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कला में विशेष योगदान के लिए डॉ. रेखा रानी को ग्लोबल कॉनकर्ड सम्मान, देश में बढ़ा पूर्वांचल का मान

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– ग्लोबल कॉनकॉर्ड फाउंडेशन ने नई दिल्ली के अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एक कार्यक्रम के दौरान किया सम्मानित…

Priyesh Kumar "Prince"

प्रियेश कुमार “प्रिंस”

गोरखपुर। सपने कौन नहीं देखता, लेकिन सपनों को पूरा करने के लिए हौसलों की उड़ान चाहिए होती है। और इन्हीं हौसलों के दम पर हसरतें पूरी की जाती है। और ऐसा साबित कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के पुर्वांचल की मिट्टी में पली बढ़ी डॉ. रेखा रानी शर्मा ने। डॉ. रेखा चित्रकार के साथ साथ प्रवक्ता भी है जो युवा कलाकारों के सपनो में रंग भरने का काम करती है।

कला के प्रति समर्पित चित्रकार व प्रवक्ता डॉ. रेखा रानी शर्मा का जन्म 20 मार्च 1975 को गोरखपुर में हुआ। जो आज अपने चित्र कला के दम पर पूर्वांचल के मिट्टी की सुगंध पूरी दुनिया मे फैला रही है। चित्रकार डॉ. रेखा रानी किसी परिचय की मोहताज नहीं है, इनके कला और रंग को दुनिया पहचान चुकी है।

dr rekha rani

Janmanchnews.com

डॉ. रेखा रानी ने मात्र 6 माह की उम्र में ही अपने पिता जोखू राम शर्मा को खो दिया, पिता को खोने के बाद भी रेखा रानी के हौसले कम नहीं हुए। परिवार की पूरी जिम्मेदारी रेखा रानी की माँ शकुंतला शर्मा पर थी, जो पति के जगह पर जिलाधिकारी कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर गोरखपुर में ही कार्यरत हो गयी थी।

डॉ. रेखा रानी शर्मा का बचपन से ही कला के प्रति गहरी रुचि थी। पूरा बचपन कॉपी पेंसिल और रंगों से ही खेलता बिता है। हाईस्कूल तक आते आते डॉ. रेखा रानी रंगों की दुनिया के रंगीन सपनो को आकार देना जान गई थी। अब इनकी दुनिया रंगों के ही इर्द गिर्द सिमटती जा रही थी।

हाईस्कूल इंटर की पढ़ाई करने के बाद रेखा रानी ने स्नातक में दृश्य कला को मुख्य विषय के रूप में चुना और धीरे-धीरे 1997 में चित्रकला में परास्नातक कर गोरखपुर विश्वविद्यालय से उच्चशिक्षा भी ग्रहण कर ली।

डॉ. रेखा रानी के सपनो को परवान तब चढ़ा जब इनकी शादी गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध एक महाविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष पद पर कार्यरत सुनील कुमार शर्मा से 1999 में हो गई। शादी के बाद भी रेखा रानी की दीवानगी चित्रकला के प्रति कम नहीं हुई और डीएवी इंटर कालेज गोरखपुर के प्रवक्ता साधु शरण शर्मा के सलाह पर बीएड की शिक्षा लेने के बाद ललित कला एवं संगीत में गोरखपुर विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष वरिष्ट चित्रकार डॉ. भारत भूषण के कुशल निर्देशन में शोध कार्य पूरा कर रेखा रानी से डॉ. रेखा रानी शर्मा बन गई।

पढ़ाई और गृहस्थी के साथ साथ डॉ. रेखा रानी माँ की भी भूमिका में आ गयी थी। उन दिनों को याद करते हुए डॉ. रेखा रानी शर्मा बताती है कि शोध के दौरान मेरी पहली बेटी श्रद्धा 7 साल और दूसरी बेटी अभिज्ञा केवल कुछ ही महीने की थी। जिसे घर पर छोड़ कर शोध कार्य के लिए जाना पड़ता था। लेकिन परिवार में पति के साथ साथ सास और ससुर का भरपूर सहयोग और उत्साह मिला जिसके चलते शोध कार्य पूरा कर पाई।

Dr. Rekha Rani

File Photo: Dr. Rekha Rani

डॉक्टरेट की उपाधि पाने के बाद से डॉ. रेखा रानी ने शिक्षिका बनने के लिए आवेदन भरा, जिसके पीछे मकशद ये था कि विद्यार्थियों को सिखाते पढ़ाते अपने भी हुनर को धार मिलेगी। आज डॉ रेखा रानी शर्मा सी आर डी ए पीजी कॉलेज गोरखपुर के दृश्यकला विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

अपने चित्रकारी की बारीकियों रुचियों पर चर्चा करते हुए डॉ. रेखा बताती है कि मैं अपने छात्राओं के बीच मे ही रहकर केवल काम नहीं करती हूँ, बल्कि कला क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच रह कर भी काम करती हूँ। जिससे बारीकियों के साथ साथ कला की नई विधाओं और प्रयोगों को जाना जा सके। मेरी ज्यादार पेंटिंग माडर्न आर्ट के रूप में अध्यात्म और सृजन पर आधारित है। पूर्वांचल की लोक कला परम्परा को भी अपने पेंटिंग्स का हिस्सा बना रही हूँ, ताकि मेरी कला के माध्यम से मेरे देश की सभ्यता संस्कृति और परम्पराओ का विस्तार देश में ही नहीं अपितु दुनिया के कोने-कोने तक हो और फले फुले।

डॉ. रेखा रानी शर्मा के चित्रों की प्रदर्शनी की शुरुआत गोरखपुर विश्वविद्यालय के अमृता कला वीथिका से हुई, जो आज देश के दिल्ली जयपुर कानपुर लखनऊ झांसी ग्वालियर नागपुर जबलपुर केरल लुधियाना कलकत्ता से होती हुई दुनिया के तमाम देशों तक पहुँच रही है।

आज डॉ. रेखा रानी की बनाई पेंटिंग दुनिया के तमाम देशों की शोभा बढ़ा रही है और साथ मे पूर्वांचल की मिट्टी की महक विदेशों में फैल रही है। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (हेग) नीदरलैंड आर्ट एग्जिविशन सेंटर हनोई(वियतनाम) लाइट माल ऑफ अमीरात (दुबई) स्पेशजेन (फ्रांस) दो बार लंदन के द नेहरू सेंटर में भी डॉ. रेखा रानी शर्मा की चित्र प्रदर्शनी लग चुकी है। जहां वैश्विक स्तर पर सराहना और सम्मान भी मिला। ग्लोबल कॉनकॉर्ड फाउंडेशन नई दिल्ली द्वारा कला के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए राष्ट्रिय स्तर पर 4 सितम्बर 2018 को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

अपनी कला के लिए मशहूर डॉ रेखा रानी दूरदर्शन केंद्र उत्तर प्रदेश व गोरखपुर पर भी कला परिक्रमा में एक वार्ता प्रस्तुति भी दे चुकी है।इसके अलावा इनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय जनरल्स में भी प्रकाशित हुए है। डॉ. रेखा देश और विदेश में होने वाली तमाम अंतराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर चुकी है। अभी हाल ही में 1145 कलाकारों के साथ काम करके डॉ. रेखा रानी ने गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर दुनिया के नक्शे पर देश प्रदेश और पूर्वांचल की प्रतिभा को स्थापित किया है।

कला की धनी साधक डॉ रेखा रानी को अब तक देश और दुनिया के तमाम मंचो से सम्मान मिल चुका है, जिसमे कला प्रतिष्ठा अवार्ड,कला निधि अवार्ड, डॉ. धुली चंद अवार्ड, रविन्द्र कला सम्मान, बेस्ट आर्टिस्ट्स अवार्ड एवं तमाम ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में भी सम्मानित किया जा चुका है।

आज भी डॉ. रेखा रानी शर्मा कला को अपने रूह में बसाई हुई है, अभी भी इनके हौंसले की उड़ान बाकी है। भारतीय परंपरा और संस्कृति में रची बसी डॉ. रेखा रानी के लिए कला ही इनकी साधना और पूजा है।