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नहीं पास हुअा ट्रिपल तलाक बिल, हंगामे के बीच राज्यसभा स्थागित

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यह सुनिश्चित करना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है कि कानून के रुप में पारित होने से पहले किसी भी विधेयक की संसदीय समिति जांच करे: कांग्रेस नेता आनंद शर्मा

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

नई दिल्ली: केंद्र सरकार को आज राज्यसभा में संयुक्त विपक्ष का सामना ट्रिपल तलाक बिल के लेकर करना पड़ा, जिसे आज राज्यसभा में पेश किया गया था। जैसा ही आज केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने चर्चा के लिए मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2017 की शुरुआत की, ऊपरी सदन में हंगामा शुरू हो गया। सरकार, जो विधेयक पर डिबेट कर जल्द से जल्द इसकी मंजूरी सुनिश्चित करती चाहती है, विपक्ष के सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों से घिर गई।

मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बिल में प्रस्तावित कानून के अनुमोदन की तत्कालता को रेखांकित करने के लिए कहा, “लोक सभा में ट्रिपल तालाक विधेयक के पारित होने के बाद भी लोगों द्वारा तलाक देना जारी है, मुरादाबाद की एक महिला को दहेज के कारण तुरंत तालाक दिया गया है”। इस बीच, कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने एक नोटिस दिया कि आगे विचार करने के लिए ट्रिपल तलाक बिल को एक चयन समिति के पास भेजा जाए। सदन के नेता अरुण जेटली ने तीन तलाक विधेयक पर कांग्रेस द्वारा अपना रुख बदलने और इस पर विरोध प्रदर्शन करनें पर असंतोष व्यक्त किया।

“पूरे देश यह देख रहा है कि दूसरे सदन में आप बिल का फेवर करते हैं और इस सदन में आप बिल को पटरी से उतरने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष को ‘भारत को तोड़नें वालों’ के साथ हाथ नहीं मिलना चाहिए, जेटली ने कहा, जिसने विपक्षी दल के सदस्यों नें बेंच पर हंगामा किया।

वित्त मंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि “तलाक देने की यह पद्धिति पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित की जा चुकी है। तीन में से दो जजों नें तीन तलाक की पद्धिति को गलत करार देते हुये इस पर 6 महीने के लिये रोक लगायी थी जो कि 22 फरवरी को खत्म हो जाएगी। जजों नें कहा था कि हम इस पर 6 महीनें की रोक लगा रहे हैं ताकि संसद मे बैठी सभी पार्टियां आपसी सहमति से इसके खिलाफ एक कानून बनाकर पेश करें ताकि मुस्लिम महिलाओं को इस अमानवीय बर्ताव से आजादी मिल सके। इसलिए सरकार इस विधेयक पर तुरन्त मंजूरी चाहती है।”

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जेटली के दावे को खारिज कर दिया, उन्होने भाजपा नेता जेटली को याद दिलाया कि वो पूर्व सीजेआई जे एस खेहरा और न्यायमूर्ति अब्दुल नज़ीर द्वारा लिखित अल्पमत फैसले से उद्धृत कर रहे थे। 3: 2 बहुमत से ट्रिपल तालाक को असंवैधानिक घोषित किया गया था। “उन्होंने (अरुण जेटली) एससी के फैसले के बारे में कहा, मैं रिकॉर्ड को सही करना चाहता हूं क्योंकि मैं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से मामले में पेश हुआ था। उन्होंने कहा कि अल्पमत के फैसले के संदर्भ में यह सब कहा गया है,” सिब्बल ने उप-अध्यक्ष पी जे कुरियन को बताया, जो कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहा था।

विधेयक को रोकने के लिए विपक्ष की रणनीति को खारिज करने का प्रयास करते हुए जेटली ने कहा कि एक चयन समिति के लिए अवलोकन के लिए बिल भेजने का प्रस्ताव 24 घंटे पहले राज्यसभा में पेश नहीं किया गया था। इस पर, आनंद शर्मा ने कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने आरएस अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू से प्रस्ताव पर चर्चा के लिए मुलाकात की और उन्होंने अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए यह उनके संवैधानिक कर्तव्य है कि कानून के रूप में पारित होने से पहले किसी भी बिल में वैधानिक जांच होनी चाहिए। जिस पर कानून मंत्री अपनी सीट से खड़े हो गये और विपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाने लगे।

आनंद शर्मा ने कहा: “कानून मंत्री अब खुद कानून तोड़ रहें है।” उपाध्यक्ष पी जे कुरियन को सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्ष के बीच हो रही बहस को किसी ओर न जाते देख सदन को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सरकार अपने विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा में विपक्ष और अन्य गैर-एनडीए दलों पर निर्भर है क्योंकि लोकसभा के विपरीत इसमें सत्तारूढ़ दल का बहुमत नही है जो लोकसभा में था और वहाँ इस लिये बिल तुरन्त पास कर दिया गया था।

विवादास्पद ट्रिपल तालाक बिल, यदि अधिनियमित किया गया है, तो तीन तलाक को एक अपराध बनाया जाएगा। यह एक मुसलमान आदमी के लिए तीन साल की जेल की सजा का प्रवाधान देता है जो अपनी पत्नी को किसी भी तरह से चाहे बोलकर, लिखित या ई-मेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज कर तलाक दे देता है।

shabab@janmanchnews.com