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गिलगित, बाल्टिस्तान समेत पूरा कश्मीर हमारा: सुषमा स्वराज

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शबाब ख़ान,

दिल्ली: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को कहा कि गिलगित, बाल्टिस्तान को पांचवा प्रांत बनाने के पाकिस्तान के कदम को भारत पूरी तरह से खारिज करता है और इस संकल्प को दोहराता है कि पीओके, गिलगित और बाल्टिस्तान समेत पूरा का पूरा कश्मीर भारत का है।

लोकसभा में एक सांसद द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर विदेश मंत्री ने अपने जवाब में यह बात कही। इसके पहले ब्रिटेन की संसद ने भी गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का संवैधानिक हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान द्वारा इसे अलग प्रांत घोषित करने के प्रस्ताव की निंदा की थी।

कश्मीर पर अमेरिका के दशकों पुराने रुख में आए बदलाव को भांपते हुए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि गुलाम कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान को लेकर भारत की सोंच में कतई बदलाव नही आया है और पाकिस्तान सहित इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बुधवार को वैसे तो लोकसभा में गिलगिट और बाल्टिस्तान को पाकिस्तान द्वारा अपना पूर्ण राज्य बनाने से जुड़े सवाल का जवाब दे रही थीं। लेकिन, उनके निशाने पर कहीं-न-कहीं अमेरिका भी था।

स्वराज ने कहा कि पूरा कश्मीर भारत का है। यह किसी को सोचना भी नहीं चाहिए कि भारत अपने किसी हिस्से को यूं ही जाने देगा। स्वराज ने कहा कि पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा है। यह न सिर्फ इस संसद की तरफ से पारित प्रस्ताव है, बल्कि भाजपा का संकल्प भी है। गिलगित और बाल्टिस्तान को पूर्ण राज्य बनाने की पाकिस्तान की कोशिशों के बारे में जिस दिन खबर आई, हमने बिना समय गंवाए उसे खारिज किया।

‘आज जिस पार्टी की सरकार है, उसका तो नारा ही रहा है-जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है। जो कश्मीर हमारा है, वो सारा का सारा है।’ विदेश मंत्री ने कहा कि संसद का संकल्प तो है ही और हम तो स्वयं के संकल्प से भी बंधे हुए हैं.

बुधवार को लोकसभा में बीजू जनता दल के सांसद भर्तृहरि महताब के सवाल का जबाव देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान का यह कदम किसी भी सूरत में भारत को स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, ‘सरकार समेत पूरा का पूरा सदन इस भावना से संबद्ध करता है कि पूरा का पूरा कश्मीर हमारा है।

सुषमा ने कहा कि कश्मीर के बारे में लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्ताव पारित है, संसद ने प्रस्ताव पारित किया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पूरा का पूरा कश्मीर हमारा है।

इससे पहले शून्यकाल के दौरान बीजेडी के सांसद महताब ने इस विषय को उठाते हुए कहा, ‘पाकिस्तान की सरकार ने गिलगित, बाल्टिस्तान को अपना पांचवां प्रांत घोषित किया है। कश्मीर, गिलगित, बाल्टिस्तान राजशाही क्षेत्र रहे थे। गिलगित और बाल्टिस्तान की व्यवस्था देखने वाले एक अंग्रेज अधिकारी ने पाकिस्तान को वहां फौज भेजने की अनुमति प्रदान की थी।’

उन्होंने आगे कहा, ‘इस क्षेत्र को भारत अपना हिस्सा मानता है। अब जबकि पाकिस्तान ने इसे पांचवां प्रांत घोषित किया है तब सरकार का इसपर क्या रुख है, क्योंकि हमें इतिहास नहीं भूलना चाहिए। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पूरा का पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा है. क्या सदन में कोई ऐसा संकल्प सरकार लायेगी?’

एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने कहा है कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म करने के लिए सक्रियता से बीच-बचाव करना चाहता है। इसका अर्थ यह लगाया जा रहा है कि कश्मीर पर अमेरिका मध्यस्थता करने की कोशिश में है। यह पिछले दो दशकों की अमेरिका की नीति के विपरीत है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर मंगलवार को ही बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है।

इसलिए अहम है बयान

स्वराज का बयान दो लिहाज से महत्वपूर्ण है। पहला यह कि पाकिस्तान कश्मीर मसले को लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर रहा है। दूसरा, अमेरिका की तरफ से इस बात के संकेत दिए गए हैं कि वह कश्मीर पर मध्यस्थता करने को तैयार है, जिसका भारत विरोध करता रहा है। ऐसे में सुषमा ने सभी को याद दिलाने की कोशिश की है कि भारत कश्मीर को सिर्फ अपने एक अंदरूनी हिस्से के तौर पर देखता है।

यहां से उठा था मामला

पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार में मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने पिछले महीने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान गिलगिट-बाल्टिस्तान को पांचवें प्रांत का दर्जा दे सकता है। अभी पाकिस्तान के चार प्रांत बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध हैं।

पाकिस्तानी खाली करे गुलाम कश्मीर को

इससे पहले भारत सरकार ने कहा है कि अगर पाकिस्तान और भारत के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर किसी तरह का विवाद है तो वह है गुलाम कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा। केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि भारत की यह मांग है कि पाकिस्तान इन इलाकों को खाली कर दे।

जितेन्द्र सिंह की यह तीखी प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आयी है जब पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कश्मीर विवाद पर प्रस्तावना का समर्थन करते हुए कहा कि यह कश्मीरियों की अपेक्षा के अनुरूप होना चाहिए। यानि, कश्मीर विवाद का समाधान वहां के लोगों के मुताबिक ही किया जाना चाहिए। बासित ने यह बात पाकिस्तान दिवस के मौके पर उच्चायोग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही।

संसद के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए जितेन्द्र सिंह ने कहा, “आज अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर को लेकर कोई विवाद है तो वह है सिर्फ पाकिस्तान की तरफ से पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर अवैध कब्जा। “उन्होंने आगे कहा, “उसे किस तरह पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त करा कर भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा बनाया जाए सिर्फ यही एक मुद्दा है।”

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस बारे में कई वर्षों से भारत की स्थिति बेहद स्पष्ट रही है और साल 1994 में संसद में एक प्रस्ताव पास किया गया था जिसका सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था। इससे पहले बासित ने कहा था कि कश्मीरियों की अपेक्षाओं को दबाया तो जा सकता है लेकिन उसे कुचला नहीं जा सकता है। बासित ने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि कश्मीरियों का आंदोलन जरूर सफल होगा।

कहां हैं गिलगिट-बाल्टिस्तान?

गिलगिट-बाल्टिस्तान गुलाम कश्मीर का स्वायत्तशासी क्षेत्र है। इसकी सीमा पश्चिम में खैबर-पख्तूनख्वा से, उत्तर में अफगानिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, और दक्षिण-पूर्व में जम्मू-कश्मीर राज्य से लगती है। इसका कुल क्षेत्रफल 72,971 वर्ग किमी और जनसंख्या लगभग 10 लाख है। इसका प्रशासनिक केंद्र गिलगिट शहर है।

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