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Gayatri Prajapati

कैसे गुजरी पूर्व मंत्री की पहली रात…

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मीनाक्षी मिश्रा,

लखनऊ। बत्ती लगी गाड़ी, चाक चौबंद सुरक्षा, सत्ता का सुख, ऐश्वर्य भोग, आये दिन महिलाओं से अवैध संबंधों की उठ रही अफवाहों के मध्य गायत्री प्रजापति आख़िरकार महिला से दुराचार के जुर्म में जेल पहुँच ही गये। पाँच साल तक सत्ता का जबर्दस्त भोग करने वाले केंद्र पूर्व मंत्री गायत्री जब जेल पहुंचे तो उनके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। जबकि जेल में पहले से बंद उनके कुछ पुराने साथ‌ियों ने ढांढस बंधाया तो वो कुछ सहज महसूस करने लगे।

कोर्ट से जारी गिरफ़्तारी वारंट के पश्चात पुलिस के खूब छकाने वाले पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को जेल में पहली रात चोरों और जेबकतरों के साथ बितानी पड़ी। उसे मुलाहिजा बैरक में छुटभैये गुंडे-बदमाशों के साथ रखा गया था। हमेशा आराम व समस्त सुख सुविधाओं की जिंदगी जीने वाले गायत्री को जेल में सुविधा और सिफारिश के लिए एमएलसी-विधायक पहुंचे। लेकिन किसी की एक न चली। सूत्रों के अनुसार सपा सरकार के एक नेता ने गायत्री को बीमार बताते हुए अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की, लेकिन सफल न हो सके।

वही जेल प्रशासन ने गायत्री से मुलाकात करने वालों पर सख्त रवैया अपनाते हुए किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नही दी। जबकि घंटों प्रयास के बाद भी मुलाकात न कर पाने की कसक लेकर नेता लौट गए।

जबकि पुलिस टीम दोपहर लगभग सवा बारह बजे गायत्री को लेकर जेल पहुंची। पुलिस जीप के पीछे-पीछे गायत्री के करीबी और समर्थक लग्जरी कारों से गए। यहां समर्थकों ने गायत्री से मिलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें धकिया दिया।


गायत्री के बेटे अनिल के साथ साथ प्रतापगढ़ के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह, सीतापुर के एमएलसी आनंद भदौरिया, उन्नाव के एमएलसी सुनील सिंह साजन, हमीरपुर के एमएलसी रमेश मिश्रा, सुल्तानपुर के एमएलसी शैलेंद्र सिंह, सुल्तानपुर के जिला सहकारी बैंक के सभापति धर्मेंद्र सिंह, पूर्व विधायक अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह सहित कई बड़े नेता उससे मिलने पहुंचे लेकिन जेल प्रशासन ने गेट के अंदर उन्हें जाने नही दिया।


तकरीबन साढ़े बारह बजे गायत्री को जेल में दाखिल कराकर पुलिस लौट गई। वही जेल प्रशासन के भीतर गायत्री की सघन तलाशी ली गयी।

दोपहर तकरीबन एक बजे जेल के नियमों के मुताबिक पूर्व मंत्री गायत्री को मुलाहिजा बैरक भेज दिया गया। यहां गायत्री को अगले दस दिन तक एक आम बंदी की तरह रखा जायेगा। उसके साथ जेबकतरी, चोरी, मारपीट, छिनैती के अलावा छोटे-मोटे अपराध में बंद 50 से ज्यादा गुंडे-बदमाश रहेंगे।

गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट में पूर्व मंत्री के साथ आरोपी अमेठी का लेखपाल अशोक तिवारी, निजी सचिव रूपेश्वर उर्फ रूपेश, बिजनेस पार्टनर विकास वर्मा और अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह और कानपुर का आशीष शुक्ला भी बैरक में बंद हैं।


बैरक में घुसते ही अन्य पांचों आरोपियों ने गायत्री का स्वागत किया। हालांकि, गायत्री की हालत खराब थी। और उसका चेहरा उतरा था। अतः साथियों ने उसे हिम्मत बंधाई।