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बीजेपी की आदर्श गांव के विकास की कहानी, न पहुंची बिजली और न ही पानी!

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सामान्य गांव से भी बदतर है हालात, बिजली-पानी राशन शिक्षा रोजगार चिकित्सा सड़क तक को परेशानी
भाजपा सांसद रीती पाठक के गोद लिए गांवो के हाल
भोपाल। संसदीय क्षेत्र के गांव में आदर्श गांव बनाने के लिए सांसदों को गोद में लेकर विकास कार्य कराने के जिम्मेवारी सौंपी गई थी। 4 गांवों को गोद में लेना था लेकिन दुर्भाग्य है कि सीधी संसदीय क्षेत्र की सांसद अपने गोद वाले गावों को आदर्श बनाना तो दूर की बात मूलभूत सुविधाओं तक मुहैया नहीं करा पाईं, बल्कि मिले हुए बजट को अपने चहेते लोगों को काम की जिम्मेदारी देकर बट्टा लगाने में भी उनका योगदान कम नहीं रहा।

हद तो तब हो गई आदर्श गांव में नल जल योजना को लगाने के लिए जमीन में बिना पाइप लाइन बिछाए ही दिखाने के लिए पूरे गांव में एक जगह टोपी लगाकर उद्घाटन कर दिया है। सांसद के बाद वाले सभी गांवों की यही कहानी है जब वर्ष 2014 15 में ले गए करवाही गांव को आदर्श नहीं बनाया जा सका तो भला तीन अन्य गांवों को वह सुविधाएं मुहैया कैसे हो पाई होंगी।

इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गांव तक बिजली पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन भाजपा सांसद रीति पाठक का गोद लिया गांव करवाही आज भी अंधेरे में है। बच्चे चिमनी और लालटेन की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं। किसी बीमार को ईलाज कराना हो तो 30 किलोमीटर दूर सीधी जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद ने गांव के विकास में रुचि नहीं दिखाई। कुछ दिनों तक अफसरों दौड़-भाग करते रहे। सड़क, शांतिधाम और आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण हुआ। सांसद दौरे में करवाही के दूर से ही निकल जाती हैं।

स्कूल है, शिक्षक नहीं
करवाही में प्राथमिक पाठशाला है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि जो शिक्षक हैं वे देरी से आते हैं या फिर गप्पे लड़ाने में मशगूल रहते हैं। 10-12वीं की पढ़ाई के लिए बच्चों को पांच से 10 किमी. दूर का सफर करना पड़ता है। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई छूट जाती है, क्योंकि कोई भी अभिभावक अपनी बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजना चाहता है।

बिजली-पानी सबसे बड़ी समस्या
करवाही में बिजली और पानी सबसे बड़ी समस्या है। सांसद ने आश्वासन दिया था कि लोगों की प्यास बुझाने और सिंचाई के लिए पानी के इंतजाम किए जाएंगे, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। ग्रामीण तीन किलोमीटर दूर स्थित कुएं के भरोसे हैं। गांव में बिजली के खंभे तक नहीं। यहां आज भी चिमनी और लालटेन युग चल रहा है।

ओडीएफ गांव में नहीं शौचालय
ग्रामीण बताते हैं कि 2015 से 2018 के बीच हुए निर्माण कार्य की मजदूरी अभी तक नहीं मिली। आधे से ज्यादा लोगों को जॉब कार्ड का नहीं दिए। 2016 में ओडीएफ घोषित हो चुके गांव में शौचालय नहीं बने हैं।

न आइडी, न राशन
सुआदीन यादव ने बताया कि समग्र आइडी आज तक नहीं बनाई गई। इससे गरीबों को शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी सूची नहीं जारी की गई। पहली सूची में भी गांव के पात्र हितग्राहियों को दूर रखा गया। प्रसूति सहायता राशि का भुगतान भी नहीं किया जाता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यहां इलाज नहीं मिलता। ग्रामीणों को इलाज कराने के लिए ३० किमी. दूर सीधी जाना पड़ता है।
पौधरोपण की जाली व पौधे गायब

गांव में करीब ९.४६ लाख रुपए पौधरोपण पर खर्च हुए। पौधों की सुरक्षा के लिए जाली भी लगवाई गई। अब न पौधे हैं और ना जाली।

ये काम हुए

एक स्टेडियम का निर्माण हुआ है। आंगनबाड़ी भवन, शांतिधाम और सड़कें बनी हैं। मेड़ बंधान और कूप निर्माण भी कराए गए।

4500 आबादी
30 पीएम आवास
(22पूरे 8 अधूरे)
170 शौचालय

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