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चीन ने कहा- हॉन्गकॉन्ग के संवैधानिक मामलों पर वहां के कोर्ट नहीं, सिर्फ हमारा अधिकार

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Beijing: चीन ने हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता पर एक बार फिर हमला बोला है। जिनपिंग सरकार ने मंगलवार को कहा कि हॉन्गकॉन्ग के संवैधानिक मामलों में बदलाव का अधिकार सिर्फ हमारा है। हाल ही में हॉन्गकॉन्ग के हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के मास्क पहनने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया। कोर्ट ने कहा था कि औपनिवेशिक काल का यह कानून असंवैधानिक है। इस कानून को रद्द करने के बाद हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शनकारी मास्क पहनने की आजादी मिल गई। इसी पर चीन ने नाराजगी जताई। उसने कहा है कि हॉन्गकॉन्ग के संवैधानिक मामलों पर वहां के कोर्ट को निर्णय लेने का हक नहीं है।

चीन समर्थित नेता ने लागू किया था मास्क पहनने पर प्रतिबंध
हाॅन्गकॉन्ग में पिछले 5 महीने से प्रदर्शन जारी हैं। लोगों की मांग है कि उन्हें चीन से अलग लोकतंत्र बनाया जाए। प्रदर्शनों से जुड़े ज्यादातर छात्र और युवा मास्क पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले महीने चीन समर्थित एक नेता ने 50 साल पुराने कानून को दोबारा लागू किया था। इसके तहत प्रदर्शनकारियों के मास्क पहनने पर बैन लग गया था। इसके बाद युवा बड़ी संख्या में कानून का विरोध करने के लिए मास्क पहनकर सड़कों पर उतरने लगे।

कोई संस्थान हॉन्गकॉन्ग के संविधान पर फैसला नहीं ले सकता

हॉन्गकॉन्ग के हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के मास्क पहनने पर लगे बैन को हटा दिया था। हालांकि, चीन का कहना है कि हॉन्गकॉन्ग की अदालत ने अपने दायरे से ज्यादा आगे निकल कर फैसला सुनाया है। चीन के संसदीय मामलों के प्रवक्ता जांग तिएवी ने कहा कि सिर्फ संसद ही यह फैसला कर सकती है कि संविधान के कौन से कानून हॉन्गकॉन्ग के आधारभूत कानून होंगे। इसके अलावा कोई भी संस्थान संविधान से जुड़े फैसले नहीं कर सकते।

कोर्ट के फैसले पर कार्रवाई कर सकती है संसद
जांग ने आगे कहा, “हाईकोर्ट के इस फैसले ने हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम और शहर की सरकार को कमजोर किया है।” उन्होंने कहा कि संसद कोर्ट के फैसले पर कार्रवाई के बारे में विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बारे में अफसरों से राय ली जा रही है।’’