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पिछले हफ्ते ही इमारत का सर्वे किया गया था, तब ऊपरी मंजिलों पर ताला लगा था

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New Delhi: प्रशासनिक अधिकारियों ने पिछले सप्ताह ही अनाज मंडी स्थित चार मंजिला इमारत की अवैध निर्माण इकाइयों का सर्वे किया था। रविवार को आधिकारिक सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट में बताया गया कि ऊपरी मंजिलों पर ताला लगा था। इस वजह से पूरी इमारत का निरीक्षण नहीं हो पाया था। इससे पहले रविवार तड़के इसी इमारत में आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई थी।

सूत्र ने बताया कि अधिकारी ऊपरी मंजिल के सर्वेक्षण के लिए फिर से इमारत का दौरा करने गए थे। उन्होंने शोकॉज नोटिस भी जारी किया था। शुरुआती जांच से यह पता चला कि इमारत की दूसरी मंजिल पर शॉर्ट-सर्किट की वजह से आग लगी। यह भवन दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2006 के तहत है, जो अनधिकृत निर्माण को सील होने से बचाता है। दिल्ली के मास्टर प्लान के प्रावधानों के तहत नहीं पाए जाने पर इमारत को अधिकारियों द्वारा बंद कर दिया जाता है।

बचावकर्मी ग्रिल और जाली काटकर इमारत में गए

दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने बताया कि 600 वर्ग गज के क्षेत्र में फैले इस भवन में सिर्फ एक दरवाजा था। अग्निशमन विभाग के कर्मियों को फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए खिड़की की ग्रिल और जाली काटनी पड़ी। संकरी गलियों में एक बार में केवल एक गाड़ी भेजी जा सकती थी।

रेस्क्यू के दौरान 2 दमकलकर्मी को चोट लगी

अधिकारियों ने बताया कि आग बुझाने में करीब पांच घंटे लगे और 150 से ज्यादा दमकलकर्मी जुटे रहे। इमारत से 63 लोगों को निकाला गया। जबकि एक नाबालिग समेत 43 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने कहा कि बचाव कार्य करते समय दो दमकलकर्मियों को चोट लगी।

फैक्ट्री मालिक के पास फायर डिपार्टमेंट की एनओसी नहीं थी

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री मालिक के पास फायर डिपार्टमेंट की एनओसी नहीं थी। हादसे की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने हादसे को भयावह बताया। इससे पहले 13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में लगी आग में 59 लोगों की मौत हुई थी।

हिरासत में फैक्ट्री मालिक और मैनेजर
दिल्ली पुलिस ने फैक्ट्री मालिक रेहान और मैनेजर फुरकान को गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर 10 साल जेल की सजा हो सकती है।

संकरी गलियों की वजह से रेस्क्यू में देरी
अनाज मंडी घनी आबादी वाला इलाका है। यहां गलियां संकरी हैं। दमकल विभाग के अफसर सुनील चौधरी ने बताया कि संकरी गलियों की वजह से रेस्क्यू के लिए टीम को पहुंचने में देरी हुई। मौतों का आंकड़ा इस वजह से भी बढ़ गया। वहां स्कूल बैग, बॉटल बनाए जाते थे। प्लास्टिक मटेरियल होने की वजह से धुआं ज्यादा हुआ और दम घुटने से लोगों की जान गई। इस इलाके में ज्यादातर फैक्ट्रियों के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं है।