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यह गोदी मीडिया है, जरा बच के!

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जब सत्ता की ताकत के सामने सवाल कमजोर पड़ जाए, तो समझो चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता समाप्त हो गई…

Hariom Kumar

हरिओम कुमार के विचार

विचार। भारत की मौजूदा राजनीति को देखते हुए भारत के आम नागरिकों को सभी न्यूज़ चैनल को देखना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि इस देश में कोई गद्दारी कर रहा है या देशहितों के खिलाफ काम कर रहा है, तो वह है हमारे न्यूज़ चैनल।

क्योंकि इसके पीछे कुछ मुख्य कारण है जो आम नागरिकों को सोचने पर मजबूर करती, ये कारण हमें झकझोर देती है।

कुछ बातें हमें निष्पक्ष रूप से सोचना चाहिए जैसे:-

14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले को लेकर किसी न्यूज़ चैनल ने सरकार से सवाल जवाब नहीं किया, सवाल बहुत सारे हैं जैसे:- आखिर 300 से अधिक किलोग्राम के विस्फोटक लेकर वह आतंकवादी हमारे सैनिकों के पास पहुंचा कैसे?
जब तक मीडिया सवाल नहीं करेगा, तब तक सरकार पर दबाव नहीं आएगा। क्या मीडिया द्वारा सवाल उठाना कोई गुनाह है?
मीडिया को इसलिए भी यह सवाल करना चाहिए, क्योंकि मामला राजनीति का नहीं, बल्कि हमारे वीरों का है हमारे शहीदों के शहादत का है।

ध्यान दें जब हमारे इंटेलिजेंस एजेंसी यह पता कर सकती है कि बालाकोट में हमारे स्ट्राइक से पहले वहां 300 मोबाइल फोन एक्टिव थे, तो यह सवाल उठता है कि वो आतंकवादी 300 से अधिक किलोग्राम के विस्फोटक लेकर पुलवामा में हमारे सैनिकों तक पहुंचा कैसे? तब इंटेलिजेंस एजेंसी को सूचना पहले क्यों नहीं मिली?

आखिर हमारे न्यूज़ चैनल ये सवाल क्यों नहीं उठा रहे हैं कि पुलवामा में हमारे सैनिकों को आम बसों में क्यों भेजा गया था?
खराब मौसम की वजह से सैनिकों की मांग थी कि एयर लिफ्ट के माध्यम से उन्हें भेजा जाए। लेकिन, जब आतंकी हमला होता है हमारे जवान शहीद होते हैं, तब सरकार फैसला करती है कि अब जवानों को एयर लिफ्ट के माध्यम से भेजा जाएगा। शर्म आनी चाहिए ऐसी मीडिया पर जो इन मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा नहीं किया।

एयर स्ट्राइक को सरकार अपनी उपलब्धियों में गिना रही है, जबकि उन्हें सोचना चाहिए कि हमारी सेना भारतीय जनता पार्टी की सेना नहीं है बल्कि भारत का सेना है, वह भारतीय सेना है।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा था कि हमारे सैनिकों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी, क्योंकि इस बार केंद्र में कांग्रेस की नहीं बल्कि बीजेपी की सरकार है, आखिर इन बातों पर किसी मीडिया ने सरकार से सवाल क्यों नहीं किया कि सैनिकों पर राजनीति क्यों?

जरा सोचिए इस देश में बड़ा क्या है, हमारे सैनिक या उनकी शहादत या राजनेता?

कन्याकुमारी में एक सभा के दौरान हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी कहते हैं कि “अभिनंदन तमिलनाडु का रहने वाला है।” यह बात अगर आप सच्चे भारतीय हैं तो आपको जरूर चुभेगी। यहां भी सवाल उठता है कि हमारी मीडिया ने सरकार से इन मुद्दों पर सवाल क्यों नहीं किया?

खैर यह भी सच है कि अगर कोई भी सवाल उठाता है या सरकार से कुछ पूछता है तो माहौल ऐसा पैदा हो गया है कि उसे जलील किया जाता है या उसे देशद्रोही कहा जाता है।

इतना तो तय है कि पत्रकारों की अभिव्यक्ति कमजोर होती जा रही है। किसी ने किसी परिपेक्ष में मीडिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ी हो रही है।

आखिर कलम की ताकत कमजोर क्यों पड़ रही है?
कलम पकड़ा हांथ कांप क्यों रहा है??

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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