BREAKING NEWS
Search

आखिर क्यूं अमेठी में नही है विकास का चुनावी मुद्दा कौन है इसकी असली वजह

167

मीनाक्षी मिश्रा,

अमेठी। पांच साल पहले 2012 के विधान सभा चुनाव में अमेठी में विकास का मुद्दा जोर-शोर से था। पांच साल बीतते बीतते यह शोर कम होने लगा। 2017 के विधान सभा चुनाव में विकास के मुद्दे का शोर थम सा गया। आखिर इसकी असली वजह क्या है।

साल दर साल चुनाव होते रहे। हर चुनाव में विकास का ही मुद्दा प्रत्याशियों की जुबां पर रहता था। लेकिन इस बार अमेठी में विकास का मुद्दा सभी प्रत्याशियों के पटल से गायब है। जिक्र जरूरी है कि 2012 में अमेठी का विधान सभा चुनाव विकास के ही मुद्दे पर लड़ा गया था। विकास को लेकर नाराज अमेठी की जनता ने परिवर्तन की आंधी में जीत का सेहरा सपा के सिर् बाँधा।

पहली बार साइकिल अमेठी से बरास्ता लखनऊ पहुंची तो साइकिल सवार गायत्री प्रजापति की अहमियत भी बढ़ी। उन्हें वह रूतबा भी हासिल हुआ जिसके वह हकदार थे। अमेठी में कांग्रेस का तिलस्म तोड़ने वाले पहले सपाई भी बने। अमेठी में सूख चुकी सपा की जड़े भी मजबूत की। आमजनता ने भरोसा किया तो कसौटी पर खरा उतरने की बारी गायत्री प्रजापति की थी।

पांच साल बाद फिर से विधान सभा चुनाव आया तो होने वाले असल विकास का मुद्दा आमजनता के बीच से गायब है। यहां तक कि सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की जुबां पर भी विकास का मुद्दा नही आ रहा है। अगर इसकी कोई वजह है तो वो हैं गायत्री प्रजापति। मूलभूत सुविधाओं के साथ वह बुनियादी जरूरतों को भी गायत्री प्रजापति ने पूरा किया जिसकी अमेठी की आमजनता को दरकार थी।

गरीबों के हमदर्द बने तो बेसहारों के सहारा भी। जाति पांत व भेदभाव को दरकिनार का सबका विकास व सबका सम्मान किया। यही वजह है कि जिस विकास को लेकर अमेठी तरस रही थी उसी अमेठी में आज विकास का मुद्दा गायब है। कहना गलत न होगा कि कहीं न कहीं इसकी असली वजह गायत्री प्रजापति हैं। पांच वर्षों में किये गए गायत्री प्रजापति के विकास कार्यों का प्रतिफल भी देने को आम जनता तैयार है।