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सरपंच पर कार्रवाई, तो सचिव पर मेहरबानी का लगा आरोप

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। ग्राम पंचायतो मे हो रहे भ्रष्टाचार को दूर करने के लिये जिला पंचायत सीईओ द्वारा उठाए जा रहें कदम भेदभाव से परिपूर्ण रहते हैं। वे जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई तो करते है, लेकिन उनके अधीन काम करने वाले पंचायत सचिव, रोजगार सहायक उपयंत्री पर कार्रवाई करने से परहेज करते है।

उक्त बातें मड़वा सरपंच पर जिला पंचायत सीईओ द्वारा की गई कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए समाजसेवी संजय सिंह ने कहा है कि उन्होने कहा कि पंचायत का पूरा कार्य रोजगार संहायक और सचिव कर रहें है, तो निर्माण कार्य उपयंत्री की देखरेख में होता है। रिकार्ड संधारण का कार्य और रोजगार देने के लिये प्रस्ताव रोजगार सहांयक बनाता है।

ऐसे में किसी सरपंच को जो जनता से चुना गया होता है वो पूरा दोषी करार देना प्रशासनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाना है। बता दें, कि जिला पंचायत सीईओ ने सीधी जनपद के मड़वा गांम पंचायत के सरपंच श्यामसुंदर कुशवाहा को निर्मल भारत अभियान अंतर्गत शौचालय निर्माण में अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही स्वेछाचारिता एवं वित्तीय अनियमितता का दोषी बताते हुए धारा 40 भाग 1 की कार्रवाई करते हुए न केवल पद से पृथक ही नहीं किया बल्कि 6 साल के लिये अयोग्य घोषित कर निरर्हित कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि युवा समाज सेवी संजय सिंह चैहान, गणपति कोहार, दिलीप सिंह बरगाही, रामलखन सिंह, रघुनन्दन साहू, सुरेश साहू, रानी साहू, मटुका साहू, अमन सिंह चैहान, अनिल सिंह चैहान, संतोष कोल निवासी जोगीपुर सहित मड़वा गांव के अन्य ग्रामीणों द्वारा ग्राम पंचायत मडवा मे हुई अनियमितता व अमानत मे खयानत की शिकायती आवेदन दिया गया।

जिस पर जिला पंचायत के अधिकारियों ने जांच की गई और जांच मे लगाये गये आरोप सही पाया गया। जिस पर जिला पंचायत सीईओं ने सरपंच श्यामसुंदर कुशवाहा को नोटिस जारी किया गया। लेकिन रोजगार सहांयक सचिव और उपयंत्री एस डी ओ से पूंछना तक उचित नहीं माना।

वे सीधें सरपंच को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में दोसी व अवचार के दोषी सरपंच को मानते हुए लोक हित में पद में बने रहने में अवांछनीय मानते हुए पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत कार्रवाई करते हुए पद से पृथक किए जाने का आदेश जारी कर 6 वर्ष के लिए निरर्हित किया है।
ग्राम पंचायत मे हुए शासन के अमानत मे खयानत के लिये अकेले सरपंच को दोषी करार देना और पद से पृथक कर देना पंचायत के जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों का भेदभाव पूर्व पुराना रवैया रहा  है।

गांव के रामलखन सिंह ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के खण्ड 1 का हवाला देकर हटाया गया है। जबकि इसमें साफ तौर पर उल्लेखित किया गया है कि भारत के अखंडता ,संप्रभुता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हो, राज्य के समरसता भाईचारे की भावना को ठेस पहुंच रही हो, धर्म भाषा क्षेत्र जाती या वर्ग आधारित भेदों पर प्रभाव पड़ रहा हो।

ऐसे में प्रतिनिधि को हटा दिया जाना चाहिए। लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है, धनु राशि के अपव्यय की शिकायत पर उक्त धारा के तहत सरपंच मात्र को हटाना उचित नहीं है।