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बाबा विरेंद्र देव दीक्षित के यूपी आश्रमों में भी भीषण छापेमारी, तहख़ानों से 33 महिलाएं बरामद

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Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

अागरा: रोहिणी, द्वारका और पालम के आश्रमों के बाद दीक्षित के यूपी के दो आश्रमों पर शनिवार को छापेमारी की कार्यवाही की गई। पुलिस टीम के सदस्य उस समय दंग रह गये जब उन्होने आश्रम के अन्दर गुप्त रुप से बनें तहख़ानों में जानवरों की तरह ठूँसकर रखी गई 33 महिलाओं और 12 पुरुषों को बरामद किया। ये दोनो आश्रम अध्यात्मिक ईश्वर्या विश्वविद्यालय से संबंधित हैं, जिन्हें देश के बाकी हिस्सो के आश्रमों की तरह ही कांपिल और फर्रुखाबाद में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित चलाता है जो फिलहाल फरार है।

दोनों आश्रमों से मिले महिलाओं और पुरुषों को मेडिकल जॉच के लिये भेज दिया गया है ताकि पता चल सके कि कहीं इन लोगों को नशीली दवाओं के प्रभाव मे तो नही रखा गया हैं। पुलिस के अनुसार आश्रमों में पाये गये सभी लोग व्यस्क हैं।

नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि, “आश्रम के रहने वालों को निकालने का अभियान सुबह लगभग 7 बजे से कांपिल के चौधरियन कॉलोनी और फर्रूखाबाद शहर के सिकत्तरबाग में शुरू हुआ। प्रतिरोध की अशंका के चलते भारी पुलिस बल को शामिल किया गया था। उम्रदराज महिलाओं नें (जिन्हें आश्रम में ‘बहन’ कहा जाता है) पहले लोहे के दरवाजे को खोलने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में उन्होंने पुलिस के दबाव में गेट खोल दिया और हमें अंदर आने दिया।”

“सिकत्तरबाग में आश्रम की तीन मंजिला इमारत में एक तहखाने में बनें भूल भुलैया की तरह कॉरिडोर के दोनो तरफ छोटे-छोटे अंधेरे चैंबर बनाये गये हैं, जिनकी छत इतनी नीची थी कि व्यक्ति को अपनें घुटनों पर चलना पड़ता होगा। चैंबर में असहनीय सीलन और बदबु थी। इन्ही चैंबरों में, इस ठंड में भी महिलाएं जमीन पर सो रही थी। ऊपरी कमरे भी इस तरह से बने थे कि लगता ही नही कि इन्हे इंसानों के रहने के लिए बनाया गया हो। इमारत के कमरों की खिड़कियॉ काफी ऊंचाई पर बनी हैं जिसमें लोहे की ग्रिल लगाया गया है।” पुलिस अधिकारी ने बताया।

पूनम (काल्पनिक नाम), कुशीनगर जिले की एक 25 वर्षीय निवासी, को सिकत्तरबाग आश्रम में पायी गयी है, उसने बताया, “मेरे माता-पिता ने पांच साल पहले मुझे यहॉ छोड़ दिया था और तब से मैं आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रही हूं।” जब उससे पूछा गया कि क्या उसको यहां रहने के दौरान किसी भी तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है तो उसने कोई जवाब नही दिया।

आश्रमों में मिली महिलाएं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और नेपाल से हैं। फर्रुखाबाद के पुलिस अधीक्षक, मृगेंद सिंह ने कहा, “किसी भी महिला ने किसी भी तरह के उत्पीड़न की बात नही कही है, लेकिन हम अपनी तरफ से उनका मेडिकल टेस्ट करायेगें और एक मजिस्ट्रेट के सामने उन्हें पेश करेंगे ताकि उनसे बयान लिया जा सके। फिलहाल यह स्पष्ट नही हो सका है कि आश्रम में तहखानों को बनवाने के पीछे कारण क्या है, हमारी जॉच जारी है।”

जिस समय यह खबर लगाई गयी उस समय मेडिकल परिक्षण के लिये महिलाओं को राम मनोहर लोहिया जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्होंने विरोध प्रदर्शन करना शुरु कर दिया और मेडिकल जांच से इनकार कर दिया।

इधर कांपिल और फर्रूखाबाद शहर के थानों में आश्रम के आसपास रहने वाले लोगो नें दीक्षित समेत छह लोगो के खिलाफ लिखित शिकायत दी है जिसमें कहा गया है कि आश्रम में महिलाओं को जबरदस्ती उनकी मर्जी के बिना रखा गया है। यह भी बताया गया कि पड़ोसियों को रात में अक्सर महिलाओं के रोने, चीखने की आवाज़ आती है, जिसमें मदद करनें की गुहार भी महिलाएं लगाती रहती हैं। इन शिकायतो के आधार पर पुलिस नें IPC की धारा 368 (उपाहरण करके जबरदस्ती बंधक बनाना) के तहत एफ़आईआर दर्ज कर ली है।

प्राथमिकी दर्ज कराने वालों में कांपिल से तेज बहादुर सिंह और फर्रूखाबाद शहर से सुमनलता वर्मा हैं, यह दोनो ही आश्रम के पड़ोस में रहते हैं। प्राथमिकी में दीक्षित के अतिरिक्त जिन लोगो को नामजद किया गया है उनमें दीक्षित का भांजा श्यामु और उसके साथी जियाराम, सियाराम, राज बहादुर शाक्या और यदुराम शामिल हैं।