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बुजुर्गों से है युवाओं को सीखने की जरूरत: जितेन्द्र कुमार झा

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Lalit Kishor

ललित किशोर कुमार

बांका। हिन्दुस्तान बांका के ब्यूरो चीफ श्री जितेन्द्र कुमार झा व कांग्रेस नगर अध्यक्ष दिवाकर यादव और नीकेश कुमार सिंह महान स्वतंत्रता सेनानी प्रयाग बाबा से मिलने अपनी मातृभूमि पकरिया पहुंचे।

नीकेश कुमार सिंह ने बताया कि पोता का बाबा से मिलन वो भी अनुशासित मित्र के साथ किया महत्व रखता है। यह बैठे वहां के गणमान्य के लिये सोचनीय विषय रहा। 1932-34 के दमन-ए-कोह जोन के अंग्रेज कलक्टर प्लीडो की कहानी 1935 के अधिनियम, 1937 के चुनाव,क्रिप्स मिशन, केबिनेट मिशन, अंतरिम सरकार, भारत छोड़ो आन्दोलन, राजेन्द्र बाबू की खोजरी पहाड़ की 1946 का बैठक, जवाहर लाल नेहरू का गाजीपुर में भड़के दंगा के बाद का दौरा और गांधी नेहरू विचारधारा तथा आज की राजनीति की चर्चा ने एक नयी सीख प्रदान की।

105 बसन्त देख चुके प्रयाग बाबा से मैंने जब उनके  बुढ़ापे के बारे में प्रभारी महोदय के इशारे पर पूछा तो उन्होंने कहा बुढ़ापा तूफान में उड़ रहे एक विमान की तरह है। एक बार आप बैठ गए तो फिर कुछ नहीं कर सकते इसलिये। जबतक किसी को खुद का और अपने काम का साथ मिल रहा है वो बुढा नहीं महसूस कर सकता, चाहे उसकी उम्र कितनी भी क्यों न हो?

लेकिन, एक बात कहूंगा बेटा निकेश जो हकीकत है। वहीं मौके पर उपस्थित ब्यूरो चीफ श्री जितेन्द्र कुमार झा ने बताया कि बुढ़ापे की उम्र में भी कुछ न कुछ हमलोगों को सीखने और समझने की जरूरत होती है।