road

दंबगों की दबंगई से ग्रामीण है परेशान, अपने ही गांव में जाने के लिये नहीं मिल रहा सड़क मार्ग

269
Raghunandan Mehta

रघुनंदन कुमार मेहता

गिरिडीह। जिले के सरिया एसडीएम पवन कुमार मंडल के आदेश पर द्वारपहरी में पत्थर माईंस संचालकों द्वारा सड़क मार्ग को काटकर सौ फीट गहरी खाई बना देने को लेकर जांच कमेटी तो बना दिया गया। मगर ग्रामीणों को यह विश्वाश नहीं हो पा रहा है कि हम ग्रामीणों को अपने गांवों में प्रवेश करने के लिए सड़क मार्ग मिल पायेगा।

क्यों कि जिस सड़क मार्ग को पत्थर संचालकों द्वारा खोदकर गहरी खाई बनाया गया हैं। उस सड़क मार्ग को माईंस संचालकों द्वारा कभी सड़क मार्ग की मान्यता नहीं दिया गया। जिसका परिणाम हैं कि हर समय ग्रामीणों के विरोध को मांईस संचालकों द्वारा दबाने का हर संभव प्रयास किया जाता रहा हैं। जिसके कारण ग्रामीण चाह कर भी सड़क मार्ग की कटाई पर रोक नहीं लगा पाए। 

मालूम हो कि द्वारपहरी से गुरहा नदी तक वर्ष 2008/09 में योजना संख्या 29 के तहत मनरेगा योजना से  13 लाख तीन हजार छः सौ रूपये की लागत से मिट्टी मोरम से सड़क निर्माण की स्वीकृती मिली थी। जिसके तहत सडक मार्ग में जगह जगह पर चार पुलिया का भी निर्माण कराया गया था।

वहीं 1991 में भी कटुटांड से द्वारपहरी तक मिट्टी मोरम से सड़क का निर्माण कराया गया था । बावजूद माइंस संचालक हमेशा से सड़क को मानने से इंकार करते रहे।  जिसका परिणाम हैं कि आज यह सड़क मार्ग राहगीरों समेत जानवरों के लिए मौत की खाई बना हुआ हैं। 

माईंस संचालकों द्वारा वर्षों से निर्मित सडक मार्ग को खोदकर खाई बना दिया गया हैं। शुरूआती दौर में हीं हम ग्रामीणों ने उपायुक्त महोदय गिरिडीह से लेकर खनन विभाग को आवेदन देकर माईंस संचालकों से सड़क मार्ग को बचाने का गुहार लगाया था। लेकिन किसी तरह का पहल नहीं किया गया। जिसके कारण आज लोगों को गाँव आने के लिए वन विभाग के जमीन पर पगडंडी के सहारे आना जाना पड़ता हैं। उसपर भी वन विभाग द्वारा रोक लगा दिया जाता हैं।

यह सड़क मार्ग सिर्फ कटुटांड गांव के लिए नहीं बल्की गुरहा, दुधियानों, चचघरा, किसनीटाँड, मोहनोडीह यादि गांव को द्वारपहरी मुख्य बाजार से जोड़ने का एक मात्र सडक मार्ग था। जिसे पत्थर खद्धान के मालिकों द्वारा अपनी लाभ के लिए सड़क मार्ग को खोदकर माइंस बना दिया हैं। जिसके कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं।

इस बार पदाधिकारीयों द्वारा सड़क मार्ग की जांच तो की जा रही हैं क्या पता हमलोगों को सडक मार्ग मिल पाऐगा भी या गांव छोड़कर दुसरे जगह जाना पड़ेगा।

माइंस संचालकों ने सड़क के साथ गांव के सोनाराम आहार को भी नहीं छोड़ा हैं। जिस समय माइंस संचालकों द्वारा सडक मार्ग की खुदाई की जा रही थी।लोगों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन संचालकों ने पैसे के बल पर लोगों को बिरनी पुलिस में झुठा कम्पलेन दर्ज कर परेशान किया जाने लगा। जिसकी शिकायत पदाधिकारीऔं से भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुआ। बाध्य होकर लोगों ने किस्मत का खेल समझ कर छोड़ दिया ।

सड़क की मांग को लेकर कई बार माईंस संचालकों व ग्रामीणों के बीच समझौता किया गया था। लेकिन संचालकों द्वारा उस पर पहल नहीं किया गया। लगभग दो वर्ष पूर्व राजनितीक पार्टी भाकपा माले के मुस्तकिम अंसारी, जिप सदस्य आसमा खातुन समेत सैकडों माले के कार्यकर्ता के सामने संचालकों ने आश्वासन दिया था की छः माह के अंदर वन विभाग से जमीन का सैटल कर सड़क बना दिया जाएगा। लेकिन अब तक सड़क नहीं बन पाया हैं।

सड़क मार्ग नहीं रहने के कारण चार पहिया वाहन तो दूर दो पहिया वाहन का प्रवेश करना भी मुश्किल हो गया हैं। सप्ताह दिन पूर्व गांव में एक डिलवरी पैसेंट को गिरिडीह ले जाना था। सड़क मार्ग नहीं रहने के कारण खाट पर टांग कर द्वारपहरी ले जाना पडा था। जब उनसे पूछा गया की आप तो गांव का बुजूर्ग व्यक्ति हैं।

गांव के लिए कब कब सड़क बना था । तो उन्होंने बताया कि सबसे पहले 1991 में मिट्टी मोरम से सड़क का निर्माण किया गया था। जिसका संवेदक किशुन पांडेय नाम का आदमी था। उसके बाद 2008/09 में मनरेगा से यह सड़क का निर्माण कराया गया था।

इस माइंस के कारण सड़क तो खत्म हो गया गांव में पानी की भी घोर समस्या हैं। जिसके कारण लोग जिंदा रहते हुए भी मौत की जिंदगी गुजारने को विवश हैं। माइंस संचालक इतने दबंग प्रवृती के लोग हैं कि कुछ भी बोलने पर झुटे मुकदमें में फसांने का धमकी देता हैं। अखबार में खबर छपने के बाद एसडीएम सरिया द्वारा माईंस की जांच का आदेश तो दिया गया हैं। लेकिन लगता नहीं हैं की पदाधिकारी सही तरह से जांच कर लोगों को सडक उपलब्ध कराएंगे। क्योकि जांच के दौरान वहां किसी भी ग्रामीणों को पदाधिकारी स्थल पर नहीं जाने दे रहे थे।

गांव में लोग अधिकतर किसान लोग हैं। गांव की अधिकांशतः बच्चे द्वारपहरी पढ़ने के लिए जाते हैं लेकिन सड़क मार्ग को काटकर मांइस बना दिऐ जाने के कारण अधिकतर बच्चे विद्यालय नहीं जाना चाहता हैं। यहां तक कि माइंस की गहराई अधिक हो जाने के कारण पालतू जानवरों पर खतरा बना रहता हैं। यह कोई भी अनुमान लगा सकता है कि जिस गांव में पहुँचने के लिए सड़क नहीं हो तो उसमें  ग्रामीणों पर क्या गुजरती होगी।

गांव में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा लगभग चालिस वर्ष पूर्व गांव में सोनाराम आहार का निर्माण किया गया था। जिससे द्वारपहरी बासोडीह, बेहरवाटांड गांव के लगभग दो सौ हेक्टेयर जमीन पर सालों भर खेती हुआ करता था। लेकिन माइंस संचालकों ने आहार तो नष्ट कर हीं दिया। गांव के सड़क मार्ग को भी काटकर गांव को सड़क विहिन बना दिया हैं जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गयी हैं।

देखें विडियो-