।

सीट में कटौती, आरक्षण के साथ खिलवाड़ और सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों को दिए जा रहे फंड की लगातार कटौती से शिक्षण संस्थान बुरी स्थिति में पहुंच गए हैं। नई पेंशन योजना से कर्मचारियों को भारी नुकसान हो रहा है। दो करोड़ नौकरी के वादे के साथ सरकार बनाने के बाद यह सरकार सब भूल गई है और अब बेरोजगारी 45 साल के सबसे अधिक स्तर पर है। देश में आज भी 9 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं।

2018 में 6 से 14 आयु वर्ग के बीच केवल 3 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल गए हैं। यह देश में पहली बार हुआ है। जीडीपी का 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने के वादे के साथ सरकार बनाने के बाद भाजपा सरकार ने लगातार फंड में कटौती की है। यह खर्च 2014 -15 में 67 % के मुकाबले 2018 -19 में घटकर 45 % हो गया है।

सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा के नारे के बावजूद उच्च शिक्षा पर खर्चा पिछले पांच सालों में बजट के 1. 4 प्रतिशत पर ही रुका हुआ है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए आवंटित फंड का 56 % हिस्सा, इस सरकार ने विज्ञापनों पर खर्च किया है। स्किल इंडिया पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। 41. 3 लाख प्रशिक्षित लोगो में से मात्र 6. 15 लाख लोगो को नौकरी मिली है जो कुल 15 प्रतिशत ही है।

2018 तक भाजपा शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों ने स्कूलों को भी निजी हाथों में सौपने की पूरी कोशिश की थी।
यूजीसी ओर एआईसीटीई को हटाकर हीरा (HEERA) को लाने का प्रस्ताव रखकर सरकार ने उच्च शिक्षा की कमान और केंद्रीय करने की कोशिश की है।

इस सरकार के दौर में ही शैक्षणिक संस्थानों में 11.7 लाख पद रिक्त हैं। देश के अनेक विश्वविद्यालयों में कुल 48 % स्थान रिक्त हैं और इसकी एक बड़ी संख्या आरक्षित पदों की है।

बजट का 10 प्रतिशत और जीडीपी का 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने, शिक्षा का भगवाकरण बंद किये जाने। शिक्षा के संघीय ढांचे को बरक़रार रखे जाने एवं केन्द्र सरकार की शिक्षा, शिक्षक एवं छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ मंगलवार को हजारों की तादाद में शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्रों ने पीपुल्स मार्च निकाल कर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार के विरोध प्रदर्शन में शिक्षक संघ शेखावत के सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।