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जांच से बौखलाए तहसीलदार ने लगाया एसडीएम पर झूठा आरोप

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एसडीएम साहब मेरे से काजू, बादाम और रहने की व्यवस्था करने के लिए दबाब बनाते हैं…

महीने से चल रही है तहसीलदार की भूमाफियाओं से मिलीभगत की जांच…

गोविंददेव ट्रस्ट ने की थी तहसीलदार व भूमाफियों की मिलीभगत की शिकायत…

Shubham Tiwadi

शुभम तिवाड़ी

करौली। जिला मुख्यालय पर पतंजलि प्रोजेक्ट की चपेट में कई अधिकारी कर्मचारी वली का बकरा बऩ सकते हैं। आए दिन गोविंद देव जी मंदिर भूमि पर भू-माफियाओं की नजर पर पैनी वनी हुई।

इस मामले में मंदिर ट्रस्ट ने तहसीलदार के खिलाफ शिकायत की तहसीलदार की मिलीभगत से मंदिर जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। जिसकी जांच कलेक्टर ने SDM करौली को सौंपी लेकिन तेज तर्राट अफसर होने की वजह से तहसीलदार जी की दाड़ी में तिनका आ गया।

जांच के घेरे में आने की बजह से उन्होंने एसडीएम करौली पर जांच में गोलमाल करने का भी दबाब बनाया लेकिन एसडीएम रामावतार कुमावत ने तहसीलदार की एक भी नही मानी। तो आखिरकार तहसीलदार बोखला उठे और मन गढ़ंत कहानी बनाकर संभागीय आयुक्त व जिला कलेक्टर को एक पत्र भेजा जिसमें लिखा कि एसडीएम साहब मेरे से काजू बादाम और रहने की व्यवस्था करने के लिए दबाब बनाते हैं। जब इस मामले में तहसीलदार करौली गोपाल सिंह मीणा से मामले के बारे में जानकारी चाही तो कैमरे के सामने बोलने से मना कर दिया ओर कहा कि मीडिया वाले खबरों को उल्टा सीधा चला देते हैं इसलिए आप उच्च अधिकारियों से बात कीजिए।

इस मामले में अतिरिक्त जिलाकलेक्टर राजनारायण शर्मा से मामले के बारे में जानकारी की तो कहा कि मामला मेरे पास आया है मामले की जांच कर रहे हैं और आगे बोलने से मना कर दिया। जब इसकी जानकारी रामावतार कुमावत से की तो उन्होंने कहा कि मेरा ऐसा कोई भी मामला नहीं है। नाही मैने कुछ ऐसा बोला अगर बोला है तो कुछ सबूत बताएं। और कहा कि तहसीलदार गोपाल सिंह मीणा उसके खिलाफ गोविंद देव जी ट्रस्ट द्वारा भूमाफियों की मिलीभगत होने की शिकायत का मामला मेरे यहाँ चल रहा है।

उस मामले में राहत लेने के लिए इन्होंने कई बार मेरे पर दबाब भी बनाया की मामले को गोलमाल कर दी। मैंने कहा कि जो बाजिब होगा बही करूँगा क्योंकि ऐसे ही उच्च अधिकारियों के निर्देश हैं।