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मछुआरे के बेकार जाल में उलझा मिला विशालकाय सॉंप, प्रधानपति ने किया सपेरों के हवाले

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शबाब ख़ान,

वाराणसी: पड़ाव क्षेत्र के बखरा स्थित साहूपुरी मार्ग पर मछली मारने वाले जाल मे उलझा हुआ एक विशालकाय और जहरीला सॉंप लोगों को मिला। दरअसल किसी मछुआरे नें बखरां गांव के बसवार मे मछली मारने वाला बेकार हो चुका फटा उलझा हुआ जाल फेक दिया था। बीती रात को सांप जब वहॉं से निकला तो नॉयलान के तारों से बने जाल मे उलझ गया, निकलने की कोशिश में विशालकाय सॉंप इतना उलझ गया कि उसका बाहर निकल पाना असम्भव सा हो गया।

सुबह ग्रामीणों ने देखा तो सॉंप को जाल समेत साहूपुरी मार्ग के किनारे खाली पड़ी जमीन पर फेंक दिया। फिर लगना शुरू हुई तमाशाबीन की भीड़। उसी दौरान जानकारी मिलने पर चांदीतारा के पूर्व ग्राम प्रधानपति संतोष जायसवाल मौके पर आये और दो लोगों से जाल सहित सर्प को गोरैया स्थित सपेरों के गॉंव भेज दिया।

शायद प्रधानपति के अक्ल कुछ कुंद थी वरना वो वन विभाग या पेटा जैसी किसी संस्था को फोन करते, जिससे जाल मे उलझे सॉंप को बचा लिया जाता। बहुत कम लोगो को पता है कि सपेरों के पास कोई भी सॉंप 15-20 दिन से ज्यादा जिंदा नही रहते, क्योंकि सपेरे सॉंप को काबू में करने के बाद सबसे पहले उसके दोनों जहर वाले दांतों को तोड़कर निकाल देते हैं, घायल सॉंप जितने दिन भी सपेरों की टोकरी में रहता है भूखा ही रहता है।

वैज्ञानिक सत्य है कि सॉंप मांसाहारी जीव होता है, जो छोटे जानवरो जैसे मेढक, चूहा आदि का शिकार करके पेट भरता है। यह भी वैज्ञानिक सत्य है कि सॉंप दूध नही पीता, और बहुत भूखा होने पर यदि वो थोड़ा दूध पी भी ले तो उसे निमोनिया हो जाता है, जाहिर है सपेरे सॉंप को वेटेनरी डाक्टर के पास लेकर जाएगे नही। ऐसे में सॉंप की मौत निश्चित है।

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