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अभी-अभी: सड़क दुर्घटना में घायल युवक को अपना खून देकर बचानें के प्रयास में लगें हैं पत्रकार

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शबाब ख़ान,

वाराणसी: समाचार संकलन के लिए एक अस्पताल से दूसरे नर्सिग होम का चक्कर लगाना इन-फील्ड पत्रकारों का रोज का काम है। सड़क दुर्घटना की खबर मिलते ही मौके पर पहुँचे पत्रकारों के एक समुह के साथ आज कुछ ऐसा हुआ जो आज के युग में कम ही देखने को मिलता है।

जनपद के थाना जैतपुर अन्तर्गत नक्की घाट क्षेत्र में आटो और साईकिल मे जोरदार भिड़ंत हुई। साईकिल सवार का नाम मुकेश वल्द रामजी है। गंभीर रूप से घायल मुकेश को बेहोशी की हालत में नजदीकी क्लिनिक मे ईलाज हेतु ले जाया गया, जहॉ उसे जब होश नही आया तो प्राईवेट डाक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। मुकेश के मोबाईल में सेव नंबरों को डॉयल करके किसी तरह उसके परिवार वालो को सूचना दी गई।

मुकेश की गंभीर हालत को देखते हुए  मल्टी स्पेशिलिटी सिंह मेडिकल में दाखिल कराया गया है। समाचार लिखे जाते समय तक मुकेश की हालत गंभीर बनी हुई थी। जैतपुरा पुलिस नें आटो रिक्शा चालक को हिरासत में लिया हुआ है और उसके रिक्शे को थानें में लाकर खड़ा कर दिया गया, बावजूद इसकेे कि रिक्शा ड्राईवर बार-बार कह रहा था कि गल्ती उसकी नही थी, उसके इस बयान की पुष्टि प्रत्क्षदर्शियों नें भी किया।

बताया जा रहा है कि साईकिल सवार मुकेश कानों में मोबाईल का ईयरप्लग लगाकर फोन पर किसी से बात करता हुआ आ रहा था। मोबाईल पर बात करते करते साईकिल चलानें से उसका ध्यान भंग हो गया और वह सामने से तेज गति से आते ऑटो रिक्शा को नही देख पाया, नतीजन आमने-सामने से दोनो वाहनों की भीषण भिड़त हो गई।

सिंह मेडिकल्स के डाक्टर इंचार्ज नें बताया कि मुकेश के सिर मे आटो के बैक व्यु मिरर का लोहे का हैण्डल टकराया है जिससे उसे स्कल फ्रैक्चर हुआ है। इससे उसका खून काफी मात्रा में बह गया। साथ ही उसके सीने की पसलियों को भी गंभीर चोटे आयी है, एक्सरे करने पर पता चलेगा कि पसलियों में फ्रैक्चर है या नही।

फिलहाल, मुकेश के लिए ओ-पॉजिटिव ग्रुप के खून की व्यवस्था की जा रही है, यदि ब्लड बैंक से ओ प्लस रक्त नही मिलता तो इसी ग्रुप के किसी डोनर से कम से कम दो युनिट रक्त की आवश्यकता होगी। अस्पताल कर्मी ब्लड बैंक से संपर्क करनें में लगे थे, साथ ही मौके पर पहुँचे मुकेश के परिजनों से भी ओ-पॉजिटिव ग्रुप के व्यक्ति विशेष को ब्लड डोनेशन के लिए लाने की सलाह दी गई है।

मौके पर समाचार संकलन के लिए गये पत्रकारों से भी मुकेश के पिता ब्लड ग्रुप पूछ रहे थे। कई पत्रकार जिन्हे अपना ग्रुप पता था उन्होने बता दिया कि उनका ब्लड ए या बी पॉजिटिव है। किसी की जानकरी में ओ-पॉजिटिव नही था। दो पत्रकारों ने अपना ग्रुप पता न होने की स्थिति में ब्लड टेस्ट कराया। जिनमे से एक के ओ-पॉजिटिव ग्रुप होने की पुष्टि हो गई। लेकिन जब अस्पताल कर्मी उस पत्रकार को महादान यानि रक्तदान कराने के लिए बुलाने आये तब तक वह पत्रकार बंधु किसी और अस्पताल में किसी दूसरे समाचार संकलन के बहानें खिसक लिए थे।

चूंकि एक पत्रकार दूसरे पत्रकार की लोकेशन से वाकिफ़ होते है, इसलिए 19 वर्षीय युवक की जान बचानें की खातिर पत्रकारों का एक जत्था ओ-पॉजिटिव वाले पत्रकार की खोज में रवाना कर किया गया। 15 मिनट के बाद हमारे पास सूचना आयी कि ओ-पॉजिटिव पत्रकार बनारस में पत्रकारों के गढ़ भदँऊ चुंगी क्षेत्र की मंजु चायवाले की दुकान पर बैठे चाय की चुस्कियों सहित सिगरेट का कश लेते नजर आये है। सेलिब्रेटी बन चुके पत्रकार को रक्तदान के लिए किसी प्रकार राजी करके वापस सिंह मेडिकल्स लाया गया है।

जहां उनके ब्लड के नमूने को लेकर पैथालाजिस्ट यह जानने में लगा है कि कही ओ-पॉजिटिव वाले पत्रकार बंधु का खून किसी संक्रामित बिमारी जैसे एचआईवी, एच1बी1 के वायरस से युक्त तो नही है। अस्पताल कर्मी उनके ब्लड को टेस्ट करने में लगे हैं और इस बीच इस पत्रकार सहित सात और पत्रकार ‘स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप’ की भुमिका निभाते हुए ओ-पॉजिटिव पत्रकार को घेर कर बैठे हैं, और रक्तदान महादान की महिमा का वर्णन करके उनके जाने वाले खून को जीवन दायिनी खून साबित करनें में लगे हैं।

हालांकि, इन सबके बीच उन्नीस वर्षीय युवक की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसकी वजह साईकिल चलाते वक्त मोबाईल का इस्तमाल बताया जा रहा है।

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