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ट्रिपल तलाक बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष में मौखिक जूतमपैजार, राज्यसभा आज फिर स्थागित

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तृणमूल नेता डेरेक ओ’ब्रायन और बीजेपी नेत्री के बीच महिला सशक्तिकरण और ट्रिपल तलाक बिल पर तीखी नोकझोंक…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 



नई दिल्ली: राज्यसभा में विवादित ट्रिपल तलाक बिल के भाग्य का फैसला फिर नही हो सका। गुरूवार को सरकार और विपक्ष के बीच बहस कम और तीखी नोकझोंक का दृश्य था, इस तीखी नोकझोंक को अगर मौखिक घूँसेबाज़ी की संज्ञा दी जाए तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी।

तृणमूल कांग्रेस (तृणमूल) के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और भाजपा नेता स्मृति ईरानी के बीच ट्रिपल तलाक विधेयक पर झुंझलाहट, गुस्सा, कटाक्ष और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जो एक बार शुरु हुआ तो सदन के स्थागन के साथ ही खत्म हो पाया। विवादित ट्रिपल तलाक बिल के भाग्य का आज भी कोई फैसला नही हो पाया। विपक्ष जहाँ विधेयक को संसदीय समिति के पास रिव्यु के लिये भेजना चाहता है तो सत्तापक्ष इसके बिल्कुल खिलाफ है, वो समिति के पास बिल को इसलिए भेजना नही चाहता क्योकि केंद्र सरकार बिल से 3 साल के कारावास वाले प्रवाधान को संशोधित नही करना चाहती जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष का कहना है कि बिल से अपराधीकरण वाला प्रवाधान हटाया जाये।

चूंकि सरकार ने कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा के बिल को चयन समिति को रेफर करने के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, इसलिए आनंद शर्मा नें चयन समिति को मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2017 का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र ने जानबूझकर ट्रिपल तलाक विधेयक को फँसा दिया, जिससे यह खुलासा हो चुका है कि सत्तापक्ष महिला सशक्तिकरण के मामले मे उदासीन है।

“यह स्पष्ट है कि हम (विपक्षी) महिलाओं को सशक्त करना चाहता है, और आप (सरकार) नें इससे हाथ खींच लिए हैं क्योकि अाप बिल को महिला सशक्तिकरण के लिये नही बल्कि राजनीतिक फायदे के लिये लाये थे, यदि ऐसा नही होता तो बिल को चयन समिति के पास भेजनें में आपको क्या दिक्कत होती,” ओ’ब्रायन ने कहा।

ओ’ब्रायन के व्क्तव्य पर भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी ने ज्वलंत प्रतिक्रिया दिखाई, वो अपनी सीट से खड़ी हो गयीं और मांग की कि विपक्षी दलों को अपने विघटनकारी तरीके से बाज़ आना चाहिए और तीन तलाक विधेयक पर सर्वसम्मति-निर्णय के लिये चर्चा में शामिल होना चाहिए। ईरानी नें ओ’ब्रायन के अारोप पर झुंझलाहट भरी प्रक्रिया देते हुये कहा कि “बिल्कुल नहीं, यदि आप गंभीरता से महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं, तो अब चर्चा करें।”

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सुझाव दिया कि सरकार को इस विधेयक में एक प्रावधान शामिल करना चाहिए कि सरकार ट्रिपल तलाक की पीड़िता मुस्लिम महिलाओं और उनके बच्चों की वित्तीय जरूरतों का ध्यान रखेगी।

“हम बिल के पक्ष में हैं लेकिन हम पतियों के कारावास के प्रावधान का विरोध कर रहे हैं। परिवार की कौन देखभाल करेगा? बच्चों के खर्चों की देखभाल कौन करेगा … सरकार इस बारे में चिंतित नहीं है। सरकार को पीड़िता के मासिक खर्चों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए,” उन्होंने कहा।

एक और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सत्ता पर भाजपा को इस मामले पर बहस से दूर करने का आरोप लगाया। तिवारी ने बाद में संवाददाताओं से कहा, “भाजपा के पास न तो कोई नीति है और न ही संसद में ट्रिपल तलाक विधेयक पारित करने का उनका कोई इरादा है।”

डिप्टी चेयरमैन पी जे कुरियन ने हंगामा बढ़ता देख और पक्ष-विपक्ष को किसी निष्कर्श की ओर न जाता देखकर बीच में ही सदन को स्थागित कर दिया।

मुद्दे पर विपक्ष से कोई समझौता नहीं होता देख सरकार ने ट्रिपल तलाक बिल को प्राथमिकता सूची में सबसे नीचे कर दिया, जिसका विपक्ष ने जोरदार विरोध किया और मांग की कि एक चयन समिति को बिल को रेफर करके बिल को आगे बढ़ाया जाये।

सदन के नेता अरुण जेटली ने विपक्ष के प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिल को चयन समिति को भेजनें के लिए 24 घंटे की अग्रिम सूचना के वैधानिक आवश्यकता पूरी नहीं की गई थी। जिस पर विपक्ष के सदस्यों ने अपने विरोध प्रदर्शन को तेज कर दिया, जिस पर उपाध्यक्ष पी जे कुरियन ने हस्तक्षेप किया। जेटली की आपत्तियों को दूर कर कुरियन ने कहा कि प्रस्ताव को अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने अनुमति दी थी और उनके पास निर्णय बदलने की कोई शक्ति नहीं थी।

ट्रिपल तलाक बिल, जिसने राजनीतिक दलों को विभाजित किया, और कई मुस्लिम निकायों की आलोचना का सामना किया 28 दिसंबर को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। अब इसे राज्यसभा द्वारा कानून बनने के लिए पारित किया जाना है। लेकिन कांग्रेस, जो लोकसभा में बिल का समर्थन कर रही थी, बिल में कुछ बदलाव करना चाहती है – जैसे उन मुसलमान महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना जो तीन तलाक की पीड़िता हो।

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