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प्रसव पीड़ित महिला को एम्बुलेंस न मिलने पर ठेले से ले जाने को मजबूर दिखे परिजन

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Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती। अगर किसी की तबीयत खराब हो जाए तो किसी को कुछ भी नहीं सूझता। बस एक ही उद्देश्य रहता है कि किसी तरह से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाए। जिसके लिए पीड़ित 108 नम्बर पर फोन करता है।

प्रसव पीड़ित महिला को एम्बुलेम्स न मिलने पर ठेले से ले जाने को मजबूर दिखे परिजन। 108 पर परिजन फोन लगाते रहे, लेकिन नसीब नहीं हुआ एम्बुलेंस। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जच्चा बच्चा की जान भी जा सकती थी।

कुछ इसी तरह की घटना श्रावस्ती जिले के गिलौला CHC में देखने को मिला। जहां मनसुखा गांव की गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। तभी परिजन एम्बुलेंस को फोन करते रहे। लेकिन एम्बुलेंस नही मिल पाई और मजबूरन परिजन महिला को ठेले पर लाद कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला ने बच्चे को जन्म दिया।

अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने महिला को मात्र नौ घण्टे के अंदर डिस्चार्ज कर दिया, जबकि प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल में 72 घण्टे रखने का आदेश है।

वहीं डिस्चार्ज के बाद भी अस्पताल प्रसासन ने एम्बुलेंस नही मुहैया कराया, जिस पर मजबूरन परिजन ठेले पर जच्चा बच्चा को ले जाने को मजबूर हो गए। स्वास्थ्य कर्मियों की इस बड़ी लापरवाही से जच्चा बच्चा की जान भी जा सकती थी।

जब इस बारे में जिलाधिकारी दीपक मीणा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आया है। जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी।